February 24, 2026

सदन में भड़के नीतीश, भाई वीरेंद्र से कहा- आप लोगों ने कुछ काम नहीं किया, तभी आपकी संख्या कम हुई

पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को सदन का माहौल उस वक्त अचानक गर्म हो गया, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। चौकीदारों पर कथित लाठीचार्ज के मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। बात इतनी बढ़ गई कि कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही बाधित करनी पड़ी और पूरे सदन में शोर-शराबे का माहौल बन गया।
चौकीदारों के मुद्दे से शुरू हुआ विवाद
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने चौकीदारों पर हुए कथित लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चौकीदारों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया है। उनके अनुसार, अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे चौकीदारों पर बल प्रयोग किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी सरकार जनता की आवाज सुनने में विफल हो रही है और उसे इस मामले में सदन के सामने जवाब देना चाहिए।
सरकार की ओर से आया जवाब
विपक्ष के आरोपों पर सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि सरकार चौकीदारों की समस्याओं को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है। मंत्री ने यह भी कहा कि यदि सरकार का इरादा प्रदर्शन को दबाने का होता, तो चौकीदारों को प्रदर्शन की अनुमति ही नहीं दी जाती। सरकार ने न सिर्फ प्रदर्शन की अनुमति दी, बल्कि अब उनकी मांगों पर विचार करते हुए समाधान निकालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री के बयान से बढ़ा तनाव
इसी दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी सीट से खड़े हुए और विपक्ष की ओर मुखातिब होते हुए तीखे शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने राजद विधायक भाई वीरेंद्र को संबोधित करते हुए कहा कि आप बैठ जाइए, आपकी संख्या कितनी कम हो गई है। उन्होंने आगे कहा कि आप लोगों ने कभी कोई ठोस काम नहीं किया, इसी वजह से आज आपकी संख्या घट गई है। मुख्यमंत्री के इस बयान ने सदन के माहौल को और अधिक गर्म कर दिया।
विपक्ष का जोरदार विरोध
मुख्यमंत्री के बयान से नाराज विपक्षी विधायक अपनी सीटों से उठ खड़े हुए और सदन के वेल में पहुंच गए। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। ‘नीतीश होश में आओ’ जैसे नारे गूंजने लगे और विपक्षी विधायक हाथों में तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान सदन में अफरातफरी की स्थिति बन गई और कार्यवाही सुचारू रूप से चलाना मुश्किल हो गया।
अध्यक्ष की अपील और मार्शलों की कार्रवाई
स्थिति को संभालने के लिए विधानसभा अध्यक्ष ने कई बार विपक्षी विधायकों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने की अपील की। हालांकि, नारेबाजी और प्रदर्शन जारी रहने के कारण मार्शलों को बुलाना पड़ा। मार्शलों ने प्रदर्शन कर रहे विधायकों की तख्तियां हटाईं, जिसके बाद धीरे-धीरे सदन का माहौल शांत हुआ और कार्यवाही दोबारा शुरू की जा सकी।
अन्य मुद्दों पर भी हुई चर्चा
हंगामे के बीच सदन में कुछ अन्य अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। शिक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में आपदा प्रबंधन से जुड़ी पढ़ाई शुरू करने के लिए संबंधित संस्थानों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में छात्राओं की सुविधा के लिए सेनेटरी वेंडिंग मशीन लगाने की योजना बनाई गई है। इस योजना पर करीब 40 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह जानकारी जदयू विधायक कोमल सिंह के सवाल के जवाब में दी गई।
सदन के बाहर भी दिखा विरोध
गौरतलब है कि सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भी विपक्षी विधायकों ने विधानसभा परिसर के पोर्टिको में प्रदर्शन किया था। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और विभिन्न मुद्दों को लेकर तख्तियां लहराईं। इस दौरान राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित बिहार दौरे को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह दौरा राजनीतिक और सांप्रदायिक माहौल को प्रभावित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। सत्ता पक्ष ने उनके इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे महज राजनीतिक बयानबाजी करार दिया।
राजनीतिक माहौल और आगे की तस्वीर
विधानसभा में हुई इस तीखी बहस और हंगामे ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि बिहार की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। बजट सत्र के दौरान जिस तरह से मुद्दों पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, उससे संकेत मिलते हैं कि आने वाले दिनों में सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक माहौल और अधिक गरम हो सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि वह जनता से जुड़े सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर रही है और समाधान निकालना उसकी प्राथमिकता है।

 

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