आज से शुरू हुई इंटर की परीक्षाएं: पटना में उतरवाया गया हिजाब, लेट आने पर नहीं मिली एंट्री
पटना। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से इंटरमीडिएट की वार्षिक परीक्षा आज यानी 2 फरवरी से शुरू हो गई। यह परीक्षा 13 फरवरी तक चलेगी। परीक्षा के पहले ही दिन राज्यभर में सख्ती, अव्यवस्था और भावुक दृश्य एक साथ देखने को मिले। सुबह नौ बजे सभी परीक्षा केंद्रों के मुख्य द्वार बंद कर दिए गए, जिसके बाद कई परीक्षार्थी बाहर ही रह गए। कहीं छात्र गेट फांदकर अंदर घुसते नजर आए तो कहीं छात्राएं देरी के कारण फूट-फूट कर रोती दिखीं। परीक्षा को नकलमुक्त और अनुशासित बनाने के लिए बोर्ड ने इस बार बेहद कड़े इंतजाम किए हैं।
परीक्षा केंद्रों पर सख्ती
राज्य के 1,762 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में इंटरमीडिएट की परीक्षा कराई जा रही है। पहले दिन पहली पाली में जीवविज्ञान और दूसरी पाली में अर्थशास्त्र की परीक्षा आयोजित की गई। बोर्ड के निर्देश के अनुसार सुबह नौ बजे के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाना था। इसी नियम के चलते कई जिलों में छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा। नालंदा में कुछ छात्र परीक्षा केंद्र का गेट फांदकर अंदर घुसते दिखाई दिए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।
लेट पहुंचने पर छलके आंसू
बेगूसराय, पटना, भागलपुर और अन्य जिलों में लेट पहुंचने वाले परीक्षार्थियों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। बेगूसराय के एसके महिला कॉलेज परीक्षा केंद्र पर चार छात्राएं जाम में फंसने के कारण दो मिनट देरी से पहुंचीं। पहले तो उन्हें प्रवेश नहीं मिला और वे रोने लगीं। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उन्हें अंदर जाने की अनुमति दी गई। पटना के बांकीपुर गर्ल्स हाई स्कूल, गांधी मैदान स्थित केंद्र पर एक छात्रा के लेट होने पर उसकी मां गेट के बाहर हाथ जोड़कर गार्ड से विनती करती नजर आई, लेकिन नियम के कारण प्रवेश नहीं मिल सका।
जूते, बेल्ट और हिजाब पर सख्त जांच
परीक्षा के दौरान नकल रोकने के लिए बोर्ड ने इस बार सुरक्षा जांच को और सख्त कर दिया है। गोपालगंज, पटना समेत कई जिलों के परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों के जूते उतरवा दिए गए। ठंड के मौसम में छात्रों को नंगे पांव परीक्षा देनी पड़ी। जमुई में छात्रों की बेल्ट तक उतरवाई गई। पटना के शास्त्रीनगर स्थित कन्या मध्य विद्यालय में प्रवेश से पहले मुस्लिम छात्राओं का हिजाब हटवाया गया, जिसे लेकर अभिभावकों में नाराजगी भी देखने को मिली।
मॉडल परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था
इस बार बोर्ड ने छात्राओं के लिए विशेष मॉडल परीक्षा केंद्र भी बनाए हैं। इन केंद्रों को गुब्बारों और फूलों से सजाया गया है। यहां केवल छात्राएं ही परीक्षा दे रही हैं। प्रवेश के समय छात्राओं के माथे पर टीका लगाकर उनका स्वागत किया गया। बोर्ड का कहना है कि इससे छात्राओं को मानसिक रूप से सकारात्मक माहौल मिलेगा और वे बिना तनाव के परीक्षा दे सकेंगी।
परीक्षा में शामिल हुए 13 लाख से अधिक परीक्षार्थी
बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा में इस वर्ष कुल 13,17,846 परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं। इनमें 6,75,844 छात्राएं और 6,42,002 छात्र हैं। परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जा रही है। पहली पाली सुबह और दूसरी पाली दोपहर बाद शुरू हो रही है। परीक्षा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
प्रवेश से पहले कड़ी जांच
परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले कई स्तरों पर जांच से गुजरना पड़ा। प्रवेश पत्र और आधार कार्ड की जांच के बाद ही अंदर जाने की अनुमति दी गई। पेंसिल बॉक्स या पाउच ले जाने पर रोक लगाई गई है। परीक्षार्थियों को केवल हाथ में कलम, पेंसिल और जरूरी कागजात ले जाने की अनुमति मिली। परीक्षा कक्ष में मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। न तो परीक्षार्थी और न ही निरीक्षक मोबाइल लेकर जा सकते हैं। केवल केंद्राधीक्षक को विशेष परिस्थितियों में मोबाइल रखने की अनुमति है।
प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका की नई व्यवस्था
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने इस बार प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका में भी नई व्यवस्था लागू की है। प्रत्येक विषय में 50 प्रतिशत प्रश्न वस्तुनिष्ठ यानी बहुविकल्पीय होंगे। वर्णनात्मक प्रश्नों में भी विकल्प दिए गए हैं। उत्तर पुस्तिका और उत्तर अंकन पत्रक पर बारकोड अंकित रहेगा, जिससे जांच के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम हो जाएगी। परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र और उत्तर पत्रक समझने के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय भी दिया गया है। इस दौरान केवल प्रश्न पढ़ने की अनुमति होगी, उत्तर लिखना मना रहेगा।
हंगामा और विवाद की घटनाएं
नालंदा के एसएस बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में देर से पहुंचने के बावजूद एक निरीक्षक और एक लिपिक को प्रवेश दे दिया गया। इसे देखकर एक छात्रा के साथ आए लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। मामला इतना बढ़ गया कि मारपीट की नौबत आ गई। वहीं भागलपुर के मारवाड़ी पाठशाला स्थित परीक्षा केंद्र पर एक छात्रा अपने बच्चे को गोद में लेकर परीक्षा देने पहुंची, लेकिन लेट होने के कारण उसे प्रवेश नहीं मिल सका।
बोर्ड की सख्त चेतावनी
बिहार बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि जबरन परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने या हंगामा करने वालों पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने के लिए सख्ती जरूरी है। पहले दिन की घटनाओं के बावजूद बोर्ड का दावा है कि परीक्षा कुल मिलाकर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई है। आने वाले दिनों में भी नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा, ताकि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके।


