भीषण गर्मी के बीच राहत की उम्मीद, बिहार के 18 जिलों में वर्षा और तेज हवा की चेतावनी
- मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट, अगले 48 से 72 घंटे में मानसून के सक्रिय होने के आसार
- राजधानी पटना सहित कई जिलों में तापमान गिरने की संभावना, जून के अंत तक मिल सकती है गर्मी से राहत
पटना। बिहार में पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। दिन के साथ-साथ रात में भी लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल रही है। हालांकि मौसम विभाग ने शुक्रवार को मौसम में बदलाव के संकेत दिए हैं। प्रदेश के 18 जिलों के लिए नारंगी चेतावनी संकेत जारी किया गया है, जहां वर्षा, मेघगर्जन और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 48 से 72 घंटों के भीतर मानसूनी गतिविधियां तेज हो सकती हैं, जिससे राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल जाएगा। मौसम विभाग के अनुसार प्रभावित जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही कई स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना भी व्यक्त की गई है। विभाग ने लोगों से मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने और सावधानी बरतने की अपील की है।
मानसून की औपचारिक एंट्री, लेकिन सक्रियता अभी कमजोर
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बिहार में मानसून की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है, लेकिन मानसूनी तंत्र अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। यही कारण है कि राज्य के कुछ हिस्सों में वर्षा हो रही है, जबकि अन्य क्षेत्रों में तेज धूप और उमस का प्रभाव बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र अभी कमजोर स्थिति में है। इसके कारण पर्याप्त मात्रा में नमी बिहार तक नहीं पहुंच पा रही है। इसके अलावा मानसून की द्रोणिका रेखा भी राज्य के सभी हिस्सों में प्रभावी नहीं है। यही वजह है कि मौसम का स्वरूप अलग-अलग जिलों में भिन्न दिखाई दे रहा है।
पटना में बदल सकता है मौसम
राजधानी पटना में शुक्रवार को मौसम में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार दिनभर आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। कई इलाकों में वर्षा हो सकती है तथा तेज हवाएं चल सकती हैं। यदि वर्षा होती है तो राजधानी के अधिकतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। इससे लोगों को लंबे समय से पड़ रही उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षा और बादलों की मौजूदगी से वातावरण में नमी का संतुलन बेहतर होगा और तापमान में कमी आएगी।
कैमूर रहा सबसे गर्म जिला
पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई जिलों में लू जैसी स्थिति बनी रही। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार कैमूर जिले के भभुआ क्षेत्र में सबसे अधिक 42.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इसके अलावा कई अन्य जिलों में भी तापमान सामान्य से अधिक बना रहा, जिससे लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। दिन के समय तेज धूप और रात में उमस भरी गर्मी के कारण लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों को अधिक परेशानी झेलनी पड़ी।
अगले कुछ दिनों में बढ़ेगी मानसूनी गतिविधि
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जैसे ही मानसून पूरे बिहार में सक्रिय होगा, वर्षा की गतिविधियां तेज हो जाएंगी। लगातार वर्षा होने से अधिकतम तापमान में तीन से पांच डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट संभव है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि जून के अंतिम सप्ताह तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में लोगों को भीषण गर्मी से काफी हद तक राहत मिल सकती है। खेतों में भी नमी बढ़ेगी, जिससे कृषि कार्यों को गति मिलने की संभावना है।
जेट धारा की भूमिका महत्वपूर्ण
मौसम विभाग ने वर्तमान मौसम परिस्थितियों के पीछे जेट धारा की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया है। जेट धारा वायुमंडल की ऊपरी परतों में बहने वाली अत्यंत तेज हवाओं का समूह होती है। यह सामान्यतः पृथ्वी की सतह से आठ से पंद्रह किलोमीटर की ऊंचाई पर सक्रिय रहती है। ये हवाएं मानसूनी बादलों और पश्चिमी विक्षोभ जैसी मौसमी प्रणालियों को प्रभावित करती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे-जैसे जेट धारा का वर्तमान स्वरूप कमजोर होगा, मानसूनी हवाओं की गति बढ़ेगी और वर्षा की गतिविधियां तेज होंगी।
देश के अन्य हिस्सों में भी आगे बढ़ेगा मानसून
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आगामी चार से पांच दिनों में मानसून के महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ तथा देश के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव बिहार के मौसम पर भी पड़ेगा। फिलहाल राज्य के लोगों की निगाहें आसमान पर टिकी हुई हैं। लंबे समय से पड़ रही गर्मी और उमस के बीच मौसम विभाग की भविष्यवाणी राहत की उम्मीद लेकर आई है। यदि अनुमान के अनुसार वर्षा होती है तो न केवल लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि कृषि और जल संसाधनों के लिए भी यह लाभदायक साबित होगी।


