डॉ अखिलेश सिंह के चक्रव्यूह में फंसकर बैक फुट पर नीतीश सरकार, स्मार्ट मीटर में पुश बटन, सीएम से लेकर डीएम तक एलर्ट मोड में
- बिहार कांग्रेस के पदयात्रा से पहुंची पहली चोट, राजद से जगदानंद सिंह ने भी कर दिया आक्रमण, स्मार्ट मीटर पर सरकार बेहाल
- राज्य की नीतीश सरकार की दुखती रग पर पहली बार विपक्षी गठबंधन का तीव्र प्रभाव, मुख्यमंत्री को खुद उतरना पड़ा बचाव में,पूरा सिस्टम लग गया क्षतिपूर्ति में
पटना। बिहार में लंबे अर्से से सीएम नीतीश कुमार के अचूक राजनीतिक रणकुशलता के सामने विपक्ष को हमेशा से मुंह की खानी पड़ती थी। मगर इस बार बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह ने कुछ इस प्रकार से चक्रव्यूह रचा। जिसमें राज्य की नीतीश सरकार बैक फुट पर आती नजर आयी। स्मार्ट प्रीपेड मीटर के खिलाफ जबर्दस्त तरीके से जन आंदोलन का आगाज कर प्रदेश कांग्रेस तथा बाद में राज्य के मुख्य विपक्षी दल राजद ने नीतीश सरकार की चूलें दिला दी। स्मार्ट प्रीपेड मीटर के खिलाफ बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह के दिशा-निर्देश में 19 सितंबर को पटना के सप्त शहीद स्मारक से कांग्रेसियों के एक जत्थे ने पदयात्रा आरंभ किया था। 125 किलोमीटर की दूरी तय कर बोधगया में 25 सितंबर को यह यात्रा समाप्त हुआ।इस पदयात्रा ने सबसे पहले सरकार को स्मार्ट प्रीपेड मीटर के मुद्दे पर चोट पहुंचाई। जिस दिन 25 सितंबर को बोधगया में इस पदयात्रा की समाप्ति थी।उसी दिन राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने भी पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्मार्ट मीटर के खिलाफ प्रदेश स्तर पर धरना -प्रदर्शन करने की घोषणा की। इसके साथ ही बिहार में स्मार्ट प्रीपेड मीटर के खिलाफ कांग्रेस- राजद की आंदोलन की शुरुआत हो गई। जिसका नतीजा यह रहा की स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर खुद सीएम नीतीश कुमार को सामने आना पड़ा।उन्होंने 27 सितंबर को बयान जारी कर कहा कि स्मार्ट मीटर के नाम पर विपक्ष भ्रम फैला रहा है।इतना ही नहीं तुरंत विभागीय समीक्षा बैठक,जिसका नेतृत्व सीएम नीतीश कुमार ने किया, आयोजित की गई।ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को फरमान जारी किया गया कि स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर आम जनता को ठीक से समझाएं।जिलों के डीएम तक को टास्क दिया गया कि स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर जागरूकता फैलाएं।राज्य के नीतीश सरकार ने विभिन्न संचार माध्यमों के बदौलत स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर खुद को घिरते देख अपना पक्ष रखना आरंभ किया। बड़ी बात तो यह है कि विपक्षी आंदोलन की गोलबंदी का असर यह हुआ कि स्मार्ट मीटर के तकनीकी खामियों को लेकर सरकार सजग हुई।तुरंत से पुश बटन का ईजाद कर लिया गया।जिससे बैलेंस रिचार्ज करने के बाद तथाकथित रूप से बिजली चले जाने की समस्याओं को दूर करने के बाद की गई।इतना ही नहीं बैलेंस समाप्त होते ही बिजली कटने की समय अवधि को लेकर भी ऊर्जा विभाग ने जनता के बीच जाकर नए वादे आरंभ करना शुरू कर दिए।दरअसल स्मार्ट प्रीपेड मीटर बिहार के नीतीश सरकार की दुखती रग थी।जिसे बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ अखिलेश सिंह ने भांप लिया था।इस दुखती रग पर हाथ रखते ही राज्य की नीतीश सरकार पशोपेश में पड़ गई।राजद-कांग्रेस के मुखर विरोध के बाद बिहार में स्मार्ट मीटर को लेकर राजनीतिक विवाद तेजी से बढ़ना आरम्भ हुआ। प्रदेश कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी मोहन प्रकाश तथा प्रदेश अध्यक्ष डॉ अखिलेश सिंह ने 26 सितंबर को स्मार्ट मीटर को लेकर खुलासा करते हुए कहा कि यह अडानी के खजाने को भरने के लिए नरेंद्र मोदी-नीतीश सरकार की संयुक्त महा लूट योजना है।वहीं दूसरी ओर राजद ने विरोध करते हुए स्मार्ट मीटर को ‘चीटर’ बताया। जब ऊर्जा मंत्री विजेंद्र यादव से मामला नहीं संभलने लगा।तो सीएम नीतीश कुमार खुद फ्रंट फुट पर आए तथा उनके निर्देश पर राज्य के उपमुख्यमंत्रियों ने भी कमान संभाली। साथ ही सभी जिलों के डीएम को स्मार्ट मीटर के लाभ समझाने का टास्क दे दिया गया। बिहार प्रदेश कांग्रेस की रणनीति के तहत 2 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक प्रदेश के सभी जिलों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर के खिलाफ जन जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। वहीं आगामी 16 अक्टूबर को राज्यस्तरीय व्यापक धरना -प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।इधर राजद की ओर से भी गत 1 अक्टूबर को राज्य स्तर पर प्रखंड मुख्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। जिसका सरकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता भी दिखा। बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ अखिलेश सिंह आगामी 16 अक्टूबर को प्रदेश स्तर पर राज्य सरकार के ईंट से ईंट बजा देने के संकल्प को लेकर जबरदस्त जन आंदोलन की तैयारी में लगे हुए हैं। फिलहाल स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर राज्य के नीति सरकार ने ऐलान किया है कि सरकार स्मार्ट प्रीपेड मीटर को किसी सूरत में नहीं हटाएगी। लेकिन जिस प्रकार से विपक्ष के द्वारा सरकार को इस मुद्दे पर कम दर कदम धकेला जा रहा है। उसे लेकर यह कहना मुश्किल है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर राज्य के नीति से सरकार का भविष्य में रुख क्या होगा?


