ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर, 45 दिन के युद्धविराम पर टिकी दुनिया की नजर

  • अगले 48 घंटे निर्णायक, समझौता न हुआ तो बड़े हमलों की आशंका
  • होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु कार्यक्रम पर मतभेद बने सबसे बड़ी बाधा

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित 45 दिन के युद्धविराम को लेकर बातचीत अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, यह समझौता दो चरणों में लागू किया जाना प्रस्तावित है, जिसमें पहले चरण में अस्थायी युद्धविराम और दूसरे चरण में स्थायी शांति समझौते पर चर्चा शामिल है। हालांकि, यदि यह प्रयास विफल होता है तो बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस वार्ता में पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। मध्यस्थ देशों का कहना है कि अगले 48 घंटे इस समझौते के लिए बेहद अहम हैं। यदि इस अवधि में सहमति नहीं बनती है, तो अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के ऊर्जा और बुनियादी ढांचे से जुड़े ठिकानों पर हमले किए जा सकते हैं। तनाव का सबसे बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान का परमाणु कार्यक्रम बना हुआ है। ईरान इस जलमार्ग को लेकर किसी भी तरह की रियायत देने के पक्ष में नहीं दिख रहा है। उसने चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला हुआ तो वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर सकता है। ईरानी नेतृत्व के अनुसार, केवल होर्मुज ही नहीं बल्कि बाब-अल-मंदेब जैसे अन्य महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते भी निशाने पर आ सकते हैं। इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला गया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमले की धमकी भी दी। ट्रम्प के इस बयान ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ईरान और इजराइल के बीच प्रत्यक्ष हमले तेज हो गए। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने इजराइल के उत्तरी शहर हाइफा पर मिसाइल हमला किया, जिससे कई इमारतों और सड़कों को नुकसान पहुंचा। वहीं, इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई इलाकों में सैन्य कार्रवाई की। इन हमलों में नागरिक क्षेत्रों को भी नुकसान पहुंचा है और कई लोगों की मौत तथा घायल होने की खबर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देशों चीन और रूस ने इस मुद्दे पर बातचीत की है और तत्काल युद्धविराम की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही इस संकट का समाधान संभव है। इस तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है। एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला है, जहां कुछ बाजारों में बढ़त रही तो कुछ में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। इसी बीच, ईरान ने अपने परमाणु प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे मानवता तथा विज्ञान के खिलाफ अपराध बताया है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, हालिया हमलों के बाद कुछ परमाणु संयंत्रों का संचालन प्रभावित हुआ है।  मध्य पूर्व में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। प्रस्तावित 45 दिन का युद्धविराम इस संकट को टालने का एकमात्र अवसर माना जा रहा है। यदि यह प्रयास विफल होता है, तो क्षेत्र में व्यापक युद्ध छिड़ने की आशंका है, जिसका असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

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