महाराष्ट्र से ज्यादा लोग बिहार में शराब पर प्रतिबंध के बावजूद पीते हैं शराब, केंद्र सरकार की रिपोर्ट में खुलासा
पटना।बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद अन्य राज्यों की तुलना में बिहार में शराब का सेवन ज्यादा लोग कर रहे हैं।केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के द्वारा जारी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट में इसकी खुलासा की गई है।इस रिपोर्ट में देशभर के सभी राज्यों में की जा रही शराब के सेवन के आंकड़ों को दर्शाया गया है।नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार बिहार में शराबबंदी के बावजूद 15.5% लोग शराब का सेवन कर रहे हैं।जबकि इसी सर्वे रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र, जहां पर शराबबंदी जैसा कोई कानून नहीं है।वहां अभी भी शराब के सेवन करने वालों का आंकड़ा 13.3 प्रतिशत है।रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के शहरी इलाकों में 13 फ़ीसदी लोग शराब का सेवन करते हैं। जबकि शराबबंदी के बावजूद बिहार के शहरी इलाकों में 14 फ़ीसदी लोग शराब का सेवन करते हैं।केंद्र सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के द्वारा कराए गए सर्वे ने बिहार में शराबबंदी कानून की पोल खोल कर रख दी है।रिपोर्ट के अनुसार बिहार में शराबबंदी के बावजूद बड़ी संख्या में नाबालिग भी शराब का सेवन कर रहे हैं।इतना ही नहीं शहरी इलाकों के तुलना में ग्रामीण इलाकों में शराब की खपत ज्यादा है।केंद्र सरकार के इस रिपोर्ट के सर्वे में बिहार में लागू शराबबंदी कानून पर नए सिरे से बहस को आरंभ कर दिया है।यह कि कल कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजीत शर्मा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर शराबबंदी कानून को समाप्त किए जाने की बात कही है।उन्होंने अपने पत्र में लिखा है शराब बंदी कानून से सिर्फ राजस्व का घाटा हो रहा है।वहीं हजारों करोड रुपए अवैध शराब के कारोबारियों के पॉकेट में जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी के कानून धरातल में सफल नहीं हो सका है।शराब का होम डिलीवरी होना आरंभ हो गया है। युवा पीढ़ी भी इस धंधे में लग गई है। इसलिए अब शराबबंदी कानून की समीक्षा की आवश्यकता है।कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता के द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र के बाद अब केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के द्वारा कराए गए सर्वे के रिपोर्ट में शराबबंदी कानून पर फिर से बहस छेड़ दिया है।


