January 5, 2026

सरकारी शिक्षकों के लिए कई निर्देश जारी: विद्यालय में औपचारिक परिधान अनिवार्य, उल्लंघन पर कार्रवाई

पटना। राज्य के सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक माहौल को अनुशासित, गरिमामय और परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का मकसद विद्यालयों में कार्यसंस्कृति को मजबूत करना, पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आदेशों का पालन सभी स्तरों पर अनिवार्य होगा और उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की जाएगी।
विद्यालय में औपचारिक परिधान की अनिवार्यता
शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के पहनावे को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब किसी भी सरकारी विद्यालय या कार्यालय में शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मी जींस और टी-शर्ट पहनकर नहीं आएंगे। विद्यालय अवधि के दौरान सभी को गरिमायुक्त औपचारिक परिधान पहनना अनिवार्य किया गया है। विभाग का मानना है कि शिक्षक समाज के लिए आदर्श होते हैं और उनका पहनावा भी उसी अनुरूप होना चाहिए, ताकि बच्चों में अनुशासन और सम्मान की भावना विकसित हो सके।
विद्यालय अवधि में बाहर जाने पर रोक
नए निर्देशों के अनुसार, विद्यालय या कार्यालय अवधि के दौरान शिक्षकों को बैंक से वेतन निकालने या किसी अन्य निजी कार्य के लिए बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। विभाग का कहना है कि इससे पढ़ाई और विद्यालय संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विद्यालय समय पूरी तरह शैक्षणिक गतिविधियों के लिए समर्पित होना चाहिए, ताकि बच्चों को पूरा समय और ध्यान मिल सके।
पाठ-टीका और प्रभावी कक्षा संचालन
अब विद्यालयों में केवल औपचारिकता के लिए कक्षाएं नहीं लगेंगी। सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को नियमित रूप से पाठ-टीका तैयार करना होगा और उसी के आधार पर कक्षा का संचालन करना अनिवार्य होगा। प्रत्येक शनिवार को प्रधानाध्यापक शिक्षकों की पाठ-टीका की जांच करेंगे और उस पर प्रतिहस्ताक्षर करेंगे। निरीक्षण के दौरान यदि किसी अधिकारी द्वारा पाठ-टीका मांगी जाती है, तो उसे तुरंत दिखाना होगा। इसे घर पर भूल जाने या अन्य किसी बहाने को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ई-शिक्षा कोष पोर्टल से उपस्थिति
शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। अब उपस्थिति ई-शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से ही दर्ज होगी। विभाग ने सख्त चेतावनी दी है कि फोटो या किसी अन्य तकनीक के जरिए छद्म या फर्जी उपस्थिति दर्ज करने पर संबंधित शिक्षक के साथ-साथ प्रधानाध्यापक को भी समान रूप से दोषी माना जाएगा। उपस्थिति दर्ज करने की जिम्मेदारी वर्ग शिक्षक की होगी और पहली घंटी में ही बच्चों की उपस्थिति भी अचूक रूप से बनानी होगी।
मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा
बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने मध्याह्न भोजन को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। विद्यालय में बनने वाले भोजन को परोसने से पहले प्रधानाध्यापक और किसी एक शिक्षक द्वारा चखना अनिवार्य होगा। इससे भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित की जा सकेगी। विभाग का उद्देश्य है कि किसी भी तरह की लापरवाही से बच्चों के स्वास्थ्य पर असर न पड़े।
अवकाश व्यवस्था में संतुलन
अवकाश को लेकर शिक्षा विभाग ने अपेक्षाकृत लचीला रुख अपनाया है। प्रधानाध्यापक शिक्षकों की जायज छुट्टियों को स्वीकृत करने में अनावश्यक परहेज नहीं करेंगे। हालांकि यह शर्त रखी गई है कि एक समय में विद्यालय के कुल शिक्षकों के 10 प्रतिशत से अधिक लोग छुट्टी पर नहीं होंगे। इससे विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियां बाधित नहीं होंगी और शिक्षकों की व्यक्तिगत जरूरतों का भी ध्यान रखा जा सकेगा।
शिकायतों और समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया
शिक्षकों को अपनी समस्याओं या शिकायतों के लिए सीधे जिला कार्यालय जाने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें अपना आवेदन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को देना होगा, जो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका समाधान करेंगे। विभाग का मानना है कि इससे अनावश्यक भागदौड़ कम होगी और समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही तेजी से हो सकेगा।
समय पर वेतन भुगतान की व्यवस्था
शिक्षकों को समय पर वेतन मिल सके, इसके लिए प्रत्येक माह की 25 तारीख तक सभी कर्मियों की उपस्थिति विवरणी जिला कार्यालय को भेजना अनिवार्य कर दिया गया है। इसमें किसी भी प्रकार की देरी या अधूरी जानकारी के लिए प्रधानाध्यापक को जिम्मेदार माना जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वेतन संबंधी प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाएगी।
शैक्षणिक मूल्यांकन को मिलेगा जोर
विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर को बेहतर ढंग से परखने के लिए अब हर विद्यालय में साप्ताहिक और मासिक जांच परीक्षाएं आयोजित करना अनिवार्य कर दिया गया है। इन परीक्षाओं के माध्यम से बच्चों की प्रगति का नियमित आकलन किया जाएगा और कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा
शिक्षा विभाग के ये निर्देश स्पष्ट रूप से यह संकेत देते हैं कि सरकार विद्यालयों में अनुशासन, जवाबदेही और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देना चाहती है। औपचारिक परिधान से लेकर डिजिटल उपस्थिति, पाठ-टीका, मध्याह्न भोजन और नियमित मूल्यांकन तक, सभी कदम विद्यालयी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए हैं। यदि इन निर्देशों का सही ढंग से पालन होता है, तो सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और भरोसे में निश्चित रूप से सुधार देखने को मिल सकता है।

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