आयकर नियम 2026 लागू, वेतनभोगी कर्मचारियों के भत्तों और कर व्यवस्था में बड़ा बदलाव

  • मकान किराया भत्ता, बच्चों के भत्ते और सुविधाओं के कर निर्धारण में आई स्पष्टता
  • पारदर्शिता बढ़ाने के लिए दस्तावेज अनिवार्य, नई व्यवस्था से बदलेंगे टैक्स गणना के तरीके

नई दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा आयकर नियम 2026 को अधिसूचित कर दिया गया है, जो एक अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। इन नए नियमों के तहत वेतनभोगी कर्मचारियों को मिलने वाले विभिन्न भत्तों, सुविधाओं और उनके कर निर्धारण के तरीकों में व्यापक बदलाव किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सरल और व्यवस्थित बनाना है, जिससे करदाताओं और प्रशासन दोनों को लाभ मिल सके। नए नियमों के तहत मकान किराया भत्ता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। पुरानी कर व्यवस्था में मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों को उच्च श्रेणी में रखा गया है। इन शहरों में रहने वाले कर्मचारी अपने मूल वेतन का 50 प्रतिशत तक मकान किराया भत्ता में छूट का दावा कर सकेंगे। वहीं अन्य शहरों में यह सीमा 40 प्रतिशत तय की गई है। हालांकि नई कर व्यवस्था अपनाने वाले कर्मचारियों को इस छूट का लाभ नहीं मिलेगा। बच्चों से संबंधित भत्तों में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। शिक्षा भत्ता को 100 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह प्रति बच्चा कर दिया गया है, जो अधिकतम दो बच्चों तक लागू होगा। इसके अतिरिक्त छात्रावास भत्ता को 300 रुपये से बढ़ाकर 9000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। यह बदलाव विशेष रूप से मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए राहतकारी माना जा रहा है, क्योंकि इससे शिक्षा संबंधी खर्चों में सहायता मिलेगी। कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को प्रदान की जाने वाली वाहन सुविधा के कर निर्धारण में भी संशोधन किया गया है। इंजन क्षमता के आधार पर कर मूल्य तय किया गया है। 1.6 लीटर तक की इंजन क्षमता वाली कार पर 5000 रुपये प्रति माह और चालक के लिए 3000 रुपये अतिरिक्त जोड़े जाएंगे। वहीं इससे अधिक क्षमता वाली कार पर 7000 रुपये प्रति माह और चालक के लिए 3000 रुपये जोड़े जाएंगे। यदि कर्मचारी स्वयं वाहन का खर्च वहन करता है, तो कर की गणना कम मूल्य के आधार पर की जाएगी। इससे कर निर्धारण प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और सुसंगत बनेगी। नए नियमों के अनुसार, यदि नियोक्ता कर्मचारी को घरेलू सेवाएं जैसे माली, सफाईकर्मी या चौकीदार उपलब्ध कराता है, तो यह कर योग्य माना जाएगा। इसी प्रकार गैस, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं भी कर योग्य आय में शामिल की जाएंगी। यदि ये सेवाएं कंपनी के संसाधनों से प्रदान की जाती हैं, तो इनका मूल्य उत्पादन लागत के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। उपहार और वाउचर से संबंधित नियमों में भी स्पष्टता लाई गई है। यदि किसी वित्तीय वर्ष में उपहार और वाउचर का कुल मूल्य 15,000 रुपये से अधिक होता है, तो उसे कर योग्य आय में शामिल किया जाएगा। इससे पहले इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अभाव था। कार्यस्थल पर मिलने वाले भोजन और पेय पदार्थों को कर मुक्त रखा गया है, लेकिन इसकी सीमा 200 रुपये प्रति वस्तु तय की गई है। इसके अलावा भोजन कूपन की व्यवस्था भी जारी रहेगी, जिससे कर्मचारियों को कुछ राहत मिलती रहेगी। पुरानी कर व्यवस्था का चयन करने वाले कर्मचारियों के लिए अब सभी प्रकार की कटौतियों के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया है। मकान किराया भत्ता के लिए मकान मालिक का नाम, पता और स्थायी खाता संख्या देना आवश्यक होगा, विशेषकर जब वार्षिक किराया एक लाख रुपये से अधिक हो। इसी तरह अवकाश यात्रा भत्ता के लिए यात्रा खर्च के प्रमाण और गृह ऋण ब्याज पर छूट के लिए ऋण देने वाली संस्था की जानकारी देना अनिवार्य होगा। इन नए नियमों के लागू होने से जहां कर प्रणाली अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी, वहीं कर्मचारियों को अपने खर्च और भत्तों का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा। कुल मिलाकर, यह बदलाव करदाताओं और सरकार के बीच संतुलन स्थापित करने और कर प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।