January 27, 2026

भारत और यूरोपीय यूनियन में 18 सालों बाद अबतक की सबसे बड़ी ट्रेड डील, कम होंगे टैरिफ, मोदी ने बताया ऐतिहासिक

नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। करीब 18 वर्षों तक चली बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता के समापन की घोषणा करने वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि साझा समृद्धि और भविष्य की साझेदारी का एक नया खाका है।
समझौते के साथ सुरक्षा और आवागमन पर भी सहमति
मुक्त व्यापार समझौते के साथ-साथ भारत और यूरोपीय संघ ने सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा लोगों के आवागमन को आसान बनाने के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करने से जुड़े समझौते पर भी सहमति बनी है। इसका उद्देश्य व्यापार के साथ-साथ रणनीतिक सहयोग, निवेश और लोगों के आपसी संपर्क को और मजबूत करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के बीच हुआ यह समझौता अपने आप में ऐतिहासिक है। यह सिर्फ वस्तुओं के आयात-निर्यात का करार नहीं, बल्कि दोनों क्षेत्रों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी की नींव है।
भारत–यूरोपीय संघ संबंधों में नई ऊंचाई
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। साझा लोकतांत्रिक मूल्य, आर्थिक तालमेल और लोगों के बीच मजबूत रिश्तों के चलते यह साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंच रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत और यूरोपीय संघ के बीच करीब 180 अरब यूरो का द्विपक्षीय व्यापार है। इसके अलावा 8 लाख से अधिक भारतीय यूरोपीय संघ के विभिन्न देशों में रह रहे हैं और वहां की अर्थव्यवस्था व समाज में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
टैरिफ में बड़ी कटौती से बाजार होंगे सस्ते
इस मुक्त व्यापार समझौते का सबसे बड़ा असर आयात शुल्क यानी टैरिफ में कटौती के रूप में देखने को मिलेगा। समझौते के लागू होने के बाद भारत में यूरोप से आने वाली कई महंगी वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं। जानकारी के अनुसार यूरोपीय कारों पर लगने वाला आयात शुल्क, जो अभी लगभग 110 प्रतिशत है, उसे घटाकर करीब 10 प्रतिशत किया जाएगा। इससे बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज जैसी यूरोपीय कारें भारतीय बाजार में अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती हैं। इसी तरह यूरोप से आने वाली शराब और वाइन पर भी शुल्क में बड़ी कटौती की संभावना है। अभी यूरोपीय देशों की शराब पर लगभग 150 प्रतिशत टैरिफ लगता है, जिसे घटाकर 20 से 30 प्रतिशत के दायरे में लाया जा सकता है। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने के साथ-साथ आयात बढ़ने की उम्मीद है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका
भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाते हैं। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि यूरोपीय संघ दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता है। दोनों मिलकर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 25 प्रतिशत और दुनिया के कुल व्यापार का करीब एक-तिहाई हिस्सा रखते हैं। ऐसे में यह मुक्त व्यापार समझौता न केवल दोनों पक्षों के लिए, बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए भी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।
नया वैश्विक संदर्भ और सुधार की जरूरत
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में वैश्विक व्यवस्था में चल रही उथल-पुथल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में कई चुनौतियां सामने हैं और ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ मिलकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुधार की इस जरूरत को आगे बढ़ाएंगे। प्रधानमंत्री के अनुसार यह समझौता एक नए युग की शुरुआत है, जो सहयोग और साझा भविष्य पर आधारित है।
आईएमआए गलियारे को मिलेगा बढ़ावा
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि इस समझौते के तहत भारत और यूरोपीय संघ मिलकर आईएमआए गलियारे को आगे बढ़ाने पर काम करेंगे। इससे व्यापार, निवेश और संपर्क के नए रास्ते खुलेंगे। उन्होंने इस साझेदारी के लिए यूरोपीय संघ के नेताओं का आभार जताया।
अगले साल लागू होने की संभावना
इस मुक्त व्यापार समझौते को औपचारिक रूप से अगले साल लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके लिए दोनों पक्षों को अपने-अपने देशों में आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ यह समझौता आर्थिक, रणनीतिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे भारतीय उद्योगों को नए बाजार मिलेंगे, निवेश बढ़ेगा और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। यह समझौता भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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