February 10, 2026

सिविल सेवा परीक्षा के नियमों में हुए बड़े बदलाव, चयनित अधिकारी अब नहीं दे सकेंगे यूपीएससी की परीक्षा

नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े नियमों में बड़े और अहम बदलाव किए हैं। आयोग ने 4 फरवरी 2026 को सिविल सेवा परीक्षा 2026 का नोटिफिकेशन जारी करते हुए साफ कर दिया है कि अब चयन प्रक्रिया, सेवा आवंटन और डिजिटल सुरक्षा को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सख्ती बरती जाएगी। इन बदलावों का सीधा असर उन उम्मीदवारों पर पड़ेगा, जो एक से अधिक बार चयन के बाद फिर से परीक्षा देने की योजना बनाते हैं या पहले से किसी सेवा में कार्यरत हैं।
सिविल सेवा परीक्षा के नए नियमों की घोषणा
यूपीएससी का कहना है कि सिविल सेवा परीक्षा को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और अनुशासित बनाने के उद्देश्य से ये बदलाव किए गए हैं। आयोग के मुताबिक, बीते कुछ वर्षों में सेवा आवंटन को लेकर असमंजस और विवाद की स्थिति बनती रही है, जिसे दूर करने के लिए नियमों को स्पष्ट किया गया है।
आईपीएस को लेकर सख्त प्रावधान
इस बार भारतीय पुलिस सेवा को लेकर नियम और ज्यादा स्पष्ट कर दिए गए हैं। अगर किसी उम्मीदवार का चयन पहले ही भारतीय पुलिस सेवा के लिए हो चुका है, तो वह सिविल सेवा परीक्षा 2026 के जरिए दोबारा इसी सेवा को विकल्प के रूप में नहीं चुन सकेगा। आयोग का मानना है कि एक ही सेवा के लिए बार-बार चयन की प्रक्रिया से प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ता है, इसलिए इस पर रोक जरूरी थी।
कार्यरत आईएएस और आईएफएस अधिकारियों पर रोक
नए नियमों के तहत जो उम्मीदवार पहले से भारतीय प्रशासनिक सेवा या भारतीय विदेश सेवा में कार्यरत हैं, वे अब सिविल सेवा परीक्षा में बैठने के पात्र नहीं होंगे। इसके अलावा, यदि किसी उम्मीदवार की नियुक्ति मुख्य परीक्षा से पहले इन सेवाओं में हो जाती है, तो उसे मुख्य परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि आयोग अब दोहरी स्थिति को पूरी तरह खत्म करना चाहता है।
अंतिम अवसर का प्रावधान
हालांकि आयोग ने उम्मीदवारों को पूरी तरह से मौका खत्म नहीं किया है। जो उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा 2025 या उससे पहले किसी सेवा में चयनित हो चुके हैं, उन्हें अपने बचे हुए प्रयासों का उपयोग करने के लिए 2026 या 2027 में एक अंतिम अवसर दिया गया है। यह अवसर बिना इस्तीफा दिए मिलेगा, लेकिन इसे आखिरी मौका माना जाएगा।
ग्रुप ए सेवाओं से जुड़े नए नियम
जो उम्मीदवार 2026 में ग्रुप ए श्रेणी की किसी सेवा में चयन के बाद फिर से परीक्षा देना चाहते हैं, उनके लिए भी नए नियम तय किए गए हैं। ऐसे उम्मीदवार तभी सिविल सेवा परीक्षा में बैठ सकेंगे, जब उन्हें संबंधित विभाग से प्रशिक्षण में शामिल न होने की औपचारिक छूट मिल जाए। अगर कोई उम्मीदवार न तो प्रशिक्षण में शामिल होता है और न ही छूट लेता है, तो उसका 2026 का आवेदन स्वतः रद्द कर दिया जाएगा।
दो सेवाओं में चयन होने पर फैसला अनिवार्य
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई उम्मीदवार 2027 में फिर से सफल होता है और दो सेवाओं में चयन की स्थिति बनती है, तो उसे दोनों में से केवल एक सेवा चुननी होगी। दूसरी सेवा स्वतः रद्द मानी जाएगी। इससे सेवा आवंटन को लेकर असमंजस खत्म होने की उम्मीद की जा रही है।
डिजिटल सुरक्षा को मिली प्राथमिकता
सिविल सेवा परीक्षा में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए आयोग ने तकनीकी स्तर पर भी बड़े बदलाव किए हैं। अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित चेहरे की पहचान प्रणाली और आधार आधारित सत्यापन को अनिवार्य कर दिया गया है। आयोग का कहना है कि इससे परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी तरह की धोखाधड़ी पर रोक लगेगी।
नया चार चरणों वाला पंजीकरण पोर्टल
उम्मीदवारों को अब एक नए चार चरणों वाले पंजीकरण पोर्टल पर आवेदन करना होगा। यह पोर्टल पूरी तरह आधार से जुड़ा होगा। आयोग के अनुसार, इससे उम्मीदवार की पहचान सुनिश्चित होगी और एक से अधिक फर्जी आवेदन की संभावना समाप्त हो जाएगी। पंजीकरण प्रक्रिया को भी पहले से ज्यादा सरल और सुरक्षित बनाने का दावा किया गया है।
शैक्षणिक योग्यता के नियम
भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास भारत में किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक डिग्री होना अनिवार्य है। वहीं भारतीय वन सेवा के उम्मीदवारों के लिए पशुपालन, पशु चिकित्सा विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, रसायन विज्ञान, भूविज्ञान, गणित, भौतिकी, सांख्यिकी, प्राणी विज्ञान और कृषि जैसे विषयों में स्नातक डिग्री जरूरी होगी।
भविष्य की तैयारी पर असर
इन बदलावों के बाद यह साफ हो गया है कि सिविल सेवा परीक्षा अब पहले से कहीं ज्यादा अनुशासित और नियमबद्ध होने जा रही है। उम्मीदवारों को अब अपनी रणनीति बहुत सोच-समझकर बनानी होगी। आयोग का मानना है कि इन नियमों से न सिर्फ परीक्षा प्रक्रिया मजबूत होगी, बल्कि प्रशासनिक सेवाओं में स्थिरता और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

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