पटना में छठ महापर्व के लिए चूल्हा बना रही मुस्लिम महिलाएं, सड़कों पर दिख रही सामाजिक एकता की मिसाल
- मुस्लिम समुदाय की श्रद्धा: कहा- हमलोग भी छठी मईया को मानते हैं, साफ-सफाई और पवित्रता का रखते हैं विशेष ध्यान
पटना छठ महापर्व बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड राज्यों नें विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। दीवाली के बाद से ही छठ की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। छठ व्रत रखने वाले लोग ज्यादातर लोग अपने घर जाकर इस महापर्व में शामिल होते हैं। 2024 की दिवाली के बाद 2024 के छठ महापर्व की तैयारी शुरू होने लगेगी। बात करें छठ महापर्व के कार्यक्रम की तो आगामी 5 नवंबर से इस महान अनुष्ठान की शुरुआत होगी। 5 नवंबर को नहाए खाए मनाया जाएगा इसके अगले दिन शाम को खरना का प्रसाद खाकर 36 घंटे के महान निर्जला उपवास का अनुष्ठान शुरू होगा। इसी छठ कार्यक्रम के बीच में राजधानी पटना से सामाजिक सौहार्द और एकता देखने को मिल रही है। राजधानी पटना में कई जगहों पर मुस्लिम महिलाएं छठ महापर्व के लिए मिट्टी के चूल्हे बनाने का काम कई सालों से करती आ रही है। 2024 के छठ के लिए भी यह महिलाएं हिंदू मुस्लिम एकता का परिचय देते हुए छठ महापर्व के लिए चूल्हा बनाने का काम कर रही है। शुक्रवार को बातचीत में चूल्हा बनाने वाली मुस्लिम महिलाएं बताती हैं कि हम भी इस पर्व को बिहार का सबसे बड़ा त्योहार मानते हैं। कार्तिक महीने की शुरुआत होने से ही हम लोग अपने घरों में मांसाहार बनाना और खाना बंद कर देते हैं। चूल्हा बनाने के दौरान हम लोग महापर्व की पवित्रता का भी ध्यान रखते हैं क्योंकि यह एक विशेष प्रकार का महापर्व है। मुस्लिम महिलाओं ने बातचीत में बताया कि हम लोगों को भी छठी मैया से डर लगता है कि अगर हमसे कुछ गलती हो जाए तो मां हमें तुरंत दंडित करेगी। जिसके कारण हम लोग इस त्यौहार में साफ सफाई और पवित्रता का खास ध्यान रखते हैं चूल्हा बनाने के क्रम में हम लोग कुछ भी खाते नहीं हैं। साथ ही हो सके तो चूल्हा हम लोग बिना चप्पल पहने बनाते हैं। बिना नहाए हम लोग चूल्हे का निर्माण नहीं शुरू करते हैं। छठ पर्व को लेकर तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। इसमें मिट्टी के चूल्हे का खास महत्व होता है। छठ का प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर ही बनाया जाता है। पटना के वीरचंद पटेल मार्ग के किनारे मुस्लिम समुदाय की महिलाएं हर साल यहां मिट्टी का चूल्हा बनाकर बेचती हैं। लगभग 40 सालों से यह महिलाएं छठ के लिए चूल्हा बड़े आस्था और श्रद्धा से बनाती हैं। चूल्हा बनाने वाली एक मुस्लिम महिला ने बातचीत में बताया कि हम लोगों ने इस बार 150 से 200 तक चूल्हे बना लिए हैं। जैसे-जैसे महापर्व नजदीक आएगा वैसे-वैसे इनकी डिमांड बढ़ जाएगी। महापर्व में मिट्टी के चूल्हे की कीमत को लेकर उन्होंने बताया कि महंगाई के कारण कीमतों में थोड़ी बहुत वृद्धि देखने को मिली है। पिछले साल की तुलना में 2024 में चूल्हा-थोड़ा महंगा बिकेगा। चूल्हे की कीमत 200 से शुरू होकर 400 के बीच रहती है। जिसकी जितनी श्रद्धा होती है वह उतनी कीमत देकर इस चूल्हे को खरीदना है। हम लोग भी इस महापर्व में ज्यादा से ज्यादा चूल्हे बनाकर छठ में अपना सहयोग देते हैं। चूल्हे को तैयार करने के लिए यह सबसे पहले पुनपुन के साफ इलाके से अपनी पूंजी का इस्तेमाल कर मिट्टी मंगाती हैं। चूल्हा बनाने से पहले मिट्टी से कंकड़-पत्थर चुनकर निकालती हैं। इसके बाद पानी और गेहूं का भूसा मिलाकर मिट्टी को चूल्हे का आकार देती हैं। जहां एक और अभी पूरे देश में हिंदू मुसलमान में प्रतिद्वंद्विता दिख रही है वहीं बिहार का छठ महापर्व दोनों समुदाय को एक दूसरे के नजदीक ला रहा है। मुस्लिम महिलाओं के द्वारा छठ महापर्व के लिए बनाया जा रहा चूल्हा यह बताता है कि यह महापर्व किसी एक विशेष समुदाय का नहीं बल्कि पूरे बिहार का एक विशेष महापर्व है।


