January 16, 2026

पटना से नौकरी लगने वाले सेटर का अपहरण, एसटीएफ ने नालंदा से किया बरामद, महिला समेत 6 गिरफ्तार

पटना। राजधानी पटना में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे एक कथित ठगी के नेटवर्क से जुड़ा मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब एक युवक का अपहरण कर लिया गया। यह घटना 5 जनवरी को पटना के कोतवाली थाना क्षेत्र में इस्कॉन मंदिर के पास हुई, जिसने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया। अपहरण का शिकार बने युवक संतोष को बाद में पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में नालंदा जिले के इस्लामपुर से सुरक्षित बरामद कर लिया गया। इस मामले में एक महिला समेत कुल छह लोगों की गिरफ्तारी की गई है।
अपहरण की साजिश कैसे रची गई
पुलिस जांच में सामने आया है कि संतोष को पैसे के लेन-देन के बहाने बुलाया गया था। संतोष के अनुसार, अनुज, निशांत और विनोद नामक लोगों ने उसे इस्कॉन मंदिर के पास बुलाया। वहां से उसे बाइक पर बैठाकर पहले रामकृष्णा नगर ले जाया गया। इसके बाद एक कार बुक कर उसे बिहारशरीफ ले जाया गया, जहां उसके साथ कथित तौर पर मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की गई। बाद में उसे नालंदा जिले के इस्लामपुर इलाके में एक घर में बंधक बनाकर रखा गया।
पीड़ित कौन है और क्या करता है
संतोष पटना के नागेश्वर कॉलोनी स्थित अभिराम होटल में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करता है। पुलिस के अनुसार, वह नौकरी दिलाने वाले एक कथित नेटवर्क से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। आरोपियों का कहना है कि संतोष और होटल मालिक ने मिलकर कई लोगों से सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर मोटी रकम वसूली थी। यही रकम वापस लेने के लिए उन्होंने संतोष का अपहरण किया।
आरोपियों का दावा और ठगी की कहानी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उनसे और अन्य अभ्यर्थियों से सचिवालय में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब एक करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की गई थी। इसमें लगभग 67 लाख रुपये नकद और बाकी रकम बैंक खाते के जरिए ट्रांसफर की गई थी। अनुज नामक आरोपी के अनुसार, संतोष ने उनकी मुलाकात राकेश कुमार रंजन नाम के व्यक्ति से कराई थी, जिसने समाज कल्याण विभाग में सचिवालय सहायक पद पर नौकरी पक्की होने का भरोसा दिया था।
ट्रेनिंग और सैलरी का झांसा
आरोपियों का कहना है कि नौकरी के नाम पर उन्हें चार महीने की ट्रेनिंग भी दी गई थी। शुरुआती एक महीने की सैलरी भी दी गई, जिससे उन्हें विश्वास हो गया कि नौकरी सच में लग गई है। लेकिन इसके बाद अचानक सैलरी बंद हो गई और संबंधित लोग बातचीत से भी कतराने लगे। जब उन्होंने गहराई से जांच की तो उन्हें समझ में आया कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं।
पैसे वापस लेने की कोशिश बनी अपराध
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि जब उन्हें ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने अपने पैसे वापस लेने के लिए संतोष को दबाव में लेने का फैसला किया। इसी के तहत उन्होंने संतोष को बुलाकर अपने कब्जे में रखा। हालांकि पुलिस के अनुसार, चाहे कारण कुछ भी रहा हो, किसी व्यक्ति का अपहरण करना गंभीर अपराध है और इसे किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता।
एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना पुलिस के साथ बिहार एसटीएफ को भी जांच में लगाया गया। तकनीकी सर्विलांस और खुफिया सूचना के आधार पर पुलिस को पता चला कि संतोष को नालंदा जिले के इस्लामपुर में रखा गया है। इसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस और एसटीएफ की टीम ने छापेमारी कर संतोष को सुरक्षित बरामद कर लिया और मौके से एक महिला समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
पुलिस ने इस मामले में अपहरण, अवैध हिरासत और ठगी से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। राकेश कुमार रंजन सहित अन्य संदिग्धों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। बैंक लेन-देन, कॉल डिटेल और डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
समाज के लिए चेतावनी
यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह किस तरह लोगों की मजबूरी और सपनों का फायदा उठाते हैं। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी नौकरी के लिए पैसे देने से पहले पूरी जानकारी और आधिकारिक प्रक्रिया की जांच जरूर करें। इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कानून अपने हाथ में लेना किसी भी हाल में समाधान नहीं हो सकता।पटना से शुरू हुआ यह मामला नालंदा तक पहुंचा और इसमें ठगी, अपहरण और अवैध लेन-देन की परतें सामने आईं। संतोष की सुरक्षित बरामदगी भले ही राहत की बात हो, लेकिन यह प्रकरण नौकरी के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े और उससे उपजने वाले अपराधों की गंभीर तस्वीर पेश करता है। पुलिस का दावा है कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

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