जमुई में भारी मात्रा में नकली दवाइयों की खेप बरामद, पैकिंग का सामान जब्त, पुलिस ने फैक्ट्री में की छापेमारी
जमुई। बिहार के जमुई जिले में नकली दवाओं के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। खैरा थाना क्षेत्र के चौहानडीह गांव में पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर एक मकान में छापेमारी कर भारी मात्रा में नकली दवाओं की खेप बरामद की है। यह कार्रवाई सोमवार देर रात की गई, जिसमें कफ सिरप, बुखार की दवाइयां, खाली बोतलें, रैपर्स, दवा निर्माण की मशीनें और पैकिंग सामग्री शामिल है। पुलिस को लंबे समय से इलाके में नकली दवाइयों के अवैध कारोबार की सूचना मिल रही थी। सूत्रों के अनुसार, चौहानडीह गांव के एक मकान में गोदाम की आड़ में यह गैरकानूनी फैक्ट्री चल रही थी, जहां बड़े पैमाने पर नकली दवाइयां तैयार कर बाजार में खपाई जा रही थीं।गोपनीय सूचना के बाद सक्रिय हुई खैरा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सोमवार रात मौके पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान मौके से लाखों रुपये की तैयार नकली दवाएं बरामद की गईं। इसके अलावा भारी मात्रा में खाली शीशियां, रैपर, पैकिंग सामग्री और निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली मशीनें भी जब्त की गईं। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए औषधि निरीक्षक को भी मौके पर बुलाया, जिन्होंने बरामद सामग्री का प्रारंभिक परीक्षण कर नकली होने की पुष्टि की। बरामद दवाइयों को ट्रैक्टर में लादकर थाना परिसर लाया गया है। पुलिस और औषधि विभाग की संयुक्त टीम इस पूरे मामले की गहन जांच में जुट गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मकान काफी समय से बंद रहता था और बाहर से कोई गतिविधि नजर नहीं आती थी। हालांकि समय-समय पर कुछ अनजान लोगों का आना-जाना जरूर होता था। अब शक की सुई मकान मालिक और वहां आने-जाने वाले लोगों की ओर घूम रही है। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। इस पूरे मामले को लेकर खैरा थाना अध्यक्ष ने कहा कि, “हमें विश्वसनीय सूत्रों से सूचना मिली थी कि चौहानडीह में नकली दवा बनाई जा रही है। सूचना सही पाई गई और भारी मात्रा में नकली दवा जब्त की गई है। इस धंधे में शामिल लोगों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ दवाइयां पूरी तरह से तैयार थीं, जबकि कुछ का निर्माण प्रक्रिया में था। यह सामग्री बाजार में खपाने की तैयारी में थी। नकली दवाइयों की यह खेप आम लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती थी, जिसे समय रहते पुलिस ने नष्ट कर बड़ी अनहोनी से बचा लिया। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नकली दवा फैक्ट्री का संचालन कौन कर रहा था, इसमें किन-किन लोगों की संलिप्तता है, और यह नेटवर्क कहां-कहां तक फैला हुआ है। मामले में कुछ संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। बिहार में नकली दवाओं का यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है। पुलिस की सतर्कता से बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है, लेकिन इससे यह भी स्पष्ट होता है कि राज्य में नकली दवाओं का नेटवर्क अब ग्रामीण क्षेत्रों तक फैल चुका है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इस दिशा में अब और अधिक सख्त कदम उठाने की जरूरत है।


