नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ बदले 15 बड़े नियम, आम लोगों की जेब पर असर
- कॉमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा, रेल टिकट रद्द करने के नियम सख्त
- कर, बैंकिंग और वेतन संरचना में बदलाव, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा
नई दिल्ली। नए वित्त वर्ष की शुरुआत 1 अप्रैल से कई महत्वपूर्ण बदलावों के साथ हुई है, जिनका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी और खर्च पर पड़ने वाला है। रसोई गैस से लेकर रेल यात्रा, कर व्यवस्था, बैंकिंग और वेतन ढांचे तक कुल 15 बड़े नियमों में बदलाव लागू किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य जहां एक ओर व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल लेनदेन और कर प्रणाली को सरल बनाना भी है। सबसे पहले रसोई और यात्रा से जुड़े बदलावों की बात करें तो व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमत में 218 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। इसका सीधा असर होटल, रेस्तरां और कैटरिंग व्यवसाय पर पड़ेगा, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं। हालांकि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। रेल यात्रा के नियमों में भी बड़ा बदलाव हुआ है। अब यात्री ट्रेन छूटने से आठ घंटे पहले तक ही टिकट रद्द कर पाएंगे, जबकि पहले यह समय चार घंटे था। इसके अलावा अब यात्री ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक अपने चढ़ने के स्टेशन में बदलाव कर सकते हैं। इन बदलावों से जहां टिकट रद्द करने में देरी पर नुकसान होगा, वहीं पुष्टि किए गए टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी। सड़क परिवहन से जुड़े नियमों में भी बदलाव हुआ है। फास्ट टैग के वार्षिक पास की कीमत में 2.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, जिससे अब उपयोगकर्ताओं को अधिक भुगतान करना होगा। साथ ही देशभर के टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अब टोल टैक्स का भुगतान केवल डिजिटल माध्यमों जैसे फास्ट टैग या एकीकृत भुगतान प्रणाली के जरिए ही किया जा सकेगा। वाहनों की कीमतों में भी 2 से 3 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। इससे नई गाड़ी खरीदने वालों को अधिक खर्च करना पड़ेगा। जिन लोगों ने 31 मार्च तक बिल नहीं कटवाया है, उन्हें अब नई दरों के अनुसार भुगतान करना होगा। कर प्रणाली में भी कई अहम बदलाव किए गए हैं। अब वित्तीय वर्ष और मूल्यांकन वर्ष की जगह केवल कर वर्ष शब्द का उपयोग किया जाएगा, जिससे करदाताओं के बीच भ्रम कम होगा। नई कर व्यवस्था के तहत आयकर छूट की सीमा भी बढ़ाई गई है, जिससे वेतनभोगी वर्ग को राहत मिल सकती है। स्रोत पर कर कटौती से संबंधित प्रमाण पत्रों के स्वरूप में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां फॉर्म 16 और 16ए का उपयोग होता था, अब उनकी जगह नए प्रारूप वाले फॉर्म 130 और 131 लागू किए गए हैं। इससे कर विवरण अधिक स्पष्ट और विस्तृत रूप में उपलब्ध होगा। घर किराया भत्ता पर कर छूट के नियम भी सख्त किए गए हैं। अब किराया रसीद और मकान मालिक का स्थायी खाता संख्या देना अनिवार्य होगा, खासकर यदि वार्षिक किराया एक लाख रुपये से अधिक है। इसके साथ ही आठ प्रमुख शहरों में कर छूट की सीमा भी बढ़ाई गई है। बैंकिंग क्षेत्र में भी बदलाव हुए हैं। पंजाब नेशनल बैंक के डेबिट कार्ड से नकद निकासी की सीमा तय कर दी गई है, जिससे एक दिन में सीमित राशि ही निकाली जा सकेगी। इसका उद्देश्य धोखाधड़ी को रोकना बताया गया है। शेयर बाजार से जुड़े लेनदेन में भी बदलाव किया गया है। वायदा और विकल्प कारोबार पर प्रतिभूति लेनदेन कर की दर बढ़ा दी गई है, जिससे कारोबारियों की लागत बढ़ेगी और मुनाफे पर असर पड़ेगा। सोने के बांड से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब केवल उन निवेशकों को कर छूट मिलेगी, जिन्होंने इसे सीधे भारतीय रिजर्व बैंक से खरीदा है। अन्य मामलों में लाभ पर कर देना होगा। इसके अलावा श्रम कानूनों के तहत वेतन संरचना में बदलाव किया गया है, जिसके तहत मूल वेतन को कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत रखना अनिवार्य किया गया है। इससे कर्मचारियों की हाथ में मिलने वाली सैलरी कम हो सकती है, लेकिन भविष्य निधि और सेवानिवृत्ति लाभ बढ़ेंगे। नौकरी छोड़ने के बाद बकाया भुगतान की प्रक्रिया को भी तेज किया गया है। अब कंपनियों को दो कार्य दिवस के भीतर पूरा भुगतान करना होगा। साथ ही पैन कार्ड से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है, जिसमें जन्मतिथि प्रमाण के लिए आधार कार्ड को हटाकर अन्य दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं। नए वित्त वर्ष की शुरुआत कई बड़े बदलावों के साथ हुई है, जिनका असर आम नागरिकों की दैनिक जिंदगी से लेकर वित्तीय योजनाओं तक देखने को मिलेगा।


