आज से शुरू हुआ खरमास, एक महीने तक विवाह सहित मांगलिक कार्यों पर रहेगी रोक
- सूर्य के मीन राशि में प्रवेश के साथ आरंभ हुआ अशुभ मास, 14 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश के बाद होगा समापन
- खरमास में भगवान विष्णु की पूजा और पितृ कर्म का विशेष महत्व, विवाह के लिए बाद में मिलेंगे शुभ मुहूर्त
पटना। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार से खरमास की शुरुआत हो गई है, जिसके कारण आने वाले एक महीने तक विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार चैत्र कृष्ण एकादशी के दिन सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने के साथ ही खरमास यानी अशुद्ध मास का आरंभ हो गया है। यह अवधि 14 अप्रैल तक चलेगी, जिसके बाद सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने पर खरमास समाप्त हो जाएगा और पुनः शुभ कार्य शुरू किए जा सकेंगे। पंचांग के अनुसार सूर्य शनिवार देर रात लगभग 3 बजकर 7 मिनट पर कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को ही खरमास का प्रारंभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य गुरु ग्रह की राशि में प्रवेश करते हैं, तब उस अवधि को खरमास कहा जाता है और इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन जैसे शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास का समय भले ही मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता हो, लेकिन यह भगवान विष्णु की आराधना और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवधि में विधिपूर्वक पूजा-पाठ, दान और धार्मिक अनुष्ठान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से पितरों के निमित्त पिंडदान और तर्पण का भी इस समय विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार विवाह संस्कार के लिए गुरु, शुक्र और सूर्य का शुभ होना आवश्यक माना जाता है। जब सूर्य मीन राशि में रहते हैं तो यह स्थिति विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती। इसी कारण 14 मार्च से 14 अप्रैल तक विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं किया जाएगा। पंचांगों के अनुसार 14 अप्रैल को वैशाख कृष्ण द्वादशी के दिन दोपहर लगभग 11 बजकर 25 मिनट पर सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा और उसके बाद पुनः मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त उपलब्ध होने लगेंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार खरमास समाप्त होने के बाद विवाह के लिए सीमित समय तक शुभ अवसर मिलेंगे। बनारसी पंचांग के अनुसार लगभग 38 दिनों तक विवाह के लिए शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे, जबकि मिथिला पंचांग के अनुसार लगभग 21 दिनों तक ही विवाह के लिए अनुकूल समय रहेगा। इसके बाद चातुर्मास की शुरुआत होने से चार महीने तक विवाह समारोहों पर पुनः विराम लग जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह के शुभ लग्न निर्धारण में वृष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु और मीन लग्न को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके साथ ही अश्विनी, रेवती, रोहिणी, मृगशिरा, मूल, मघा, चित्रा, स्वाति, श्रवणा, हस्त, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुन, उत्तरा भाद्र और उत्तरा आषाढ़ नक्षत्रों में विवाह के लिए शुभ योग बनता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि रोहिणी, मृगशिरा या हस्त नक्षत्र में विवाह का मुहूर्त बनता है तो उसे अत्यंत उत्तम माना जाता है। इसके अलावा माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ और अगहन मास में विवाह होना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के कारण खरमास की अवधि में लोग मांगलिक कार्यों से परहेज करते हैं और इस समय को पूजा, भक्ति, दान और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए समर्पित करते हैं। ऐसे में अगले एक महीने तक विवाह और अन्य शुभ समारोहों की गतिविधियों में विराम देखने को मिलेगा।


