पटना में रसोई गैस संकट गहराया, लाखों उपभोक्ता प्रभावित, बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रहे सिलेंडर
- अस्पतालों और रसोई सेवाओं पर पड़ा असर, डीएम ने पर्याप्त आपूर्ति का दिया भरोसा, वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू
पटना। राजधानी पटना में रसोई गैस की किल्लत से आम जनजीवन प्रभावित होता नजर आ रहा है। गुरुवार से अब तक कुल 28,461 गैस सिलेंडरों का वितरण किया गया है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में उपभोक्ता अब भी प्रतीक्षा सूची में हैं। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, लगभग 1.52 लाख उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन्हें बुकिंग कराने के बावजूद अब तक गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो सका है। इससे शहर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। तेल कंपनियों के अनुसार, प्रतीक्षा सूची में इंडियन ऑयल निगम के 1,08,907, भारत पेट्रोलियम निगम के 31,848 और हिंदुस्तान पेट्रोलियम निगम के 11,531 उपभोक्ता शामिल हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बिगड़ गया है, जिसके कारण लोगों को समय पर गैस नहीं मिल पा रही है। हालांकि, जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस. एम. ने स्थिति को सामान्य बताते हुए कहा है कि जिले में द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस की पर्याप्त उपलब्धता है और चिंता की कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में 25 दिनों के भीतर और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिनों के भीतर गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ अलग नजर आ रही है। गैस की कमी का असर अब अस्पतालों और सार्वजनिक रसोई सेवाओं पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण हड्डी अस्पताल की कैंटीन में गैस की कमी के कारण सुबह का नाश्ता बंद कर दिया गया है। वहीं, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान परिसर स्थित धर्मशाला में सस्ते भोजन की व्यवस्था भी संकट में पड़ गई है, जहां मात्र 35 रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जाता था। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। यहां मरीजों के परिजन, जो छोटे गैस सिलेंडरों के माध्यम से भोजन बनाकर अपना गुजारा करते थे, अब वैकल्पिक उपाय अपनाने को मजबूर हैं। कई लोग अब सत्तू जैसे सस्ते और सरल विकल्पों के सहारे दिन गुजार रहे हैं। अस्पताल के मेस में भी गैस की कमी के कारण अब विद्युत आधारित चूल्हों और कोयले के चूल्हों का सहारा लिया जा रहा है। जीविका रसोई, जो प्रतिदिन लगभग 2000 मरीजों और उनके परिजनों के लिए भोजन तैयार करती है, वह भी इस संकट से अछूती नहीं है। प्रशासन ने इस स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए हैं, ताकि भोजन की आपूर्ति बाधित न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि गैस आपूर्ति की इस समस्या के पीछे वितरण प्रणाली में असंतुलन और बढ़ती मांग प्रमुख कारण हो सकते हैं। वहीं, उपभोक्ताओं का कहना है कि बुकिंग के बाद लंबे समय तक सिलेंडर नहीं मिलने से उनकी दैनिक दिनचर्या प्रभावित हो रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और अनावश्यक रूप से गैस का भंडारण न करें। साथ ही यह भी कहा गया है कि आपूर्ति व्यवस्था को जल्द ही पूरी तरह सामान्य कर लिया जाएगा। फिलहाल, पटना में रसोई गैस संकट ने आम लोगों से लेकर अस्पतालों तक को प्रभावित किया है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियां इस समस्या का समाधान कितनी शीघ्रता से कर पाती हैं और उपभोक्ताओं को राहत कब तक मिलती है।


