युद्ध के बीच भारत को राहत, कच्चे तेल और गैस से लदे जहाज सुरक्षित पहुंचे मुंद्रा और वडिनार बंदरगाह

  • होर्मुज जलडमरूमध्य से जारी है सीमित आवाजाही, भारतीय टैंकर ‘जग लाडकी’ लेकर पहुंचा 80 हजार टन कच्चा तेल
  • ईरान-अमेरिका तनाव से वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल, कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार

नई दिल्ली। एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर ‘जग लाडकी’ संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह बंदरगाह से कच्चा तेल लेकर सुरक्षित रूप से गुजरात के मुंद्रा स्थित अदाणी बंदरगाह पहुंच गया है। इस जहाज पर लगभग 80,886 मीट्रिक टन, यानी करीब 5.8 से 6 लाख बैरल कच्चा तेल लदा हुआ है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार भारत में प्रतिदिन लगभग 5.5 से 5.6 मिलियन बैरल कच्चे तेल की खपत होती है। ऐसे में इस तरह की आपूर्ति देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे पहले भी भारतीय जहाज ‘नंदा देवी’ वडिनार बंदरगाह पर पहुंचा था, जिसमें करीब 46,500 मीट्रिक टन द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस लाई गई थी। वहीं ‘शिवालिक’ नामक जहाज भी मुंद्रा बंदरगाह पर लगभग 46 हजार मीट्रिक टन गैस लेकर पहुंचा, जो करीब 32 लाख से अधिक घरेलू गैस सिलेंडरों के बराबर है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से जारी सीमित आवाजाही
पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार अब तक करीब 90 जहाज इस रास्ते से गुजर चुके हैं, जिनमें तेल टैंकर भी शामिल हैं। हालांकि सुरक्षा कारणों से कई जहाज बिना सार्वजनिक जानकारी के चुपचाप इस मार्ग से गुजर रहे हैं। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति होती है। भारत सहित कई देशों के लिए यह मार्ग ऊर्जा सुरक्षा का प्रमुख आधार है।
ईरान-अमेरिका टकराव से बढ़ा तनाव
इसी बीच ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने इजराइल की राजधानी तेल अवीव समेत 100 से अधिक स्थानों पर मिसाइल हमला किया है। ईरान का दावा है कि यह कार्रवाई उसके वरिष्ठ नेताओं की मौत का बदला लेने के लिए की गई है। वहीं अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित बनाने के प्रयास में ईरानी ठिकानों पर भारी बमबारी की है। अमेरिकी सेना ने लगभग 2200 किलोग्राम वजन वाले बमों का इस्तेमाल किया, जो जमीन के भीतर बने ठिकानों को भी नष्ट करने में सक्षम हैं।
वैश्विक राजनीति और नेतृत्व में बदलाव
इस संघर्ष के दौरान ईरान के कई बड़े नेताओं की मौत की खबर सामने आई है। इसके बाद देश में नेतृत्व को लेकर भी बदलाव हुआ है। विशेषज्ञों की बैठक के बाद नए शीर्ष नेतृत्व का चयन किया गया है, जो देश के राजनीतिक और रणनीतिक फैसलों में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में राष्ट्रपति मसूद पजश्कियान भी संकट के समय प्रशासन संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। अमेरिका ने अन्य देशों से अपील की है कि वे मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने में सहयोग करें, ताकि तेल की कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार कठिन परिस्थितियों के बावजूद ईरान ने मार्च से अब तक 1.6 करोड़ बैरल से अधिक तेल बेच लिया है, जिसमें चीन उसका सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंधों और संघर्ष के बावजूद ईरान अपनी ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने में सफल रहा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का सुचारू बने रहना राहत की बात है, लेकिन वैश्विक स्तर पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस संकट का असर और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।