January 7, 2026

आईआरसीटीसी घोटाले में लालू की याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई आज, आदेश को दी गई है चुनौती

नई दिल्ली/पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से जुड़े आईआरसीटीसी घोटाले में आज एक महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव आने वाला है। उनकी ओर से दायर याचिका पर आज 5 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। यह सुनवाई उस आदेश को चुनौती देने के संबंध में है, जिसमें निचली अदालत ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोप तय किए थे। इस मामले को राजनीतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है।
किस पीठ के समक्ष होगी सुनवाई
लालू यादव की याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा की एकल पीठ के समक्ष होगी। अदालत यह तय करेगी कि निचली अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया और उसके आधार कानूनी रूप से कितने उचित हैं। यह सुनवाई आगे की पूरी कानूनी दिशा को प्रभावित कर सकती है।
निचली अदालत के आदेश की पृष्ठभूमि
अक्टूबर 2025 में निचली अदालत ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोप तय किए थे। यह आदेश उस समय आया था जब अदालत ने यह माना कि प्रथम दृष्टया मामले में आरोप लगाने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है। इस आदेश के बाद लालू यादव ने इसे दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी और आरोपों को निराधार बताते हुए राहत की मांग की।
परिवार के अन्य सदस्यों पर भी आरोप
इस मामले में लालू यादव अकेले आरोपी नहीं हैं। उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तथा उनके बेटे और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के खिलाफ भी आरोप तय किए गए हैं। इन पर आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अदालत के अनुसार, इन सभी की भूमिका की जांच आरोप तय करने के स्तर पर पर्याप्त पाई गई थी।
मामला किस दौर से जुड़ा है
यह पूरा मामला उस समय से संबंधित है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम के अधीन आने वाले कुछ होटलों और उनसे जुड़ी जमीनों को नियमों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को पट्टे पर दिया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कुछ चुनिंदा कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
राउज़ एवेन्यू कोर्ट की टिप्पणी
आरोप तय करते समय राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) विशाल गोगने ने टिप्पणी की थी कि लालू प्रसाद यादव ने केंद्रीय रेल मंत्री के रूप में अपने पद का दुरुपयोग किया। अदालत ने यह भी माना कि भूमि निविदा प्रक्रिया में पात्रता शर्तों में कथित तौर पर हेरफेर किया गया और निर्णय प्रक्रिया में शीर्ष स्तर पर हस्तक्षेप हुआ।
सरकारी खजाने को नुकसान का आरोप
निचली अदालत के अनुसार, कथित साजिश के परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों को पूरी प्रक्रिया की जानकारी थी और उन्होंने जानबूझकर नियमों की अनदेखी की। इन्हीं तथ्यों के आधार पर आरोप तय किए गए थे, जिसे अब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
सीबीआई की एफआईआर और जांच
यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा 2017 में दर्ज की गई एफआईआर से जुड़ा है। इस एफआईआर में लालू यादव, उनके परिवार के सदस्यों, आईआरसीटीसी के कुछ अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया था। सीबीआई का दावा है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन कर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया।
लैंड फॉर जॉब मामला और ईडी की भूमिका
आईआरसीटीसी टेंडर घोटाले के साथ-साथ यह मामला तथाकथित लैंड फॉर जॉब प्रकरण से भी जुड़ा हुआ है। आरोप है कि रेलवे में नौकरियों के बदले जमीन ली गई। इस पहलू की जांच प्रवर्तन निदेशालय भी कर रहा है। ईडी की ओर से राबड़ी देवी समेत लालू परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है।
आज की सुनवाई का महत्व
आज की सुनवाई को इस पूरे मामले में बेहद अहम माना जा रहा है। यदि हाईकोर्ट निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाता है, तो इससे आरोपियों को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं यदि अदालत याचिका खारिज करती है, तो ट्रायल का रास्ता साफ हो जाएगा और निचली अदालत में आगे की कार्यवाही तेज हो सकती है।
राजनीतिक और कानूनी असर
इस मामले का असर केवल अदालत तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार की राजनीति पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ चल रहे मामलों पर विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों की नजरें टिकी रहती हैं। ऐसे में दिल्ली हाईकोर्ट का आज का फैसला न सिर्फ कानूनी दृष्टि से, बल्कि राजनीतिक रूप से भी काफी मायने रखता है। आईआरसीटीसी घोटाले में लालू प्रसाद यादव की याचिका पर आज होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि आगे की कानूनी लड़ाई किस दिशा में जाएगी। अदालत का रुख यह स्पष्ट करेगा कि आरोप तय करने की प्रक्रिया में कोई कानूनी कमी रही है या नहीं। आने वाले समय में यह मामला भारतीय राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

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