महाबोधि मंदिर में बदले गए कई नियम, परिसर में प्लास्टिक के पैकेट, बोतल और कंटेनर लगा बैन
गया। महाबोधि मंदिर परिसर को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाए रखने के लिए मंदिर प्रशासन ने एक अहम और सख्त फैसला लिया है। गुरुवार से मंदिर परिसर के भीतर प्लास्टिक के पैकेट, बोतल और किसी भी तरह के प्लास्टिक कंटेनर के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यह निर्णय केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे पर्यावरण संरक्षण, धार्मिक स्थल की पवित्रता और विश्व धरोहर की गरिमा को बनाए रखने का उद्देश्य भी शामिल है। महाबोधि मंदिर बौद्ध धर्म का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। यहीं भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां आते हैं। ऐसे में परिसर की साफ-सफाई और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया था, जिसे देखते हुए यह कठोर कदम उठाया गया है।
प्लास्टिक कचरे से बढ़ रही थी समस्या
अब तक मंदिर परिसर में श्रद्धालु पूजा सामग्री, जल, प्रसाद और अन्य आवश्यक वस्तुएं प्लास्टिक के पैकेट या बोतलों में लेकर आते थे। पूजा-अर्चना के बाद यही प्लास्टिक सामग्री अक्सर परिसर में ही छोड़ दी जाती थी। इससे न सिर्फ गंदगी फैलती थी, बल्कि प्लास्टिक कचरे का ढेर धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा था। सफाईकर्मियों द्वारा नियमित सफाई के बावजूद प्लास्टिक पूरी तरह हट नहीं पाता था। प्लास्टिक एक ऐसा पदार्थ है जो लंबे समय तक नष्ट नहीं होता और मिट्टी, जल और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। विश्व धरोहर स्थल होने के कारण महाबोधि मंदिर परिसर में इस तरह का प्रदूषण उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए भी चिंता का विषय बन गया था। इसी पृष्ठभूमि में बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी ने प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध का फैसला लिया।
प्रवेश द्वारों पर जागरूकता और निगरानी
प्लास्टिक प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए मंदिर के सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों पर सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्डों पर चार अलग-अलग भाषाओं में नियमों की जानकारी दी गई है, ताकि भारत के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ विदेशी पर्यटक भी इसे आसानी से समझ सकें। प्रशासन की ओर से साफ तौर पर कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति प्लास्टिक का पैकेट, बोतल या कंटेनर लेकर मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं कर सकता। सुरक्षा कर्मी और मंदिर प्रशासन के कर्मचारी प्रवेश द्वारों पर जांच कर रहे हैं। यदि किसी श्रद्धालु के पास प्लास्टिक सामग्री पाई जाती है, तो उसे परिसर में प्रवेश से पहले ही रोक दिया जा रहा है और बिना प्लास्टिक के वापस आने को कहा जा रहा है।
श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से सहयोग की अपील की है। उनसे कहा गया है कि वे पूजा सामग्री कपड़े के थैलों, कागज के बैग या अन्य पर्यावरण-अनुकूल साधनों में लेकर आएं। पानी के लिए स्टील, तांबे या कांच की बोतलों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। प्रशासन का मानना है कि यह नियम शुरू में कुछ लोगों को असुविधाजनक लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे लोग इसकी आदत डाल लेंगे। जब सभी श्रद्धालु इस पहल में सहयोग करेंगे, तभी महाबोधि मंदिर परिसर को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाया जा सकेगा।
पहले भी की गई थीं अपीलें, अब दिखी सख्ती
यह पहली बार नहीं है जब मंदिर प्रशासन ने प्लास्टिक के उपयोग को लेकर चिंता जताई हो। इससे पहले भी समय-समय पर श्रद्धालुओं से अपील की जाती रही थी कि वे प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें। हालांकि, अपीलों का अपेक्षित असर नहीं दिख रहा था। लोग सुविधा के चलते फिर से प्लास्टिक का उपयोग करने लगते थे। अब प्रशासन ने तय किया है कि केवल अपील से काम नहीं चलेगा, बल्कि नियमों को सख्ती से लागू करना होगा। इसी वजह से प्रवेश द्वारों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और नियमों के उल्लंघन पर तुरंत रोक लगाई जा रही है।
विश्व धरोहर की गरिमा बनाए रखने की पहल
महाबोधि मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। ऐसे स्थलों की स्वच्छता और संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और श्रद्धालुओं का भी नैतिक कर्तव्य है। प्लास्टिक मुक्त परिसर न सिर्फ मंदिर को सुंदर बनाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित भी रखेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि धार्मिक स्थलों पर प्लास्टिक प्रतिबंध से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है। जब लोग आस्था के केंद्रों पर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनते हैं, तो इसका असर उनके दैनिक जीवन पर भी पड़ता है।
भविष्य में और सख्त हो सकते हैं नियम
मंदिर प्रशासन के संकेतों के अनुसार, यदि जरूरत पड़ी तो भविष्य में और भी पर्यावरण हितैषी नियम लागू किए जा सकते हैं। कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाने जैसे कदमों पर भी विचार किया जा रहा है। महाबोधि मंदिर परिसर में प्लास्टिक पर लगाया गया यह पूर्ण प्रतिबंध एक दूरगामी और सकारात्मक पहल है। इससे न सिर्फ परिसर की स्वच्छता में सुधार होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और विश्व धरोहर की गरिमा को बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। श्रद्धालुओं के सहयोग से यह नियम सफल होगा और महाबोधि मंदिर एक आदर्श प्लास्टिक मुक्त धार्मिक स्थल के रूप में स्थापित हो सकेगा।


