February 15, 2026

बिहार में प्रचंड बहुमत से जीतेगा एनडीए गठबंधन, 2010 के चुनाव से भी ज्यादा मिलेंगे सीटें: संजय झा

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान के बाद सियासी माहौल और भी गरम हो गया है। एनडीए के नेताओं का आत्मविश्वास जहां सातवें आसमान पर है, वहीं विपक्षी खेमे में बेचैनी दिखाई दे रही है। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन को इस बार ऐतिहासिक जनादेश मिलने वाला है। उन्होंने दावा किया कि एनडीए को इस चुनाव में 2010 से भी ज्यादा सीटें मिलेंगी और एक बार फिर बिहार में प्रचंड बहुमत से डबल इंजन की सरकार बनेगी।
पहले चरण के मतदान ने बढ़ाया आत्मविश्वास
संजय झा ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि 6 नवंबर को हुए पहले चरण के मतदान ने बिहार की राजनीति की दिशा तय कर दी है। सुबह से ही सभी मतदान केंद्रों पर महिलाओं की लंबी कतारें दिखीं। उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों ने इस बार जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर शांति, सुरक्षा, समृद्धि और सुशासन के पक्ष में वोट किया है। उन्होंने यह भी लिखा कि मतदान के आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि जनता नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा कर रही है। “यह उत्साह दिखाता है कि लोगों का विश्वास एनडीए में अटूट है। पहले चरण के फीडबैक से साफ है कि एनडीए की जीत पहले से भी बड़ी होगी और बिहार की जनता ने नीतीश कुमार को फिर से मुख्यमंत्री बनाने का मन बना लिया है।”
विपक्ष पर साधा निशाना
संजय झा ने अपने पोस्ट में विपक्ष पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि करारी हार को सामने देखकर विपक्ष बौखला गया है। वे अब तरह-तरह के बहाने और झूठे नैरेटिव तैयार कर रहे हैं ताकि जनता को गुमराह किया जा सके। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब समझ चुकी है कि विपक्ष सिर्फ सत्ता पाने के लिए झूठ और भ्रम फैलाने की राजनीति करता है, जबकि एनडीए विकास, रोजगार और स्थिरता की राजनीति में विश्वास रखता है।
2000 से अब तक के मतदान के आंकड़ों का जिक्र
जदयू नेता ने अपने पोस्ट में बिहार के पिछले विधानसभा चुनावों के आंकड़ों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बिहार के चुनावी इतिहास में अब तक सबसे ज्यादा मतदान वर्ष 2000 में हुआ था। तब कुल 62.57 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था और उस समय भी सत्तारूढ़ सरकार की वापसी हुई थी। इसके बाद फरवरी 2005 में हुए चुनाव में मतदान प्रतिशत घटकर सिर्फ 46.5 प्रतिशत रह गया और उसी वर्ष सत्ता परिवर्तन हुआ। अक्तूबर 2005 के चुनाव में तो मतदान 45.85 प्रतिशत पर आ गया था। यानी वर्ष 2000 की तुलना में लगभग 17 प्रतिशत कम वोट पड़े थे और नतीजा सत्ता बदलने के रूप में सामने आया। संजय झा ने कहा कि इसके बाद जब भी बिहार में मतदान का प्रतिशत बढ़ा है, जनता ने नीतीश कुमार पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा, “2010 में मतदान बढ़ा, तो एनडीए को भारी बहुमत मिला। 2015 में 2010 से ज्यादा वोट पड़े, और 2020 में 2015 से भी अधिक। हर बार लोगों ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के लिए वोट किया। इस बार मतदान का रिकॉर्ड टूटा है, जिसका सीधा मतलब है कि जनता का विश्वास अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है।”
महिलाओं और युवाओं का समर्थन निर्णायक
संजय झा ने कहा कि इस बार का चुनाव विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं के उत्साह से प्रभावित है। उन्होंने कहा कि 6 नवंबर को हुए मतदान में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक रही। कई जिलों में महिलाओं ने रिकॉर्ड मतदान किया, जो इस बात का प्रमाण है कि वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कामों से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में जो काम किए हैं, वे आज मिसाल बन चुके हैं। पंचायती राज में 50% आरक्षण, सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण और स्वयं सहायता समूहों के जरिये आर्थिक आत्मनिर्भरता ने बिहार की महिलाओं को नई पहचान दी है। यही वजह है कि आज महिलाएं नीतीश कुमार को अपना नेता मानकर मतदान कर रही हैं।
एनडीए की नीतियों पर भरोसा
संजय झा ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने पिछले दो दशकों में विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। डबल इंजन सरकार ने केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर मिलकर काम किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बिहार के लिए जो योजनाएं चलाईं, उनका लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि एक ईमानदार, संवेदनशील और दूरदर्शी नेता की है, जिन्होंने बिहार को भय और भ्रष्टाचार से निकालकर विकास के रास्ते पर लाया है। यही वजह है कि जनता इस बार पहले से भी अधिक मजबूती से एनडीए के साथ खड़ी है। संजय झा के बयान से यह साफ झलकता है कि जदयू और एनडीए नेतृत्व को पहले चरण के मतदान के बाद जबरदस्त आत्मविश्वास मिला है। लगातार बढ़ते मतदान प्रतिशत और महिलाओं के उत्साह ने एनडीए की उम्मीदों को नई उड़ान दी है। उनका कहना है कि बिहार की जनता अब जाति और धर्म की राजनीति से ऊपर उठ चुकी है। लोग शांति, स्थिरता और सुशासन चाहते हैं — और यह सब नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही संभव है। बिहार की सियासत के इस नए मोड़ पर संजय झा का दावा सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि एनडीए इस बार एक ऐतिहासिक बहुमत की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2025 का चुनाव परिणाम एक बार फिर साबित करेगा — बिहार नीतीश के साथ है और विकास की राह पर आगे बढ़ने को तैयार है।

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