बिहार-झारखंड के मोस्ट वांटेड बाप-बेटा गिरोह के मनोज-माणिक को एसटीएफ ने बेंगलुरु में घेरा: वीडियो जारी कर सरगनाओ ने की.. एनकाउंटर का डर..

पटना। बिहार तथा झारखंड के मोस्ट वांटेड अपराधी गिरोह के सरगना बाप मनोज तथा बेटा माणिक को गोपनीय सूचना के आधार पर बेंगलुरु महानगर में एसटीएफ ने दबिश बनाकर घेर लिया है। जिसकी पुष्टि एक वीडियो जारी करके बाप बेटा गिरोह के मनोज-माणिक ने खुद की है। राजधानी पटना समेत बिहार तथा झारखंड के कई जिलों में अपराधिक घटनाओं का कहर बरपाने वाले इस बाप- बेटा गिरोह के ऊपर लंबे समय से एसटीएफ ऑपरेशन कर रही थी। सूचना के मुताबिक बेंगलुरु में इनके छुपे होने की सूचना मिली। जिसके बाद दबिश बनाई गई कुख्यात माणिक ने वीडियो जारी कर बताया है कि एसटीएफ ने उन्हें घेर रखा है तथा एनकाउंटर में मार सकती है। बाप बेटा गिरोह के कारनामों से राजधानी पटना बुरी तरह दहल चुका है नौबतपुर से लेकर खड़ा हुआ बाप बेटा हीरो विगत एक दशक से बिहार तथा झारखंड के कई जिलों में फैल चुका था। बताया जाता है कि एसटीएफ के द्वारा बेंगलुरु में इन्हें घर लेना तथा उनकी संभावित गिरफ्तारी की उम्मीद ने बिहार पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि की पृष्ठभूमि तैयार कर दी है।वीडियो जारी कर कुख्यात मानिक ने फर्जी एनकाउंटर का संभावना व्यक्त किया है। दोनों ने वीडियो जारी कर जान की भीख मांगी है।पटना जिले के नौबतपुर का रहने वाला माणिक सिंह अपने पिता मनोज सिंह के साथ मिलकर गैंग ऑपरेट करता था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, दोनों पर पटना के खगौल, दानापुर, बिहटा, दुल्हिनबाजार, पालीगंज, शाहपुर, बिक्रम, नौबतपुर, बाढ़, रनियातालाब और पटना वेस्ट के कई थानों में हत्या, डकैती, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और गोलीबारी के करीब 40 से 50 संगीन मामले दर्ज हैं। इसके अलावा झारखंड के जमशेदपुर, रांची, हजारीबाग समेत अन्य शहरों में भी इनके काले कारनामों की फेहरिस्त लंबी है।बताया जाता है कि माणिक पिछले पांच सालों से फरार चल रहा था। इससे पहले साल 2015 में बाप-बेटा को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जेल से छूटते ही दोनों फिर अंडरग्राउंड हो गए। जेल से छूटने के बाद बाप-बेटा गिरोह के सरगना मनोज मानिक लगातार ठिकाना बदलते रहे हैं।बताया जाता है कि झारखंड, पश्चिम बंगाल तथा असम तक इन्होंने ठिकाने बना रखे थे। इधर एसटीएफ को जब इनके ठिकानों की भनक लगी तो वे और दूर सुदूर राज्यों में छुपकर रहने लगे।मनोज तथा माणिक ने अपने-अपने समय में अपने-अपने पिता के प्रतिशोध के लिए ही हथियार उठाया था।मनोज ने अपने पिता रामशरण सिंह की हत्या के बाद प्रतिशोध की भावना से हथियार उठाकर गिरोह तैयार किया।वहीं दूसरी तरफ माणिक के बारे में बताया जाता है कि वह महज 12 साल की उम्र में ही अपराध की काली दुनिया में उतर गया। तथा खगौल में एक मार्बल व्यवसायी की हत्या के बाद उसने अपने रक्त रंजित कारनामों की शुरुआत की थी। नौबतपुर से लेकर राजधानी पटना समेत मध्य बिहार के कई जिलों में दोनों बाप-बेटा गिरोह की तूती बोलती थी। वहीं लंबे अरसे से झारखंड में भी इन लोगों ने अपने धाक जमा रखी थी।

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