लैंड फॉर जॉब मामले में बढ़ी लालू यादव की मुश्किलें, सीबीआई ने 30 लोक सेवकों के खिलाफ दायर की चार्जशीट
पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के लिए लैंड फॉर जॉब घोटाला एक बार फिर मुश्किलें खड़ी करता नजर आ रहा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में मंगलवार को 30 लोक सेवकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। लालू प्रसाद यादव, जो पहले ही भ्रष्टाचार के अन्य मामलों में दोषी करार दिए जा चुके हैं, इस मामले में भी मुख्य आरोपी हैं। लैंड फॉर जॉब घोटाला उस समय का मामला है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में नौकरियां देने के बदले कुछ लोगों से जमीन और अन्य संपत्तियां ली गईं। यह घोटाला उस समय का है जब लालू यादव केंद्र में यूपीए सरकार का हिस्सा थे। सीबीआई के अनुसार, इस घोटाले में कई लोक सेवक और निजी व्यक्ति शामिल थे, जिन्होंने इस गुप्त लेन-देन को अंजाम दिया।
सीबीआई की जांच और चार्जशीट
सीबीआई ने इस मामले की जांच को काफी गहराई से अंजाम दिया। 30 लोक सेवकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के अलावा, एक और लोक सेवक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है। सीबीआई ने राऊज एवेन्यू कोर्ट से इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 15 दिनों का अतिरिक्त समय मांगा था। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया में तेजी लाए। सीबीआई ने पहले ही गृह मंत्रालय से इस मामले में अभियोजन की मंजूरी प्राप्त कर ली थी। गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद लालू यादव के खिलाफ मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो गया है।
लालू यादव के लिए बढ़ी मुश्किलें
लालू प्रसाद यादव पहले ही चारा घोटाले में दोषी करार दिए जा चुके हैं और उन्हें जेल भी हो चुकी है। लैंड फॉर जॉब घोटाले में अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद उनके लिए यह मामला और गंभीर हो गया है। सीबीआई की फाइनल चार्जशीट इस बात को स्पष्ट करती है कि इस मामले में लालू यादव का सीधा संबंध है।
राजनीतिक और कानूनी प्रभाव
लालू यादव और राजद के लिए यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। राजद पहले से ही नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार का हिस्सा है, और इस मामले में लालू यादव का नाम आने से पार्टी की साख पर असर पड़ सकता है। नीतीश कुमार की सरकार को भी इस मामले में विपक्ष के हमलों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि भाजपा पहले ही इस मुद्दे को लेकर आक्रामक हो चुकी है। बिहार में 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर, यह मामला विपक्ष के लिए एक बड़ा हथियार बन सकता है।
लालू यादव का पक्ष
राजद और लालू यादव का कहना है कि यह मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। लालू यादव और उनके समर्थक इसे सीबीआई और अन्य केंद्रीय एजेंसियों द्वारा विपक्षी नेताओं को बदनाम करने की साजिश बताते हैं। उन्होंने बार-बार कहा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से निराधार हैं और उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है।
सीबीआई की कार्रवाई पर सवाल
राजनीतिक गलियारों में सीबीआई की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियां सरकार के इशारे पर काम कर रही हैं और विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही हैं। हालांकि, सीबीआई ने इस मामले में अपनी जांच को निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित बताया है। लैंड फॉर जॉब घोटाले का मामला अब अदालत में है। अदालत में सीबीआई को यह साबित करना होगा कि लालू यादव और अन्य आरोपी इस घोटाले में सीधे तौर पर शामिल थे। दूसरी ओर, लालू यादव और उनके वकील इस मामले में अपना बचाव करेंगे और इसे राजनीति से प्रेरित बताएंगे। लैंड फॉर जॉब घोटाला लालू यादव और राजद के लिए एक बड़ी चुनौती है। यह मामला न केवल उनके कानूनी भविष्य को प्रभावित कर सकता है, बल्कि बिहार की राजनीति पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है। सीबीआई की चार्जशीट और अभियोजन की मंजूरी के बाद लालू यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं, लेकिन इस मामले का अंतिम निर्णय अदालत में होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में बढ़ता है और इसका बिहार की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।


