February 24, 2026

शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी आए नीचे, आईटी और ऑटो को नुकसान

मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जोरदार गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब एक हजार अंक यानी लगभग 1.19 प्रतिशत टूटकर 82,300 के स्तर तक आ गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक भी लगभग 300 अंक यानी 1.10 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,300 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
सूचना प्रौद्योगिकी और ऑटो क्षेत्र पर दबाव
बाजार में आई इस गिरावट की मुख्य वजह सूचना प्रौद्योगिकी और वाहन निर्माण क्षेत्र के शेयरों में भारी बिकवाली मानी जा रही है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों ने इन क्षेत्रों में तेजी से मुनाफावसूली की, जिससे सूचकांकों पर दबाव बढ़ गया। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में गिरावट का एक कारण एंथ्रोपिक कंपनी के क्लॉड कोड टूल का नया अद्यतन बताया जा रहा है। यह नया तकनीकी उपकरण कोबोल प्रोग्रामिंग भाषा पर आधारित पुराने सिस्टम को कम लागत और तेज गति से आधुनिक बनाने की क्षमता रखता है। कोबोल एक पुरानी प्रोग्रामिंग भाषा है, जिसका उपयोग आज भी कई बैंक, सरकारी संस्थान और बड़े व्यावसायिक संगठन अपने डेटा प्रबंधन और वित्तीय लेनदेन के लिए करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक व्यापक रूप से अपनाई गई तो पारंपरिक सूचना प्रौद्योगिकी परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है। इसी आशंका के चलते निवेशकों ने आईटी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी।
वाहन निर्माण कंपनियों में भी कमजोरी
वाहन निर्माण क्षेत्र के शेयरों में भी नरमी देखी गई। इससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना। पिछले कारोबारी सत्र में जहां वाहन और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी का रुख था, वहीं मंगलवार को स्थिति उलट गई। सोमवार को सेंसेक्स 480 अंक की बढ़त के साथ 83,295 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 142 अंक बढ़कर 25,713 पर पहुंचा था। लेकिन अगले ही दिन बाजार का रुख बदल गया। विश्लेषकों का कहना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा सुरक्षित करने के लिए बिकवाली की, जिससे बाजार में गिरावट गहरी हो गई।
वैश्विक संकेतों का असर
वैश्विक बाजारों के संकेत भी मिश्रित रहे। जापान का निक्केई सूचकांक 0.76 प्रतिशत बढ़कर 57,250 पर पहुंच गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.61 प्रतिशत की बढ़त के साथ 5,940 पर कारोबार करता दिखा। दूसरी ओर हांगकांग का हैंगसेंग सूचकांक 2 प्रतिशत गिरकर 26,539 पर आ गया। चीन का शंघाई कंपोजिट सूचकांक 1.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,129 पर पहुंचा। अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली थी, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और तकनीकी बदलावों की खबरों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।
विदेशी और घरेलू निवेशकों की भूमिका
विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। 23 फरवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 3,483 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1,292 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। फरवरी महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने कुल 1,472 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। वहीं घरेलू निवेशकों ने इसी अवधि में 12,818 करोड़ रुपये के शेयरों की खरीदारी की है। इससे पहले जनवरी 2026 में विदेशी निवेशकों ने 41,435 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे, जबकि घरेलू निवेशकों ने 69,220 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा बाजार में बना हुआ है, हालांकि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव जारी है।
प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम पर नजर
इसी बीच नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की कंपनी क्लीन मैक्स एनवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम भी निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। कंपनी इस निर्गम के माध्यम से 3,100 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। पहले दिन इस निर्गम को लगभग 34 प्रतिशत तक सदस्यता मिली थी। कंपनी नए शेयर जारी करने के साथ-साथ बिक्री प्रस्ताव के जरिए भी हिस्सेदारी बेच रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे निर्गम बाजार में निवेशकों की रुचि बनाए रखते हैं, लेकिन व्यापक बाजार रुझान पर इनका सीमित प्रभाव पड़ता है।
निवेशकों के लिए सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में इस तरह की गिरावट अक्सर अल्पकालिक होती है। निवेशकों को घबराहट में निर्णय लेने से बचना चाहिए और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। वैश्विक संकेतों, तकनीकी परिवर्तनों और कंपनियों के तिमाही परिणामों के आधार पर आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय होगी। फिलहाल निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय बाजारों, विदेशी निवेश प्रवाह और प्रमुख क्षेत्रों के प्रदर्शन पर टिकी है। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सतर्कता और संतुलित निवेश रणनीति ही बेहतर विकल्प मानी जा रही है।

 

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