आरजेडी प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए मंगनीलाल मंडल ने किया नामांकन, लालू-तेजस्वी समेत कई नेता रहे मौजूद
पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर से महत्वपूर्ण बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा परिवर्तन करते हुए नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शनिवार को पटना स्थित राजद कार्यालय में मंगनीलाल मंडल ने प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया। इस अवसर पर पार्टी के तमाम प्रमुख नेता मौजूद रहे, जिसमें राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, पाटलिपुत्र सांसद मीसा भारती और वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी शामिल थे।
जगदानंद सिंह की विदाई, नए युग की शुरुआत
मंगनीलाल मंडल के नामांकन के साथ ही वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह की विदाई लगभग तय मानी जा रही है। राजद में आंतरिक चुनाव की औपचारिकता बहुत कम देखने को मिलती है, और परंपरागत रूप से अध्यक्ष पद पर आम सहमति से नियुक्ति होती है। इसलिए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि मंगनीलाल मंडल निर्विरोध रूप से अगले प्रदेश अध्यक्ष होंगे। यह बदलाव केवल एक पद की अदला-बदली नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने की रणनीति का हिस्सा है।
सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति
मंगनीलाल मंडल की नियुक्ति को राजद की सामाजिक न्याय की नीति और पिछड़े, अति पिछड़े तथा मधेशी समुदायों को जोड़ने की एक सोची-समझी कोशिश माना जा रहा है। मंडल अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं और वे लंबे समय से इस वर्ग की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में उनका प्रदेश अध्यक्ष बनना पार्टी की रणनीतिक दिशा को दर्शाता है। यह कदम तेजस्वी यादव के नेतृत्व को मजबूत बनाने और आगामी चुनावों में जातिगत संतुलन साधने का प्रयास भी है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और अनुभव
मंगनीलाल मंडल बिहार की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वे लंबे समय तक लालू यादव के सहयोगी रहे हैं। 1986 से 2004 तक वे बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे। इस दौरान वे राज्य कैबिनेट में मंत्री भी बने। इसके बाद वे 2004 से 2009 तक राज्यसभा के सदस्य रहे और 2009 में लोकसभा में झंझारपुर निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए। कुछ वर्षों के लिए वे जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में भी शामिल हुए, जहां उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन पार्टी में कार्य करने की स्वतंत्रता न मिलने और आंतरिक लोकतंत्र की कमी का आरोप लगाते हुए वे जनवरी 2024 में पुनः राजद में लौट आए।
लालू और तेजस्वी का विश्वास
नामांकन के समय लालू यादव और तेजस्वी यादव की उपस्थिति से यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी नेतृत्व का पूरा समर्थन मंगनीलाल मंडल को प्राप्त है। लालू ने उन्हें हमेशा सामाजिक न्याय के संघर्ष का सच्चा सिपाही माना है। वहीं तेजस्वी यादव उन्हें संगठनात्मक मजबूती और चुनावी समीकरणों को साधने के लिहाज से एक उपयुक्त चेहरा मानते हैं।
19 जून को होगा अंतिम निर्णय
अब 19 जून को होने वाली राजद राज्य परिषद की बैठक में यह औपचारिक रूप से तय होगा कि पार्टी की बागडोर मंगनीलाल मंडल को सौंपी जाएगी। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों और पार्टी की परंपराओं को देखते हुए यह लगभग तय माना जा रहा है। मंगनीलाल मंडल की नियुक्ति से पार्टी को अति पिछड़ा वर्ग और सीमावर्ती क्षेत्रों में जनाधार मजबूत करने में मदद मिल सकती है। मंगनीलाल मंडल का प्रदेश अध्यक्ष बनना न केवल राजद के लिए एक संगठनात्मक बदलाव है, बल्कि यह पार्टी की भविष्य की राजनीति की दिशा को भी दर्शाता है। जातीय संतुलन, संगठनात्मक मजबूती और सामाजिक न्याय के एजेंडे को लेकर राजद जिस तरह से आगे बढ़ रही है, उसमें मंडल की भूमिका महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। आने वाले विधानसभा चुनावों में यह बदलाव राजद के लिए कितनी राजनीतिक बढ़त लाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।


