पप्पू यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई फिर टली, धमकी के बाद खाली हुआ परिसर, पुलिस और वकीलों में टकराव
पटना। बिहार की न्यायिक व्यवस्था को बुधवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पटना, दानापुर और किशनगंज सिविल कोर्ट को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी दी गई। ईमेल के जरिए भेजी गई इस धमकी में दावा किया गया कि दोपहर एक बजे कोर्ट परिसर में पांच बम धमाके होंगे। धमकी मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं और एहतियात के तौर पर कोर्ट परिसरों को खाली करा दिया गया। इस घटनाक्रम के कारण कई मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई, जिनमें जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई भी शामिल है, जिसे टाल दिया गया। सूत्रों के अनुसार, बुधवार सुबह कोर्ट प्रशासन को एक ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें स्पष्ट रूप से समय और स्थान का उल्लेख करते हुए विस्फोट की धमकी दी गई थी। मेल में लिखा गया था कि ठीक एक बजे कोर्ट परिसर में पांच बम धमाके होंगे। यह सूचना मिलते ही पटना सिविल कोर्ट में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। न्यायाधीशों, वकीलों और आम लोगों को तत्काल परिसर से बाहर निकाला गया। बम निरोधक दस्ते और खोजी कुत्तों की मदद से पूरे परिसर की सघन जांच की गई। बताया जा रहा है कि यह छठी बार है जब पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। लगातार मिल रही धमकियों के कारण वकीलों में नाराजगी देखी गई। कई अधिवक्ताओं ने पुलिस प्रशासन से सवाल किया कि बार-बार धमकी मिलने के बावजूद दोषियों तक क्यों नहीं पहुंचा जा सका है। इस दौरान कुछ वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस भी हुई। अधिवक्ताओं का कहना था कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि न्यायिक कार्य प्रभावित न हो। इधर किशनगंज सिविल कोर्ट को भी इसी तरह की धमकी मिली। ईमेल में दावा किया गया कि जज चैंबर, वॉशरूम और अन्य स्थानों पर आरडीएक्स जैसे विस्फोटक लगाए गए हैं, जिन्हें रिमोट के माध्यम से विस्फोट किया जा सकता है। इस सूचना के बाद किशनगंज कोर्ट परिसर को भी खाली कराया गया और सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी। हालांकि समाचार लिखे जाने तक किसी भी स्थान से विस्फोटक बरामद होने की पुष्टि नहीं हुई है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ मुकेश चौधरी ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि ईमेल भेजे जाने के तुरंत बाद संबंधित ईमेल सेवा प्रदाता से संपर्क कर आईपी एड्रेस की जानकारी हासिल की जानी चाहिए। उनके अनुसार सामान्यतः आईपी एड्रेस प्राप्त करने में अधिक समय नहीं लगता। उन्होंने आशंका जताई कि धमकी देने वाला व्यक्ति आभासी निजी नेटवर्क या प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल कर सकता है, जिससे उसकी वास्तविक लोकेशन छिपी रह सके। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो तो जांच को केंद्रीय जांच एजेंसी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन तक भेजा जाना चाहिए। इस घटनाक्रम के कारण न्यायिक कार्य बाधित हुआ। पटना सिविल कोर्ट में पप्पू यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई निर्धारित थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से इसे स्थगित कर दिया गया। कोर्ट परिसर खाली कराए जाने के कारण अन्य कई मामलों की सुनवाई भी प्रभावित हुई। दिन भर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क रहीं और कोर्ट परिसर के आसपास कड़ी निगरानी रखी गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल की मदद ली जा रही है। ईमेल की तकनीकी जांच की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि संदेश कहां से भेजा गया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लगातार मिल रही धमकियों ने न्यायालय परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यायिक कार्यों में व्यवधान और बार-बार की अफरा-तफरी से वकील और आम लोग दोनों चिंतित हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और मामले की गहन जांच जारी है।


