ममता बनर्जी का गृहमंत्री पर हमला, कहा- दबाव के कारण राज्यपाल ने दिया इस्तीफा, ये यहां नहीं चलेगा
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। राज्यपाल सीवी आनंद बोस के अचानक इस्तीफा देने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और विशेष रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह का निर्णय राजनीतिक दबाव में लिया गया प्रतीत होता है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि राज्यपाल सीवी आनंद बोस के इस्तीफे के पीछे क्या कारण है, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन समय और परिस्थितियों को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि इस निर्णय के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब गृह मंत्री अमित शाह के दबाव में हुआ है। उनके अनुसार चुनाव से पहले इस तरह के बदलाव केवल राजनीतिक लाभ को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि उन्हें स्वयं अमित शाह से इस घटनाक्रम की जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि बोस के इस्तीफे के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल और पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद का अतिरिक्त प्रभार दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले को लेकर राज्य सरकार से किसी प्रकार का औपचारिक परामर्श नहीं किया गया। दूसरी ओर, सीवी आनंद बोस ने दिल्ली से अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने पद छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि वह लगभग साढ़े तीन वर्ष तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे हैं और उनके लिए यह अवधि पर्याप्त रही है। हालांकि उन्होंने अपने अचानक इस्तीफे के कारणों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। यही कारण है कि राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। गौरतलब है कि सीवी आनंद बोस ने 17 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण किया था। उनका कार्यकाल नवंबर 2027 तक निर्धारित था। ऐसे में कार्यकाल समाप्त होने से लगभग 20 महीने पहले ही उनका इस्तीफा देना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद वह पश्चिम बंगाल के लगातार दूसरे ऐसे राज्यपाल बन गए हैं जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़ दिया। राज्यपाल के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सामाजिक माध्यम मंच “एक्स” पर एक संदेश जारी कर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह इस घटनाक्रम से स्तब्ध और चिंतित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि चुनाव से पहले राज्यपाल पर केंद्रीय स्तर से राजनीतिक दबाव डाला गया हो तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर सहकारी संघवाद के सिद्धांतों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि राज्यों से बिना परामर्श किए इस प्रकार के एकतरफा निर्णय लेना लोकतांत्रिक परंपराओं और राज्यों की गरिमा के लिए उचित नहीं है। उनके अनुसार ऐसे फैसले किसी राज्य के हित में नहीं बल्कि किसी विशेष राजनीतिक दल के हित में लिए जाते हैं। हालांकि भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई ने मुख्यमंत्री के आरोपों को निराधार बताया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि राजभवन में परिवर्तन होना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि सीवी आनंद बोस ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस इस मामले का अनावश्यक राजनीतिकरण कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम का समय भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्वाचन आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा जल्द किए जाने की संभावना है। ऐसे समय में राज्यपाल का इस्तीफा राजनीतिक विश्लेषकों और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। अपने कार्यकाल के दौरान सीवी आनंद बोस और राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार के बीच कई बार टकराव की स्थिति भी देखने को मिली थी। उन्होंने कई मौकों पर राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की थी, जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच संबंध अक्सर तनावपूर्ण रहे। इस बीच राजभवन के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बोस का इस्तीफा राष्ट्रपति भवन को भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि वह दिन में पहले दिल्ली पहुंचे थे और वहीं से उन्होंने अपना त्यागपत्र भेजा। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्यपाल के पद पर होने वाले बदलाव का राज्य की राजनीतिक स्थिति और आगामी विधानसभा चुनावों पर क्या प्रभाव पड़ता है।


