विधानसभा की प्रक्रिया में बड़े बदलाव, ऑनलाइन शून्यकाल की सूचना भेजेंगे विधायक, 23 से लागू होगी नई व्यवस्था
पटना। बिहार विधानसभा की कार्यवाही को अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब विधायकों को शून्यकाल के लिए सूचना देने हेतु सुबह-सुबह विधानसभा परिसर पहुंचने की बाध्यता नहीं होगी। वे अपने घर या कार्यालय से ही डिजिटल माध्यम के जरिए सूचना भेज सकेंगे। यह नई व्यवस्था 23 फरवरी से लागू की जाएगी। इस निर्णय को विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में अंतिम रूप दिया गया।
नई व्यवस्था का उद्देश्य
अब तक शून्यकाल में मुद्दा उठाने के लिए विधायकों को निर्धारित समय के भीतर सचिव कक्ष में पहुंचकर अपनी सूचना जमा करनी पड़ती थी। यह प्रक्रिया ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर संचालित होती थी। पहले इसकी समय-सीमा सुबह 9 बजे तक थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 10 बजे कर दिया गया था। इसके बावजूद कई विधायकों को समय पर पहुंचने में कठिनाई होती थी। लंबे समय से इस प्रक्रिया में बदलाव की मांग की जा रही थी। नई व्यवस्था इसी मांग का परिणाम है, जिसका उद्देश्य कार्यप्रणाली को सरल और तकनीक आधारित बनाना है।
कैसे काम करेगी नई प्रक्रिया
नई प्रणाली के तहत विधायक सुबह 9 बजे से 10 बजे के बीच अपने मुद्दों को अधिकतम 50 शब्दों में यूनिकोड लिपि में लिखकर नेवा पोर्टल पर अपलोड करेंगे। यह पोर्टल राष्ट्रीय ई-विधान अनुप्रयोग के तहत संचालित किया जाता है, जिसका मकसद विधानमंडलों की कार्यवाही को डिजिटल बनाना है। पोर्टल पर एक विशेष ‘भेजें’ बटन सक्रिय रहेगा, जिसके माध्यम से सूचना सीधे ऑनलाइन नोटिस के रूप में विधानसभा पोर्टल पर प्रदर्शित होगी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष की स्वीकृति मिलने पर ही संबंधित सूचना को सदन में पढ़ा जाएगा। इस प्रकार, अंतिम निर्णय अध्यक्ष के विवेकाधिकार में ही रहेगा, लेकिन सूचना भेजने की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से होगी।
हाजिरी की प्रक्रिया में भी बदलाव
सिर्फ शून्यकाल की सूचना ही नहीं, बल्कि विधायकों की उपस्थिति दर्ज कराने की प्रक्रिया में भी परिवर्तन किया गया है। अब विधायकों को सदन में उपस्थित होने की जानकारी सुबह 10 बजे तक देनी होगी, लेकिन इसके लिए उन्हें शारीरिक रूप से सदन में उपस्थित होना आवश्यक नहीं होगा। वे ऑनलाइन माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और अनावश्यक भागदौड़ से भी राहत मिलेगी।
प्रशिक्षण सत्र का आयोजन
नई डिजिटल व्यवस्था को सुचारु रूप से लागू करने के लिए 19 से 21 फरवरी तक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में विधायकों को पोर्टल के उपयोग, सूचना अपलोड करने की विधि और अन्य तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। विधानसभा सचिवालय का मानना है कि प्रशिक्षण के बाद सभी सदस्य इस नई प्रणाली का सहजता से उपयोग कर सकेंगे।
शून्यकाल का महत्व
शून्यकाल विधानसभा की कार्यवाही का वह महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जिसमें विधायक लोक महत्व के तात्कालिक और संवेदनशील मुद्दों को सदन के समक्ष रखते हैं। इन मुद्दों पर सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करे। कई बार शून्यकाल के माध्यम से ऐसे विषय सामने आते हैं, जो जनता की तत्काल चिंता से जुड़े होते हैं और जिन पर त्वरित ध्यान देना आवश्यक होता है।
अब तक की व्यवस्था में सीमाएं
पुरानी प्रणाली में समय और स्थान की बाध्यता के कारण कई विधायकों को असुविधा होती थी। ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की प्रक्रिया के कारण कभी-कभी महत्वपूर्ण विषय भी सूची में शामिल नहीं हो पाते थे। साथ ही, सचिव कक्ष के बाहर भीड़ लगने की स्थिति बन जाती थी। डिजिटल माध्यम से यह प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी होने की संभावना है।
पारदर्शिता और सुगमता की उम्मीद
नई ऑनलाइन व्यवस्था से यह उम्मीद की जा रही है कि पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध होगी। सूचना सीधे पोर्टल पर दर्ज होने से किसी प्रकार की मानवीय त्रुटि या पक्षपात की आशंका कम होगी। साथ ही, सभी सूचनाओं का डिजिटल अभिलेख भी सुरक्षित रहेगा, जिससे भविष्य में संदर्भ लेना आसान होगा।
तकनीक की ओर बढ़ता कदम
बिहार विधानसभा का यह निर्णय विधायी कार्यवाही को तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। राष्ट्रीय ई-विधान अनुप्रयोग के तहत पहले भी कई प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाया गया है। अब शून्यकाल की सूचना और उपस्थिति दर्ज कराने की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने से कार्यप्रणाली में आधुनिकता और दक्षता आएगी। 23 फरवरी से जब यह नई व्यवस्था प्रभावी होगी, तब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इसका व्यवहारिक असर कितना सकारात्मक रहता है। फिलहाल, विधानसभा सचिवालय और अध्यक्ष की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि इस बदलाव से न केवल विधायकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि सदन की कार्यवाही भी अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनेगी।


