February 23, 2026

अप्रैल से लागू होगी शिक्षकों के स्थानांतरण की नई नियमावली, तीन साल में मिलेगा तबादले का मौका

पटना। बिहार में स्कूल शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर बड़ी प्रशासनिक पहल होने जा रही है। शिक्षा विभाग सभी कोटि के शिक्षकों के तबादले की मौजूदा नियमावली में संशोधन कर रहा है। प्रस्तावित नई नियमावली को मार्च में अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। इसके बाद इसे राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही अप्रैल से यह नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। जून महीने में बड़े पैमाने पर शिक्षकों के तबादले इसी संशोधित नियमावली के आधार पर किए जाएंगे।
पांच वर्ष की बाध्यता घटाकर तीन वर्ष करने की तैयारी
पूर्व में तैयार प्रारूप में यह प्रावधान था कि नियुक्ति की तिथि से पांच वर्ष तक शिक्षक का दूसरे विद्यालय में तबादला नहीं होगा। इस व्यवस्था का शिक्षक संगठनों ने तीखा विरोध किया था। उनका कहना था कि लंबी अवधि की बाध्यता से पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ेंगी। विरोध को देखते हुए अब इस अवधि को घटाकर तीन वर्ष करने की तैयारी की जा रही है। नई नीति के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में तीन वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद शिक्षक स्थानांतरण के पात्र होंगे। हालांकि गंभीर और असाध्य बीमारी या अन्य विशेष परिस्थितियों में तीन वर्ष से पहले भी तबादले की अनुमति दी जा सकेगी। इससे उन शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो स्वास्थ्य या पारिवारिक कारणों से स्थानांतरण चाहते हैं।
छह लाख शिक्षकों पर पड़ेगा असर
राज्य में लगभग छह लाख शिक्षक विभिन्न श्रेणियों में कार्यरत हैं। नई नियमावली का प्रभाव इन सभी पर पड़ेगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि संशोधित व्यवस्था से स्थानांतरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनेगी। लंबे समय से शिक्षक तबादले को लेकर स्पष्ट और एकरूप नीति की मांग कर रहे थे। सरकार का उद्देश्य है कि स्थानांतरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करते हुए प्रशासनिक जरूरतों और शिक्षकों की व्यक्तिगत परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाया जाए। जून में संभावित बड़े पैमाने पर तबादले को देखते हुए विभाग तैयारी में जुटा है।
जिलास्तर और प्रमंडल स्तर पर बनेगी समिति
नई नियमावली के प्रारूप में स्थानांतरण के लिए समितियों का गठन भी प्रस्तावित है। जिलास्तरीय शिक्षकों के तबादले के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति बनेगी। इस समिति में उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता स्तर के एक अधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित अन्य सदस्य शामिल होंगे। समिति की अनुशंसा के आधार पर संबंधित शिक्षकों का तबादला किया जाएगा। वहीं प्रधानाध्यापक और प्रमंडल स्तर के शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति गठित की जाएगी। इसमें क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक समेत प्रमंडल स्तर के अधिकारी सदस्य होंगे। दोनों समितियों की सिफारिश के आधार पर अंतिम आदेश जारी होंगे। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
चुनाव से पहले लौटा दिया गया था प्रस्ताव
बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ माह पहले भी शिक्षक स्थानांतरण नियमावली को मंत्रिपरिषद में भेजा गया था। उस समय कई बिंदुओं पर संशोधन की आवश्यकता बताकर इसे वापस कर दिया गया था। अब विभाग ने शिक्षक संगठनों की आपत्तियों और सुझावों को ध्यान में रखते हुए प्रारूप में बदलाव किया है। माना जा रहा है कि इस बार नियमावली को अंतिम रूप देकर शीघ्र लागू कर दिया जाएगा।
होली से पहले वेतन और पेंशन भुगतान में देरी से नाराजगी
इधर, शिक्षकों के वेतन और पेंशन भुगतान में हो रही देरी को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। होली जैसे प्रमुख त्योहार से पहले भुगतान न होने से विश्वविद्यालयों के सेवानिवृत्त और कार्यरत शिक्षकों में चिंता देखी जा रही है। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने कहा है कि पिछले दो महीनों से पेंशनधारियों को भुगतान नहीं मिला है। संघ के अनुसार जनवरी माह की पेंशन अब तक जारी नहीं की गई है। वहीं नियमित शिक्षकों के फरवरी माह के वेतन को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। संघ का कहना है कि त्योहार के समय भुगतान में देरी से शिक्षकों और उनके परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
संघ ने रखी चार दिन में भुगतान की मांग
बैठक में निर्णय लिया गया कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से अविलंब बकाया राशि जारी करने की मांग की जाएगी। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में कुलसचिव और संबंधित अधिकारियों से बातचीत हुई है, लेकिन अब तक ठोस आश्वासन नहीं मिला है। संघ ने मांग की है कि पेंशन और फरवरी माह का वेतन अगले चार दिनों के भीतर जारी किया जाए, ताकि शिक्षक सम्मानपूर्वक होली का पर्व मना सकें। बैठक में उपस्थित वरिष्ठ शिक्षकों ने भी सरकार से शीघ्र सकारात्मक पहल करने की अपील की। एक ओर जहां स्थानांतरण की नई नीति से शिक्षकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर वेतन और पेंशन भुगतान में देरी ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी है।

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