January 16, 2026

पटना में प्रशासन के आदेश के बाद भी कई प्राइवेट स्कूल खुले, कड़ाके की ठंड में बच्चों को पढ़ने बुलाया

पटना। राजधानी पटना में कड़ाके की ठंड और लगातार जारी शीतलहर के बीच प्रशासन द्वारा स्कूल बंद रखने के स्पष्ट निर्देश के बावजूद कई निजी स्कूल शुक्रवार को खुले रहे। जिलाधिकारी के आदेशों की खुलेआम अवहेलना करते हुए कुछ स्कूल प्रबंधन ने छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल आने के लिए मजबूर कर दिया। ठिठुरन भरी सर्दी में नौनिहालों के स्कूल पहुंचने की तस्वीरें सामने आने के बाद इस पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है, वहीं प्रशासन की ओर से ऐसे स्कूलों पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं। प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ठंड के प्रकोप को देखते हुए स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी किया था। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य यह था कि अत्यधिक ठंड के कारण छोटे बच्चों को निमोनिया, सर्दी-जुकाम, बुखार और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके बावजूद कुछ निजी स्कूल संचालक अपनी मनमानी से बाज नहीं आए और आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए स्कूल खोल दिए। शुक्रवार सुबह कई क्षेत्रों में यह देखा गया कि छोटे बच्चे स्कूल यूनिफॉर्म में कंपकंपाते हुए स्कूल जाते नजर आए। कई बच्चों के चेहरे लाल और हाथ-पैर सुन्न दिखे। कुछ बच्चे स्वेटर, जैकेट और टोपी पहनकर भी ठंड से बच नहीं पा रहे थे। इस स्थिति को देखकर लोगों ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन स्वयं स्कूल बंद रखने का आदेश दे चुका है, तो निजी स्कूल किस आधार पर बच्चों को बुला रहे हैं। इस विषय पर जब एक निजी स्कूल संचालक से सवाल किया गया तो उन्होंने बेहद हैरान करने वाला तर्क दिया। स्कूल संचालक का कहना था कि यदि बच्चे स्कूल नहीं आएंगे तो उनकी पढ़ाई का नुकसान होगा और वे शिक्षा से वंचित हो जाएंगे। संचालक ने इसे शिक्षा के प्रति जिम्मेदारी बताते हुए स्कूल खुला रखने को उचित ठहराने की कोशिश की। हालांकि लोगों का कहना है कि यह तर्क पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना है, क्योंकि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों का स्वास्थ्य और सुरक्षा भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग भी सक्रिय हुआ है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कहा है कि कड़ाके की ठंड में बच्चों को स्कूल बुलाना नियमों और प्रशासनिक आदेश का खुला उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी हाल में बच्चों के जीवन को खतरे में डालने वाली लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच कराई जाएगी और जो स्कूल आदेश की अनदेखी करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान स्कूलों से जवाब-तलब करने के साथ-साथ उनके पंजीकरण, मान्यता तथा अन्य दस्तावेजों की भी समीक्षा की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर स्कूलों पर जुर्माना लगाने और मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई संभव बताई जा रही है। इस घटना ने निजी स्कूलों की मनमानी और प्रशासनिक आदेशों की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों का कहना है कि कई स्कूल प्रबंधन बच्चों की फीस और उपस्थिति को लेकर दबाव बनाते हैं। छुट्टी के बावजूद स्कूल आने पर मजबूर करने की शिकायतें अक्सर सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार आदेश का उल्लंघन सीधे बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा है, इसलिए नाराजगी अधिक है। शीतलहर और ठंड को देखते हुए प्रशासन की ओर से लगातार अपील भी की जा रही है कि लोग अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें, छोटे बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी में रखा जाए। ऐसे में स्कूल खोलकर बच्चों को बुलाना न केवल अनुचित है बल्कि प्रशासनिक आदेश की अवहेलना भी है। फिलहाल जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से ऐसे स्कूलों की सूची जुटाने और जांच प्रक्रिया तेज करने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दोषी स्कूल प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में कोई भी स्कूल बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।

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