सनसनीखेज खुलासा: आईपीएस की चिट्ठी ने आवास बोर्ड की खोल कर रख दी पोल, धड़ल्ले से अवैध निर्माण?
पटना। राजधानी पटना के राजीव नगर तथा दीघा थाना क्षेत्र में बिहार राज्य आवास बोर्ड के भूमि पर हो रहे अवैध निर्माण को लेकर पटना पुलिस के विधि व्यवस्था एसडीपीओ 2 के द्वारा पत्र लिखकर लिखकर बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रबंध निदेशक को वर्तमान एसडीओ सव्य सचिन की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए थे। इतना ही नहीं एसडीपीओ 2 के द्वारा जारी की गई पत्र में वर्तमान एसडीओ सव्य सचिन तथा भूमि माफियाओं के मिली भगत के बातों का उल्लेख था। एसडीपीओ विधि व्यवस्था 2 के द्वारा जारी पत्र ज्ञापांक सं-6051 दिनांक 13.10.25 में उल्लेख था कि किस प्रकार बिहार राज्य आवास बोर्ड के अधिग्रहित भूमि पर हो रहे अवैध निर्माण की सूचना फोटो तथा वीडियो के साथ देने के बावजूद वर्तमान एसडीओ के द्वारा इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। उक्त पत्र में दीघा तथा राजीव नगर दोनों थाना के प्रभारियों के द्वारा बिहार राज्य आवास बोर्ड के एसडीओ सव्य सचिन की भूमिका पर आपत्ति की जताई गई थी। यहां तक के भूमि माफियाओं के साथ मिली भगत के तथ्य भी दर्ज किए गए थे। उक्त पत्र के माध्यम से बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रबंध निदेशक से एसडीओ सव्य सचिन पर समुचित कार्रवाई के अनुशंसा की गई थी। हैरत इस बात की है कि अक्टूबर माह के प्रथम पखवाड़े में लिखे गए इस गंभीर पत्र के बावजूद जनवरी के प्रथम सप्ताह में एसडीओ सव्य सचिन पर सिर्फ तबादले की कार्रवाई की जाती है तथा सभ्य सचिन तबादले के बावजूद प्रभार छोड़ने को राजी नहीं बताए जाते हैं।इलाके में इस बात की चर्चा है की भूमि माफियाओं के द्वारा दावा किया जा रहा है कि वर्तमान एसडीओ सव्य सचिन का तबादला रुकवा दिया जाएगा।यह दावा किस आधार पर किए जा रहे हैं,किस बल पर किए जा रहे हैं यह एक मौन प्रश्न है? ज्ञातव्य हो की राजधानी के राजीव नगर तथा दीघा थाना क्षेत्र में बिहार राज्य आवास बोर्ड के अधिग्रहित भूमि पर पटना उच्च न्यायालय के द्वारा किसी भी प्रकार के निर्माण पर लगाए गए प्रतिबंध को धत्ता बताते हुए भूमि माफिया के द्वारा लगातार अवैध निर्माण का खेल जारी है। इससे संबंधित खबरें जब लगातार दैनिक ‘अमृतवर्षा’ मैं प्रकाशित की गई तो मुख्यालय के द्वारा दीघा कैंप के एसडीओ सव्य सचिन का तबादला कर दिया गया।लेकिन उनके स्थान पर तैनात किए गए प्रकाश चंद्र राजू को अभी तक प्रभार नहीं सोपा गया है।बताया जाता है कि तबादले के उपरांत सभ्य सचिन बिना प्रभार दिए ही छुट्टी पर चले गए हैं।इधर नए एसडीओ प्रकाश चंद्र राजू को प्रभार नहीं मिला है।इसलिए पिछले तीन दिनों से कोई भी एसडीओ प्रभार में नहीं है तथा दिन-रात अवैध निर्माण का कार्य धड़ल्ले से चालू है। पिछले चार माह से दीघा तथा राजीव नगर थाना क्षेत्र के आवास बोर्ड के अधिग्रहित जमीन पर अवैध निर्माण का खेल जमकर हो रहा है।जिसे लेकर कई शिकायतें बिहार राज्य आवास बोर्ड के मुख्यालय तक पहुंची। आश्चर्यजनक सत्य है कि खुलेआम दिन के उजाले में दीघा-आशियाना रोड जैसे व्यस्ततम इलाके में अवैध निर्माण का खेल जारी रहा।लेकिन बिहार राज्य आवास बोर्ड के द्वारा किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई।पटना पुलिस के एसडीपीओ विधि व्यवस्था 2 के द्वारा जारी पत्र के अवलोकन के बाद स्पष्ट हो जाता है कि अवैध निर्माण पर आवास बोर्ड का हथौड़ा क्यों नहीं चल पा रहा था? किस प्रकार अवैध निर्माण के लिए विभागीय स्तर पर ग्रीन सिग्नल दिया जा रहा था।दरअसल पटना पुलिस को इस बात की जानकारी नहीं रहती है कि कौन सा प्लाट सामान्य है तथा कौन सा प्लाट अधिग्रहित है।इसकी जानकारी आवास बोर्ड के दीघा कैंप कार्यालय के एसडीओ के पास रहती है।पटना पुलिस के पास जमीन के दस्तावेज होते नहीं है।ऐसे में अवैध निर्माण की शिकायत आने के बावजूद जब तक आवास बोर्ड के एसडीओ के द्वारा मुहर ने लगाया जाता है।तब तक पुलिस कार्रवाई नहीं कर पाती है।ऐसे में जब दीघा-आशियाना रोड से लेकर घुड़दौड़ मोड़ तक खुलेआम अवैध निर्माण का खेल जारी है।तो पटना पुलिस के एसडीपीओ विधि व्यवस्था 2 के द्वारा लिखे गए चिट्ठी को पढ़कर इसका असली खेल समझ में आ जाता है।अब देखना है कि बिहार राज्य आवास बोर्ड के बड़े अधिकारी इस पर क्या कार्रवाई करते हैं। वैसे बता दे की चिट्ठी 21 अक्टूबर 2025 को बिहार राज्य आवास बोर्ड के एमडी के यहां पहुंची थी। जबकि तबादले की कार्रवाई जनवरी के प्रथम सप्ताह में की गई।पुलिस के द्वारा समुचित कार्रवाई के अनुशंसा के बावजूद महज तबादला किस ओर इशारा करता है।



