बिहार में राजस्व सेवा अधिकारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, 537 अंचलों में कामकाज प्रभावित
- अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारी हड़ताल पर, जमीन और प्रमाणपत्र से जुड़े हजारों कार्य रुके
पटना। बिहार में राजस्व सेवा से जुड़े अधिकारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होने के बाद राज्य भर में प्रशासनिक कामकाज गंभीर रूप से प्रभावित हो गया है। सोमवार से बिहार राजस्व सेवा के अधिकारी सामूहिक रूप से हड़ताल पर चले गए हैं। इस हड़ताल में अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकार और विभाग की ओर से लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा नहीं किए जाने के कारण उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। अधिकारियों के हड़ताल पर जाने से राज्य के सभी 537 अंचलों में कामकाज लगभग पूरी तरह ठप हो गया है। इसका सीधा असर आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों पर पड़ा है। जमीन से संबंधित दाखिल-खारिज, भूमि परिमार्जन और अन्य राजस्व मामलों के साथ-साथ जाति, आय और आवासीय प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो गई है। इन सेवाओं के रुकने से हजारों लोगों के जरूरी काम अटक गए हैं। बताया जा रहा है कि इस हड़ताल में बिहार राजस्व सेवा के दोनों प्रमुख संगठन शामिल हैं। दोनों संगठनों ने संयुक्त रूप से सरकार के खिलाफ विरोध जताते हुए यह निर्णय लिया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि विभागीय स्तर पर कई बार आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। राजस्व विभाग में पहले से ही कार्य प्रभावित चल रहा था, क्योंकि राजस्व कर्मचारी संघ भी 11 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। कर्मचारियों की हड़ताल अभी तक जारी है। अब अधिकारियों के भी हड़ताल में शामिल हो जाने से स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। कर्मचारी और अधिकारी दोनों के एक साथ हड़ताल पर रहने से राजस्व विभाग की पूरी व्यवस्था लगभग ठप हो गई है। इस हड़ताल का प्रभाव केवल प्रमाणपत्र और जमीन से जुड़े कामों तक सीमित नहीं है। राज्य में चल रहे भूमि सर्वेक्षण और चकबंदी से संबंधित कार्य भी पूरी तरह रुक गए हैं। इन परियोजनाओं का संचालन मुख्य रूप से राजस्व सेवा के अधिकारी ही करते हैं। उनके हड़ताल पर चले जाने से भूमि सुधार और सर्वेक्षण से जुड़ी योजनाओं की प्रगति पर भी असर पड़ा है। इसके अतिरिक्त कृषि गणना निदेशालय से संबंधित कार्य भी प्रभावित हो गए हैं। कृषि से जुड़े आंकड़ों का संकलन और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया फिलहाल रुक गई है। साथ ही वर्ष 2027 में प्रस्तावित राष्ट्रीय जनगणना की तैयारियों पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। बिहार में जनगणना 2027 के लिए राजस्व विभाग को नोडल विभाग की जिम्मेदारी दी गई है, इसलिए अधिकारियों की हड़ताल से इस महत्वपूर्ण कार्य की तैयारियों में भी बाधा आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह हड़ताल लंबे समय तक जारी रहती है तो इसका प्रभाव प्रशासनिक व्यवस्था और विकास योजनाओं पर भी पड़ सकता है। आम लोगों को जमीन और प्रमाणपत्र से जुड़े कार्यों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। फिलहाल सरकार की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि यह संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही सरकार और राजस्व सेवा के अधिकारियों के बीच बातचीत हो सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों पक्षों के बीच कब सहमति बनती है और राज्य में राजस्व विभाग का कामकाज कब सामान्य हो पाता है।


