पटना में सरकारी बस से चार लाख की शराब बरामद, ड्राइवर और खलासी गिरफ्तार
पटना। राजधानी पटना में शराबबंदी कानून को चुनौती देने का एक और मामला सामने आया है, जहां सरकारी बस के जरिए विदेशी शराब की तस्करी की जा रही थी। बुधवार को दनियावां थाना क्षेत्र में पुलिस ने बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की एक बस से भारी मात्रा में शराब बरामद की। इस कार्रवाई में बस के ड्राइवर और खलासी को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, जब्त की गई शराब की अनुमानित कीमत करीब चार लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिली थी कि निगम की एक बस के जरिए रांची से मुजफ्फरपुर की ओर विदेशी शराब ले जाई जा रही है। इसके बाद दनियावां थाना की टीम ने इलाके में निगरानी बढ़ाई और होरिल बीघा गांव के पास चेकिंग अभियान शुरू किया। जैसे ही संदिग्ध बस वहां पहुंची, पुलिस ने उसे रोककर तलाशी ली। तलाशी के दौरान बस के भीतर छिपाकर रखी गई कुल 282 बोतल विदेशी शराब बरामद हुई, जिसके बाद ड्राइवर और खलासी को हिरासत में ले लिया गया। गिरफ्तार किए गए ड्राइवर की पहचान वैशाली जिले के रहने वाले धर्मजीत के रूप में हुई है, जबकि खलासी मोतिहारी निवासी मनोज कुमार बताया गया है। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे बिहार राज्य पथ परिवहन निगम में नियमित कर्मचारी हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपी सरकारी बस का इस्तेमाल इसलिए कर रहे थे, ताकि रास्ते में किसी को शक न हो और वे आसानी से शराब की खेप को गंतव्य तक पहुंचा सकें। दनियावां थाना प्रभारी ने बताया कि शराब को रांची से लोड किया गया था और उसे मुजफ्फरपुर पहुंचाया जाना था। पटना के रास्ते से गुजरते समय ही पुलिस को इसकी भनक लग गई। थाना प्रभारी के अनुसार, इस तरह सरकारी बस का दुरुपयोग कर शराब तस्करी करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी व्यवस्था की साख पर भी सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ शराबबंदी कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि आखिर शराब की सप्लाई किसके इशारे पर की जा रही थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस तस्करी में परिवहन निगम के अन्य कर्मचारी या बाहरी गिरोह भी जुड़े हुए हैं। बरामद शराब की ब्रांड और बैच नंबर के आधार पर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि इसे कहां से खरीदा गया और पहले भी इस तरह की खेप भेजी गई है या नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद तस्कर नए-नए तरीके अपनाकर शराब की सप्लाई कर रहे हैं। कभी निजी वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो कभी सरकारी संसाधनों को भी इसमें शामिल कर लिया जा रहा है। इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि तस्कर अब इतने बेखौफ हो चुके हैं कि सरकारी बसों का सहारा लेने से भी नहीं हिचक रहे। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, इस मामले की सूचना परिवहन विभाग को भी दी गई है, ताकि निगम स्तर पर विभागीय जांच शुरू की जा सके। संभावना जताई जा रही है कि दोषी पाए जाने पर दोनों कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन समेत सख्त विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। वहीं पुलिस यह भी खंगाल रही है कि क्या इससे पहले भी इन दोनों पर किसी तरह का संदेह या शिकायत दर्ज रही है। फिलहाल दनियावां थाना पुलिस दोनों आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है और बरामद मोबाइल फोन समेत अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस तस्करी से जुड़े पूरे गिरोह का खुलासा किया जाएगा। राजधानी पटना में हुई इस कार्रवाई को पुलिस शराबबंदी अभियान के तहत एक बड़ी सफलता मान रही है, लेकिन साथ ही यह घटना यह भी दिखाती है कि अवैध शराब कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए अभी और सख्त निगरानी तथा ठोस रणनीति की जरूरत है।


