विशेष भूमि सर्वेक्षण से पहले जमीन की जमाबंदी को आधार और मोबाइल से जोड़ना अनिवार्य, निर्देश जारी
पटना। बिहार सरकार ने विशेष भूमि सर्वेक्षण के पहले जमीन की जमाबंदी को आधार और मोबाइल नंबर से जोड़ना अनिवार्य कर दिया है। इस नए निर्देश के तहत राज्य के प्रत्येक जमीन मालिक को अपने जमीन के दस्तावेज़ों को आधार और मोबाइल नंबर के साथ अपडेट करना होगा। यह कदम भूमि संबंधी रिकॉर्ड को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का मानना है कि आधार और मोबाइल नंबर से जमाबंदी को लिंक करने से भूमि संबंधी विवादों को सुलझाने में आसानी होगी। इसके अलावा, इससे जमीन की सही पहचान सुनिश्चित होगी और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को रोका जा सकेगा। भूमि मालिक अपने मोबाइल नंबर से सीधे अपने जमीन से जुड़े किसी भी सूचना या नोटिस को प्राप्त कर सकेंगे, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी विवाद के निपटारे में आसानी होगी। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो अंचल कार्यालय की ओर से जमाबंदी बंद कर दी जाएगी, और जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी. जमीन की जमाबंदी को आधार से जोड़ने एक बड़ा लाभ यह है कि जमीन की जमाबंदी को आधार से जोड़ने से जमीन मालिक की पहचान पुख्ता हो जाएगी. जिससे ज़मीन संबंधी धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और विवादों में कमी आएगी. इसके अलावा, ज़मीन की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित हो जाएगी. अगर जमाबंदी रैयत की मृत्यु हो चुकी है तो ऐसे में उनके वारिसों को परेशान होने की जरूरत नहीं है. जमाबंदी रैयत के वारिस अपना आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और वंशावली के साथ अपने नाम से भी जमाबंदी को आधार से लिंक कर सकते हैं. राज्य सरकार ने इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए विभिन्न उपाय किए हैं। भूमि मालिकों को अपने नजदीकी भू-अभिलेख कार्यालय में जाकर अपने आधार और मोबाइल नंबर को जमीन की जमाबंदी के साथ लिंक करना होगा। इसके लिए सरकार ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध कराए हैं। जिन लोगों के पास इंटरनेट की सुविधा है, वे सरकारी पोर्टल पर जाकर खुद ही अपने जमीन के रिकॉर्ड को आधार और मोबाइल से जोड़ सकते हैं। वहीं, जिनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है, वे भू-अभिलेख कार्यालय जाकर यह काम करवा सकते हैं। इस प्रक्रिया के बाद, सरकार विशेष भूमि सर्वेक्षण को और भी प्रभावी बनाने की योजना बना रही है। सर्वेक्षण के दौरान जमीन की माप और अन्य विवरणों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से दर्ज किया जाएगा। यह सर्वेक्षण भूमि विवादों को सुलझाने और सरकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अहम होगा। सरकार ने सभी जमीन मालिकों से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करें। जिन लोगों ने अभी तक अपने जमीन की जमाबंदी को आधार और मोबाइल से लिंक नहीं किया है, उन्हें जल्दी से जल्दी यह कार्य पूरा करने की सलाह दी गई है। इसके लिए राज्य सरकार ने एक निश्चित समय सीमा भी निर्धारित की है, जिसके बाद आधार और मोबाइल से लिंक न होने वाली जमीनों की जमाबंदी को अवैध घोषित किया जा सकता है। हालांकि सरकार की यह पहल सराहनीय है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियाँ भी आ सकती हैं। राज्य के कई ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा सीमित है, जिससे ऑनलाइन लिंकिंग की प्रक्रिया में दिक्कतें आ सकती हैं। इसके अलावा, कुछ लोगों के पास आधार कार्ड या मोबाइल नंबर न होने की स्थिति में भी समस्या उत्पन्न हो सकती है। बिहार सरकार का यह कदम भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता और सटीकता लाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। आधार और मोबाइल नंबर के साथ जमाबंदी को लिंक करना, भूमि संबंधी विवादों को कम करने और भूमि रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय बनाने में मदद करेगा। सभी जमीन मालिकों को इस प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है ताकि राज्य में भूमि रिकॉर्ड को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जा सके।


