February 13, 2026

मैंने मुख्यमंत्री को इस्तीफा नहीं दिया, कुछ लोग मीडिया के माध्यम से अफवाह उड़ा रहे : ललन सिंह

पटना। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के अपने इस्तीफा की बात को गलत ठहराया है। उन्होंने कहा कि हमने काई इस्तीफा नहीं दिया है। मंत्री और जेडीयू के सीनियर लीडर विजय चौधरी ने भी ललन सिंह के इस्तीफे की बात का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी में खाई तो दूर, खरोंच तक नहीं है। मीडिया में दोपहर 12 बजे से ही जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के इस्तीफे की खबरें सामने आईं। डेढ़ घंटे बाद मंत्री विजय चौधरी ने जेडीयू ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें इस्तीफे की बात को गलत बताया। ललन सिंह ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में इस्तीफे से इनकार किया है। 21 जुलाई 2021 में इन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गए थे। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल 2 साल का होता है। ललन सिंह अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। 6 अगस्त 2022 जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने पार्टी छोड़ी थी। फिर जेडीयू के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश का साथ छोड़कर अलग पार्टी बना ली थी, जबकि आरसीपी सिंह बीजेपी में शामिल हो गए थे। दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक 19 दिसंबर को थी। बैठक के बाद से ही ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाने की चर्चा तेज चल रही है। बैठक के अगले दिन नीतीश कुमार सिंह लौट आए थे, लेकिन ललन सिंह दूसरे दिन आए। आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव भी दूसरे दिन ही आए थे। इसके बाद सीएम नीतीश कुमार और ललन सिंह में सबकुछ ठीक नहीं होने की खबरें बाहर आने लगीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के बीच शनिवार देर शाम को मुलाकात हुई थी। ललन सिंह खुद सीएम से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान वित्त मंत्री विजय चौधरी भी साथ मौजूद थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ललन सिंह के मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ललन सिंह को छोड़ने उनके आवास तक खुद गए। वहां नीतीश कुमार ललन सिंह के आवास पर लगभग 10 मिनट तक रुके और दोनों के बीच बातचीत हुई थी। इसके बाद नाराजगी की बातों पर विराम लग गया था। ललन सिंह को लेकर उपेंद्र कुशवाहा ने पहले ही संकेत दे दिए थे। उपेंद्र ने 6 महीने पहले औरंगाबाद में कहा था- राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह अब नाम के जदयू में हैं। वे जदयू के कम और राजद के ज्यादा आदमी हैं। क्योंकि वे वर्तमान में राजद की भाषा बोल रहे हैं।

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