‘एचपीबी टीकाकरण कई तरह के कैंसर से करता है आजीवन बचाव’
- विश्व कैंसर दिवस : ‘कैंसर के इलाज में होनेवाले अंतर को खत्म करना’ इस बार का थीम
पटना। कैंसर एक जानलेवा बीमारी है। यदि यह स्टेज दो को पार कर जाता है तो उत्तरजीविता (जीवन की संभावना) बेहद कम हो जाती है। लेकिन मेडिकल साइंस के अंतर्गत कुछ ऐसी दवाओं का अविष्कार हुआ है, जो टीका के रूप में निश्चित उम्र सीमा में लगा दी जाए तो कुछ प्रकार के कैंसर से आजीवन बचा जा सकता है। पारस अस्पताल की मेडिकल आनकोलॉजिस्ट डॉ. मोशर्रत शाहीन और सर्जिकल आनकोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा वाजपेयी के मुताबिक बच्चेदानी के मुंह का कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) से देश और बिहार की कई महिलाओं को जूझना पड़ता है। यदि एचपीबी (ह्यूमन पेपीलोमा वायरस) टीका 9 से 26 वर्ष की उम्र में लड़कों और ल़डकियों को लगा दिया जाए तो कई प्रकार के कैंसर से बचा जा सकता है। यह टीका बच्चेदानी के मुंह, जेनाइटल (योनि), लिंग और कुछ मुंह के कैंसर से भी काफी हद तक बचाव करता है। इस बार विश्व कैंसर दिवस का थीम ‘क्लोज द केयर गैप’ (कैंसर के इलाज में होनेवाले अंतर को खत्म करना) है।
स्तन का करती रहें परीक्षण
उन्होंने बताया कि स्तन कैंसर से बचने का बहुत आसान उपाय है। हर माह माहवारी के तुरंत बाद स्तन और कांख का अपने हाथों से परीक्षण करें। देखें, स्तन में किसी तरह का कोई बदलाव तो नहीं आ रहा है। कहीं गांठ तो नहीं बन रहा है। निप्पल में किसी तरह का कोई परिवर्तन तो नहीं आ रहा है। यदि खून के रिश्ते में किसी को कैंसर रहा है तो आगे की पीढ़ी में जितनी भी महिलाएं हों, वो ज्यादा सर्तक रहें। एहतियात के तौर पर सभी महिलाओं को 40 वर्ष के बाद हर वर्ष एक मेमोग्राफी टेस्ट कराना चाहिए।
होंठ पर उजला या लाल धब्बा गंभीर खतरे का संकेत
डॉ. मोशर्रत शाहीन और डॉ. आकांक्षा वाजपेयी के अनुसार यदि कोई तंबाकू या गुटखा या अत्यधिक शराब का सेवन करता है और उसके होंठ, मसूड़े या मुंह के अंदर कोई घाव बन रहा है या फिर लाल धब्बा दिख रहा तो कैंसर रोग विशेषज्ञ को जरूर दिखाएं। मुंह के कैंसर में बोलने में दिक्कत, दांत हिलना, वजन घटना आदि मुख्य लक्षण हैं। इसी तरह बच्चेदानी के मुंह के कैंसर में गुप्तांग से असामान्य रक्तस्त्राव या पानी की तरह रिसाव, पेशाब के रास्ते में मांस होना आदि लक्षण हैं। इसी तरह अंडाशय के कैंसर में पेट के नीचले हिस्से में दर्द, खाना नहीं पचना, बार-बार पेशाब आदि लक्षण हैं।
सर्वाइकल कैंसर का कारण
एचआईवी, रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना, धूम्रपान, कई लोगों के साथ सहवास करना। यह कैंसर ह्यूमन पेपीलोमा वायरस से होता है। बचाव के लिए रेगुलर पेपरस्मेयर टेस्ट कराएं।
अंडाशय के कैंसर का कारण
कभी बच्चा नहीं होना या देर से बच्चा होना, जेनेटिक, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी, माहवारी जल्दी शुरू हुआ और देर से खत्म हुआ। यह 35 से 65 वर्ष के बीच अमूमन होता है। बचाव के लिए रेगुलर स्वास्थ्य जांच कराना चाहिए।


