आप का बीजेपी पर हमला, कहा- वोट चोरी के लिए दूसरे शहरों से टिकट देकर लोग बिहार भेजे गए, तभी बढ़ी वोटिंग
नई दिल्ली/पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में हुई रिकॉर्डतोड़ वोटिंग ने राज्य की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार मतदान प्रतिशत पिछले 75 वर्षों के इतिहास में सबसे अधिक दर्ज किया गया। जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल इसे जनता के विश्वास का प्रतीक बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे सत्ता विरोधी लहर का परिणाम मान रहा है। इसी बीच आम आदमी पार्टी (आप) ने इस ऐतिहासिक वोटिंग पर नया विवाद खड़ा कर दिया है। पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि “यह रिकॉर्ड वोटिंग नहीं, बल्कि वोट चोरी का संगठित प्रयास है।”
आप का आरोप — “भाजपा ने दूसरे राज्यों से वोटरों को बिहार भेजा”
आम आदमी पार्टी के दिल्ली संयोजक और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने एक वीडियो साझा कर दावा किया कि भाजपा ने बाहरी वोटरों को संगठित तरीके से बिहार भेजा। उन्होंने कहा कि “भाजपा ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित कई राज्यों से अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को ट्रेन टिकट देकर बिहार पहुंचाया ताकि वे यहां मतदान कर सकें।” सौरभ भारद्वाज द्वारा साझा किए गए वीडियो में कुछ लोगों को गले में भाजपा का पटका पहने देखा जा सकता है, जो खुद को “बिहार में वोट देने जा रहे” बता रहे हैं। वीडियो में ये लोग कह रहे हैं कि “हमें टिकट की व्यवस्था भाजपा की ओर से कराई गई है।” भारद्वाज ने इस वीडियो के साथ लिखा, “भाजपा के करनाल जिला अध्यक्ष रेलवे स्टेशन पर मौजूद हैं। उन्होंने खुद इन वोटरों को रवाना किया। भाजपा ने संगठित तरीके से वोटरों को चिन्हित किया और उन्हें चुनाव के दौरान बिहार भेजा। यही वजह है कि इस बार बिहार में रिकॉर्ड वोटिंग हुई।”
“एसआईआर के माध्यम से हुई वोटर पहचान में हेराफेरी”
सौरभ भारद्वाज ने आगे दावा किया कि भाजपा ने एसआईआर (स्पेशल इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन) सिस्टम के तहत पहले से ही अपने समर्थक वोटरों की पहचान कर ली थी और उनकी वोट सूची में कोई कटौती नहीं होने दी। इसके बाद, उन्हीं चिन्हित लोगों को बिहार भेजने का इंतजाम किया गया ताकि मतदान प्रतिशत बढ़े और नतीजों को प्रभावित किया जा सके। उन्होंने कहा कि “यह सिर्फ वोटिंग नहीं, बल्कि लोकतंत्र के साथ धोखाधड़ी है। भाजपा ने यह दिखाने की कोशिश की कि जनता उनके पक्ष में है, जबकि हकीकत यह है कि वोटिंग में बाहरी लोगों की भागीदारी हुई है।” भारद्वाज ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को इस मामले की जांच करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी राज्य के नागरिक को बिना वैध मतदाता पहचान के दूसरे राज्य में मतदान की अनुमति न दी जाए।
वीडियो से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
भारद्वाज के इस बयान और वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। आम आदमी पार्टी ने इसे “सिस्टमेटिक वोट चोरी” करार दिया है, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को “झूठ और अफवाहों पर आधारित” बताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि “आम आदमी पार्टी अपनी राजनीतिक जमीन खोजने के लिए निराधार आरोप लगा रही है। बिहार में रिकॉर्ड वोटिंग जनता के विश्वास की जीत है, न कि किसी साजिश का परिणाम।” भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि “वीडियो में दिखाई देने वाले लोग पार्टी कार्यकर्ता हो सकते हैं, लेकिन उनका मतदान से कोई संबंध नहीं है। वे चुनाव प्रचार या प्रबंधन से जुड़े हो सकते हैं। आप पार्टी चुनावी माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही है।”
चुनाव आयोग से जांच की मांग
आम आदमी पार्टी ने इस पूरे प्रकरण को लेकर चुनाव आयोग को पत्र लिखने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि अगर भाजपा द्वारा बाहरी वोटरों को लाने का आरोप सही साबित होता है, तो यह “लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला” होगा। भारद्वाज ने कहा कि “हम चुनाव आयोग से अनुरोध करेंगे कि वह इस मामले की जांच करे। सीसीटीवी फुटेज, रेलवे टिकट रिकॉर्ड और स्टेशन से जुड़े डेटा को देखा जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि “भाजपा का यह कदम सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में अन्य राज्यों में भी इसी तरीके से चुनावों को प्रभावित करने की रणनीति हो सकती है।”
रिकॉर्ड वोटिंग पर उठे सवाल
बिहार में पहले चरण के मतदान के दौरान 60 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज हुआ, जो पिछले कई दशकों में सबसे ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ा हुआ मतदान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संकेत देता है। जहां एनडीए इसे “जनता के समर्थन” के रूप में पेश कर रहा है, वहीं विपक्षी दल इसे “परिवर्तन की लहर” कह रहे हैं। अब आम आदमी पार्टी का यह नया आरोप इस बहस में तीसरा आयाम जोड़ता है। यदि यह दावा सही होता है, तो यह चुनाव की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है। हालांकि अभी तक न तो चुनाव आयोग और न ही किसी स्वतंत्र संस्था ने इन आरोपों की पुष्टि की है। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की रिकॉर्ड वोटिंग ने राज्य की राजनीति में नई दिशा दी है, लेकिन आम आदमी पार्टी के आरोपों ने इसके पीछे की पारदर्शिता पर साया डाल दिया है। जहां भाजपा इसे जनता के भरोसे की जीत बता रही है, वहीं आप का दावा है कि यह “प्रबंधन की सफलता नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी धांधली” है। अब निगाहें चुनाव आयोग पर हैं, जो तय करेगा कि यह मामला मात्र राजनीतिक बयानबाजी है या इसके पीछे कोई ठोस साक्ष्य मौजूद हैं। बिहार की राजनीति में यह विवाद अब चुनावी परिणामों जितना ही चर्चित विषय बन गया है — क्योंकि सवाल सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की साख का भी है।


