February 21, 2026

चिराग पासवान की मां नहीं जाएगी राज्यसभा, पार्टी ने चुनाव लड़ने की अटकलों को किया खारिज

पटना। बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव की घोषणा के साथ ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। 26 फरवरी से नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि 16 मार्च को मतदान और उसी दिन मतगणना भी कराई जाएगी। इस बीच एनडीए के भीतर उम्मीदवारों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। खासतौर पर पांचवीं सीट को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन पर अब विराम लगता दिख रहा है।
चिराग पासवान की मां को लेकर अटकलें खत्म
राज्यसभा चुनाव को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की मां रीना पासवान के नाम को लेकर थी। राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि एनडीए की पांचवीं सीट से रीना पासवान को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हालांकि अब खुद चिराग पासवान और उनकी पार्टी ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। चिराग पासवान ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि उनकी मां राजनीति में नहीं आ रही हैं और न ही लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) राज्यसभा की किसी सीट की दावेदारी कर रही है।
नामांकन से पहले स्थिति स्पष्ट
चिराग पासवान के इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि रीना पासवान का नाम केवल राजनीतिक कयासों तक ही सीमित था। पार्टी सूत्रों का कहना है कि लोक जनशक्ति पार्टी का फिलहाल राज्यसभा चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है और वह एनडीए के फैसले के साथ खड़ी रहेगी। इससे पहले नामांकन की तारीख नजदीक आने के कारण इन चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया था, लेकिन अब तस्वीर काफी हद तक साफ होती नजर आ रही है।
एनडीए में सीटों का गणित
एनडीए के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर भी लगभग सहमति बन चुकी है। गठबंधन सूत्रों के अनुसार, पांच में से चार सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है। इनमें दो सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और दो सीटों पर जनता दल यूनाइटेड अपने उम्मीदवार उतारेंगे। दोनों दलों के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल है, जिससे इन सीटों पर जीत को लेकर ज्यादा संशय नहीं है।
पांचवीं सीट पर सस्पेंस कायम
हालांकि पांचवीं सीट को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। एनडीए में शामिल सहयोगी दलों के बीच इस सीट को लेकर चर्चा जारी है। पहले इस सीट के लिए जीतन राम मांझी का नाम सामने आया था, लेकिन भाजपा ने उस दावे को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद यह माना जाने लगा कि यह सीट किसी अन्य सहयोगी को दी जा सकती है। अब चिराग पासवान की पार्टी के चुनाव न लड़ने की घोषणा के बाद राजनीतिक समीकरण एक बार फिर बदलते नजर आ रहे हैं।
उपेंद्र कुशवाहा के लिए खुल सकता है रास्ता
चिराग पासवान के बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पांचवीं सीट के लिए राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा का नाम फिर से चर्चा में आ सकता है। हालांकि इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। एनडीए के भीतर इस बात को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है कि किस सहयोगी को यह सीट दी जाए, ताकि गठबंधन में संतुलन बना रहे और भविष्य की राजनीति में भी सहयोग मजबूत हो।
एनडीए की रणनीति पर नजर
राज्यसभा चुनाव को एनडीए सिर्फ सीटों की संख्या के लिहाज से नहीं देख रहा, बल्कि इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए गठबंधन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी सहयोगी में असंतोष न पनपे। इसी वजह से पांचवीं सीट को लेकर फैसला बेहद सोच-समझकर लिया जा रहा है।
चिराग पासवान का स्पष्ट रुख
चिराग पासवान ने अपने बयान में यह भी कहा कि राजनीति में किसी का नाम उछालना और फिर उस पर अटकलें लगाना सही नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि उनकी मां का सार्वजनिक जीवन से कोई लेना-देना नहीं है और पार्टी संगठन के तौर पर भी राज्यसभा चुनाव में उतरने की तैयारी में नहीं है। उनके इस बयान को एनडीए के भीतर स्थिरता और स्पष्टता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस बयान से एक तरफ जहां अनावश्यक चर्चाओं पर विराम लगा है, वहीं दूसरी ओर पांचवीं सीट को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है। सभी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि एनडीए आखिर किस सहयोगी को यह मौका देता है।
आगे की तस्वीर
नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही तस्वीर और साफ हो जाएगी। एनडीए के लिए चार सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन पांचवीं सीट का फैसला गठबंधन की रणनीति और भविष्य की राजनीति के लिहाज से अहम होगा। फिलहाल इतना तय है कि चिराग पासवान की मां रीना पासवान राज्यसभा की दौड़ में शामिल नहीं होंगी और उनकी पार्टी ने चुनाव लड़ने की अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अब देखना होगा कि एनडीए इस खाली जगह को किस तरह भरता है और इसका राजनीतिक असर आने वाले समय में कैसे दिखाई देता है।

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