महाराष्ट्र में वोटिंग लिस्ट में गड़बड़ी के खिलाफ विरोध मार्च निकालेगी इंडिया गठबंधन, कई विपक्षी नेता होंगे शामिल
मुंबई। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच मतदाता सूची में गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए विपक्षी दलों ने आज एक बड़ा विरोध मार्च निकालने का फैसला किया है। इस प्रदर्शन का नेतृत्व महाविकास आघाड़ी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) करेगी। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं, जिनका सीधा असर चुनाव की निष्पक्षता पर पड़ेगा।
विरोध मार्च का मार्ग और नेतृत्व
विरोध मार्च दोपहर 1 बजे मुंबई के फैशन स्ट्रीट से शुरू होगा। यह मेट्रो सिनेमा मार्ग से होते हुए मुंबई महानगरपालिका के मुख्यालय तक पहुंचेगा। इस मार्च में शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), कांग्रेस, मनसे और वामपंथी दलों के नेता एक साथ शामिल होंगे। जिन प्रमुख नेताओं की मौजूदगी तय है, उनमें शरद पवार, उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे, सुप्रिया सुले, विजय वडेट्टीवार और जितेंद्र आव्हाड जैसे नेता शामिल हैं। इस बात को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि राज ठाकरे की पार्टी मनसे इस विरोध में शामिल हो रही है। क्योंकि लंबे समय से मनसे और महाविकास आघाड़ी के बीच संबंध सहज नहीं रहे थे। यह कदम दर्शाता है कि विपक्ष मतदाता सूची की समस्या को लेकर एकजुट रणनीति बनाना चाहता है।
मतदाता सूची में क्या हैं आरोप
विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में बड़ी संख्या में फर्जी नाम जोड़े गए हैं और असली मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। एनसीपी नेता अनिल देशमुख ने आरोप लगाया कि नवी मुंबई नगर निगम आयुक्त के आधिकारिक पते का उपयोग करते हुए लगभग 130 फर्जी नाम मतदाता सूची में दर्ज किए गए हैं। यह दर्शाता है कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही या जानबूझकर हेरफेर किया गया है। विजय वडेट्टीवार ने कहा कि वर्तमान सरकार और उसके सहयोगियों ने चुनाव जीतने के लिए मतदाता सूची को प्रभावित किया है। उनके अनुसार, जब भी चुनाव आते हैं, मतदाता सूची को संतुलित और पारदर्शी बनाने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की होती है, मगर इस बार शिकायतों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल
विपक्षी दलों का कहना है कि हालांकि उन्होंने कई बार चुनाव आयोग के सामने आपत्तियां दर्ज कराई हैं, लेकिन आयोग की ओर से संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। जितेंद्र आव्हाड का कहना है कि जब एक ही पते से 100 से अधिक नाम दर्ज मिलें, तो यह साफ संकेत है कि सूची में हेरफेर हुआ है। चुनाव आयोग को तत्काल सत्यापन कर इन विसंगतियों को हटाना चाहिए। विपक्ष की यह भी मांग है कि आने वाले चुनाव निष्पक्ष तरीके से हों, और इसके लिए मतदाता सूची की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। यदि मतदाता सूची में त्रुटियां रहेंगी, तो मतदान परिणामों की सत्यता पर सवाल उठेंगे।
राजनीतिक संदर्भ और विपक्ष की रणनीति
यह विरोध प्रदर्शन सिर्फ मतदाता सूची तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक संदेश देने का प्रयास भी है। महाविकास आघाड़ी और मनसे इस मुद्दे को एक व्यापक लोकतांत्रिक सवाल के रूप में सामने रखने की कोशिश कर रहे हैं। उनका तर्क है कि चुनाव लोकतंत्र की नींव हैं और यदि मतदाताओं की पहचान और पंजीकरण ही संदिग्ध हो जाए, तो चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता खतरे में पड़ जाती है। विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर यह बताना चाहता है कि मौजूदा सरकार जनता के अधिकारों और लोकतंत्र की प्रक्रिया को कमजोर कर रही है।
आगे क्या हो सकता है
यदि विरोध प्रदर्शन व्यापक जनसमर्थन हासिल करता है, तो इस मामले पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में चुनाव आयोग को मतदाता सूची की दोबारा जांच या विशेष सत्यापन अभियान चलाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। साथ ही, यह मुद्दा आने वाले विधानसभा चुनावों के राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित कर सकता है। विपक्ष इस आंदोलन को लोकतंत्र बचाओ अभियान के रूप में भी पेश कर सकता है और इसे चुनावी विमर्श का मुख्य मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा। मतदाता सूची को लेकर उठ रही यह बहस सिर्फ तकनीकी त्रुटियों का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और जनभागीदारी से जुड़ा एक गंभीर प्रश्न है, जिस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं।


