स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड पर सख्त होगी सरकार, एनएएसी, एनबीए या एनआईआरएफ से मान्यता प्राप्त संस्थाओं ही मिलेगा लाभ
पटना। बिहार सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी छात्र क्रेडिट कार्ड योजना को लेकर सख्ती बरतने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब इस योजना का लाभ केवल उन्हीं छात्र-छात्राओं को मिलेगा, जो मान्यता प्राप्त और मूल्यांकन वाली शैक्षणिक संस्थाओं में अध्ययन कर रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद, राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड या राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढांचा से मूल्यांकन प्राप्त संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को ही शिक्षा ऋण दिया जाएगा। यह नियम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रभावी होगा। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के कई निजी शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों की चिंता बढ़ गई है। अब तक ऐसे कई संस्थान थे, जिनका किसी भी मान्यता एजेंसी से मूल्यांकन नहीं हुआ था, फिर भी उनके छात्र इस योजना के तहत शिक्षा ऋण प्राप्त कर रहे थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे संस्थानों के विद्यार्थियों के लिए छात्र क्रेडिट कार्ड योजना के दरवाजे बंद हो जाएंगे।
योजना में बदलाव का कारण
राज्य सरकार का मानना है कि इस कदम से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। सरकार का कहना है कि बिना मूल्यांकन वाले संस्थानों में पढ़ाई की गुणवत्ता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। कई बार छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर नहीं मिल पाते। मान्यता प्राप्त संस्थानों से पढ़ाई करने पर छात्रों को न केवल बेहतर शिक्षा मिलेगी, बल्कि भविष्य में नौकरी और प्रशिक्षण के अवसर भी बढ़ेंगे। सरकार का यह भी तर्क है कि शिक्षा ऋण एक तरह से सरकारी संसाधनों का उपयोग है, इसलिए इसका लाभ उन्हीं छात्रों को मिलना चाहिए, जो गुणवत्तापूर्ण और मान्यता प्राप्त संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं।
भागलपुर में असर
भागलपुर जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र के प्रबंधक रवि रंजन के अनुसार, सरकार ने सभी शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अनिवार्य रूप से राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद, राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड और राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढांचा से अपना मूल्यांकन कराएं। उन्होंने बताया कि जिन संस्थानों की मूल्यांकन अवधि समाप्त होने वाली है, उन पर भी यह नियम लागू होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई संस्थान समय पर मूल्यांकन नहीं कराता है, तो उसका नाम छात्र क्रेडिट कार्ड योजना के आवेदन पोर्टल से हटा दिया जाएगा। ऐसे संस्थानों के छात्र फिर इस योजना के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे।
अब तक की स्थिति
अब तक भागलपुर जिले के कई निजी शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों के छात्र इस योजना का लाभ ले रहे थे। इनमें नर्सिंग, बीएड और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्र शामिल हैं। कई संस्थानों का किसी भी मान्यता एजेंसी से मूल्यांकन नहीं हुआ था, इसके बावजूद छात्र शिक्षा ऋण प्राप्त कर रहे थे। सरकार की नई व्यवस्था से ऐसे संस्थानों और उनके छात्रों पर सीधा असर पड़ेगा।
छात्रों और अभिभावकों की चिंता
नई व्यवस्था की जानकारी सामने आने के बाद छात्रों और उनके अभिभावकों में चिंता का माहौल है। कई छात्र ऐसे संस्थानों में पढ़ रहे हैं, जहां मूल्यांकन की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हुई है। उन्हें डर है कि यदि समय रहते संस्थान को मान्यता नहीं मिली, तो उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ सकती है या फिर शिक्षा ऋण के बिना पढ़ाई जारी रखनी होगी। वहीं कुछ अभिभावकों का कहना है कि सरकार का फैसला सही है, लेकिन इसे लागू करने से पहले छात्रों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि जो छात्र पहले से दाखिला ले चुके हैं, उनके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए।
निजी संस्थानों पर दबाव
सरकार के इस फैसले के बाद निजी शैक्षणिक संस्थानों पर भी दबाव बढ़ गया है। निर्देश के अनुसार, फरवरी महीने में निजी संस्थानों को मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिन संस्थानों का मूल्यांकन नहीं हो पाएगा, उन्हें विभाग की नई वेबसाइट पर अपनी आत्म-मूल्यांकन रिपोर्ट अपलोड करनी होगी। इसके बाद इन संस्थानों को अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण कोड जारी किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और इससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा। जो संस्थान गुणवत्ता पर खरे उतरेंगे, वही आगे चलकर छात्रों को आकर्षित कर पाएंगे।
सरकार की मंशा
राज्य सरकार का मानना है कि इस सख्ती से शिक्षा क्षेत्र में अनुशासन आएगा। बिना आधारभूत सुविधाओं और गुणवत्ता के चल रहे संस्थानों पर अंकुश लगेगा। साथ ही छात्र भी अब दाखिला लेते समय संस्थान की मान्यता और मूल्यांकन पर ध्यान देंगे। सरकार का यह भी दावा है कि मान्यता प्राप्त संस्थानों से पढ़ाई करने वाले छात्रों को आगे चलकर रोजगार, प्रशिक्षण और उच्च शिक्षा में बेहतर अवसर मिलेंगे। इससे छात्र क्रेडिट कार्ड योजना का उद्देश्य भी सही मायनों में पूरा हो सकेगा।
आगे की राह
नई व्यवस्था लागू होने में अभी समय है, लेकिन इसके संकेत साफ हैं। छात्रों, अभिभावकों और संस्थानों को समय रहते तैयारी करनी होगी। सरकार की यह पहल भले ही सख्त दिखे, लेकिन लंबे समय में इससे शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


