औरंगाबाद में जमीनी विवाद ने लिया हिंसक रूप, दंपति और बच्चों समेत छह घायल
- मकान निर्माण को लेकर दो पक्षों में झड़प, लाठी-डंडा और धारदार हथियार से हमला
- सभी घायलों का सदर अस्पताल में इलाज जारी, पुलिस ने शुरू की जांच
औरंगाबाद। जिले के देव थाना क्षेत्र अंतर्गत बेढ़नी गांव में जमीनी विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़प में दंपति और बच्चों समेत छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे गांव में तनाव का माहौल बन गया है। सभी घायलों को इलाज के लिए औरंगाबाद सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां चिकित्सकों की देखरेख में उनका उपचार चल रहा है। घायलों की पहचान राजनाथ भगत, उनकी पत्नी कुसुम देवी तथा उनकी बेटियां अंकु कुमारी, वर्षा कुमारी, निक्कू कुमारी और सुहाना कुमारी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दूसरे पक्ष के कुछ लोगों को भी चोटें आई हैं, जिनका इलाज निजी क्लीनिक में कराया गया है। घटना के संबंध में घायल राजनाथ भगत ने बताया कि उनका अपने ही गांव के गोतिया अशोक भगत और गोपाल भगत से लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। उन्होंने बताया कि उनके भाई बैजनाथ भगत, जो पेशे से शिक्षक हैं, देव में रहते हैं और गांव स्थित पैतृक जमीन पर नया मकान निर्माण कराया जा रहा था। इसी जमीन पर दूसरे पक्ष के लोग भी अपना दावा कर रहे थे। राजनाथ भगत के अनुसार, अमीन द्वारा निर्धारित सीमांकन के आधार पर वे अपने हिस्से की जमीन पर निर्माण कार्य करा रहे थे। इसी दौरान आरोपी पक्ष के लोग वहां पहुंचे और काम को रुकवा दिया। इसको लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि प्रारंभिक विवाद के बाद मामला शांत हो गया था, लेकिन कुछ समय बाद आरोपी पक्ष के लोग दोबारा लाठी-डंडा और धारदार हथियार लेकर पहुंचे और अचानक हमला कर दिया। इस हमले में परिवार के सभी सदस्य घायल हो गए। घटना के दौरान बच्चों को भी नहीं बख्शा गया, जिससे घटना की गंभीरता और बढ़ गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मारपीट की घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग बचाव के लिए दौड़े। घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही आपातकालीन सहायता सेवा की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने में मदद की और मामले की जांच शुरू कर दी। देव थाना पुलिस ने बताया कि घटना को गंभीरता से लिया गया है और पीड़ित पक्ष से लिखित आवेदन प्राप्त हो गया है। मामले में शामिल आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जमीन से जुड़े विवाद अक्सर इस प्रकार की घटनाओं को जन्म देते हैं, इसलिए दोनों पक्षों को कानून के दायरे में रहकर अपने विवाद का समाधान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना एक बार फिर जमीनी विवादों के कारण बढ़ती हिंसा को उजागर करती है, जिससे न केवल परिवार प्रभावित होते हैं, बल्कि समाज में भी असुरक्षा का माहौल बनता है। प्रशासन का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने का प्रभावी उपाय हो सकती है।


