January 28, 2026

पटना की मेयर ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, मदद की लगाई गुहार, कहा- परिवार को टारगेट कर रहे

पटना। नगर निगम में चल रही राजनीतिक उठापटक अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। नगर निगम की मेयर सीता साहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है। उनका आरोप है कि उनके और उनके परिवार के खिलाफ लगातार प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है, जो राजनीतिक साजिश का हिस्सा हो सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने पटना की स्थानीय राजनीति को गरमा दिया है।
बोर्ड बैठक में हंगामा बना विवाद की जड़
11 जुलाई को पटना नगर निगम की बोर्ड बैठक एक होटल में आयोजित की गई थी। इस बैठक के दौरान जमकर हंगामा हुआ। कई पार्षदों ने आरोप लगाया कि मेयर के बेटे शिशिर कुमार बैठक में पहुंचे और गाली-गलौज के साथ-साथ मारपीट भी की। साथ ही दावा किया गया कि वह हथियारबंद बॉडीगार्ड के साथ अंदर घुसे। इस घटना को लेकर गांधी मैदान थाने में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई।
मेयर का आरोप: बिना वारंट घर पर छापा, अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध
घटना के बाद प्रशासन की ओर से मेयर के आवास पर छापा मारा गया, जिसे लेकर मेयर ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने बिना वारंट उनके घर पर छापा मारा, जो न केवल अवैध है, बल्कि यह उनके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की साजिश भी हो सकती है। उन्होंने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में यह भी पूछा है कि किस अधिकारी के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई।
स्वतंत्र जांच की मांग और नगर आयुक्त पर सवाल
सीता साहू ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी पूछा है कि जब नगर निगम की बोर्ड बैठक में 80% पार्षद मौजूद थे और बहुमत से प्रस्ताव पारित हुए, तो नगर आयुक्त अनिमेष कुमार पराशर ने बैठक का बहिष्कार क्यों किया? उनके अनुसार, आयुक्त का रवैया पूरी प्रक्रिया को अपमानित करने वाला और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने वाला था।
मानहानि का नोटिस और बेटे की ओर से कानूनी कार्रवाई
मेयर के बेटे शिशिर कुमार ने भी इस विवाद में मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने नगर आयुक्त को 5 करोड़ रुपये का मानहानि का नोटिस भेजा है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि आयुक्त ने मीडिया में शिशिर को “अपराधी” कहा और दावा किया कि वह “हथियारों के साथ बैठक में घुस आया”। इस बयान को उनकी छवि के खिलाफ बताया गया है। नोटिस में सात दिनों के अंदर सार्वजनिक माफी की मांग की गई है।
राजनीतिक साजिश या प्रशासनिक सख्ती?
इस पूरे प्रकरण में दो पक्ष उभरकर सामने आ रहे हैं। एक ओर नगर निगम के पार्षद और अधिकारी हैं, जो शिशिर कुमार पर बैठक में हंगामा और अनुचित व्यवहार का आरोप लगा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मेयर सीता साहू इसे राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई बता रही हैं। उनके अनुसार, नगर निगम की बैठक और पार्षदों के फैसलों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। पटना नगर निगम की यह घटना सिर्फ एक स्थानीय निकाय विवाद नहीं रह गई है, बल्कि इसमें राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर टकराव भी साफ दिखाई दे रहा है। मेयर द्वारा प्रधानमंत्री को लिखा गया पत्र इस विवाद को और व्यापक बना सकता है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में कैसे निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है और क्या कोई स्वतंत्र जांच इस विवाद की सच्चाई सामने ला सकेगी।

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