January 16, 2026

पटना में लापता व्यक्ति का शव नाले से बरामद, 10 दिनों से था गायब, जांच में जुटी पुलिस

पटना। राजधानी पटना में एक लापता व्यक्ति का शव नाले से बरामद होने की घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी। दानापुर थाना क्षेत्र के गोला रोड स्थित पुलिस कॉलोनी के पास नाले से जब शव मिला, तब आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। मृतक की पहचान मनेर थाना क्षेत्र के मौलिनगर निवासी जितेंद्र राय के रूप में हुई, जो बीते दस दिनों से लापता थे। इस घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है, वहीं पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।
नाले से शव मिलने की सूचना
घटना की जानकारी उस समय सामने आई, जब स्थानीय लोगों ने गोला रोड के पास नाले में एक शव पड़ा देखा। इसकी सूचना तुरंत डायल-112 पर दी गई। सूचना मिलते ही डायल-112 की टीम और दानापुर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। नाले में शव फंसा होने के कारण उसे बाहर निकालने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। आसपास मौजूद लोगों की मदद से आखिरकार शव को नाले से बाहर निकाला गया।
शव की पहचान और परिजनों को सूचना
शव बाहर निकलने के बाद मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने उसकी पहचान की। इसके बाद पुलिस को परिजनों का संपर्क नंबर उपलब्ध कराया गया। पुलिस ने तुरंत परिजनों को सूचना दी। कुछ ही देर में यह साफ हो गया कि मृतक मनेर थाना क्षेत्र के मौलिनगर गांव निवासी जितेंद्र राय हैं, जो 10 जनवरी से लापता थे। जैसे ही यह खबर फैली, परिजनों में मातम छा गया।
लापता होने की पूरी कहानी
मृतक के साले सुशील कुमार ने पुलिस को बताया कि जितेंद्र राय 10 जनवरी को अपनी मां के श्राद्धकर्म में शामिल होने के लिए अपने घर से निकले थे। उनका घर मनेर थाना क्षेत्र के मौलिनगर गांव में है। श्राद्धकर्म के बाद उन्हें दानापुर के गोसाई टोला स्थित अपने ससुराल जाना था। वे घर से इसी उद्देश्य से निकले थे, लेकिन ससुराल नहीं पहुंचे। जब काफी देर तक उनका कोई पता नहीं चला और मोबाइल फोन भी बंद मिला, तो परिजनों की चिंता बढ़ गई।
गुमशुदगी की रिपोर्ट
काफी खोजबीन के बाद भी जब जितेंद्र राय का कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने मनेर थाना में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। परिजन लगातार अपने स्तर से भी तलाश कर रहे थे, लेकिन दस दिनों तक कोई जानकारी सामने नहीं आई। इसी बीच नाले से शव मिलने की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।
परिवार की स्थिति और विरोध
जितेंद्र राय के परिवार की स्थिति बेहद दयनीय बताई जा रही है। उनके पांच छोटे बच्चे हैं, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया। जब पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अनुमंडल अस्पताल ले जाने की तैयारी की, तो मौके पर पहुंचे परिजनों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि जब तक परिवार के अन्य सदस्य घटनास्थल पर नहीं पहुंच जाते, तब तक शव को नहीं ले जाने दिया जाएगा। इस दौरान कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया।
परिजनों के आने के बाद आगे की कार्रवाई
लगभग एक घंटे के इंतजार के बाद मृतक की पत्नी और अन्य परिजन मनेर से घटनास्थल पर पहुंचे। परिजनों के पहुंचने के बाद पुलिस ने उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए दानापुर अनुमंडल अस्पताल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।
पुलिस जांच और संभावित पहलू
पुलिस इस मामले को संदिग्ध मानते हुए हर पहलू से जांच कर रही है। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जितेंद्र राय की मौत कैसे हुई और उनका शव नाले तक कैसे पहुंचा। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं यह हादसा था या इसके पीछे किसी साजिश की भूमिका है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और उन लोगों से पूछताछ की जा रही है, जिनसे मृतक की आखिरी बार बातचीत हुई थी।
इलाके में चर्चा और सवाल
घटना के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे दुर्घटना मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग हत्या की आशंका जता रहे हैं। दस दिनों तक लापता रहने के बाद शव का नाले से मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुराग मिल जाता, तो शायद स्थिति कुछ और होती। फिलहाल पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता से की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं मृतक का परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है और चाहता है कि जितेंद्र राय की मौत के पीछे की सच्चाई जल्द से जल्द सामने आए।

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