रोहिणी का नीतीश पर हमला, कहा- चाचा झूठी कसम खाकर धोखा देते हैं, उनकी कोई विश्वसनीयता नहीं
पटना। रोहिणी आचार्य, जो राजद प्रमुख लालू यादव की बेटी और सारण से लोकसभा सीट की उम्मीदवार हैं, अक्सर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा हमला करती रहती हैं। हाल ही में उन्होंने फिर से एक ट्विट के माध्यम से नीतीश कुमार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए तंज कसा है। उनके इस ताजा हमले की वजह नीतीश कुमार का बयान था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अब वे किसी भी राजनीतिक गठबंधन में नहीं जाएंगे और अपने मौजूदा गठबंधन के साथ ही रहेंगे। रोहिणी ने अपने ट्विट में लिखा कि तीज के दिन एक बार फिर से किसी ने झूठी कसम खाई है। उन्होंने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग उन पर विश्वास करेंगे, वे धोखा खाएंगे। इस टिप्पणी ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि यह सवाल खड़ा करता है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक स्थिरता और विश्वसनीयता पर लोग किस हद तक भरोसा कर सकते हैं। यह हमला उस समय हुआ जब नीतीश कुमार ने हाल ही में एक बयान दिया कि वे अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ फिर से गठबंधन नहीं करेंगे। नीतीश ने माना कि उन्होंने पहले दो बार भाजपा के साथ जाने की गलती की थी, लेकिन अब वे इस गलती को दोबारा नहीं दोहराएंगे। उनका यह बयान उन अटकलों के बीच आया कि वे फिर से किसी नए राजनीतिक समीकरण की ओर रुख कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि वे अब कहीं नहीं जाएंगे और अपने मौजूदा गठबंधन में ही रहेंगे। नीतीश कुमार का भाजपा से रिश्ता 1995 से शुरू हुआ था, लेकिन बीच में उन्होंने दो बार भाजपा का साथ छोड़ा और फिर वापस लौटे। इस राजनीतिक अस्थिरता के कारण उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं। रोहिणी आचार्य ने उनके इस इतिहास को लेकर हमला किया और इशारा किया कि नीतीश कुमार का राजनीतिक दांव-पेच पर यकीन करना धोखा खा जाने के बराबर है। बिहार की राजनीति में यह नया हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रोहिणी आचार्य, जो अपने पिता लालू यादव की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं, नीतीश कुमार के खिलाफ अपने बयानों के जरिए खुद को एक महत्वपूर्ण विरोधी नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं। समाजवादी विचारधारा और राजद के समर्थकों के बीच रोहिणी का यह बयान नीतीश कुमार के खिलाफ एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा सकता है। इसके साथ ही यह राजनीतिक अस्थिरता के मुद्दे को भी हवा देता है, जहां एक तरफ नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक स्थिरता की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके आलोचक, जैसे कि रोहिणी आचार्य, उनके पलटी मारने के इतिहास को सामने रखकर सवाल खड़े कर रहे हैं।


