मोतिहारी में फिर जहरीली शराब से चार लोगों की मौत, 15 की हालत गंभीर, 6 की गई आंखों की रोशनी
मोतिहारी। बिहार में शराबबंदी के बावजूद जहरीली शराब का काला कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी से सामने आया है, जहां जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 15 लोग गंभीर रूप से बीमार हैं। इनमें से कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है।
घटना की शुरुआत और फैलाव
मामला रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा गांव से शुरू हुआ, जहां बुधवार शाम कुछ लोगों ने शराब का सेवन किया था। शुरुआत में किसी को कोई विशेष परेशानी महसूस नहीं हुई, लेकिन कुछ घंटों बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। धीरे-धीरे यह मामला आसपास के इलाकों तक फैल गया और कई लोग बीमार पड़ गए। गुरुवार सुबह से ही मौतों का सिलसिला शुरू हो गया। सबसे पहले तुरकौलिया थाना क्षेत्र के पुलवा घाट निवासी चंदू की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई। इसके बाद अलग-अलग समय पर अन्य लोगों की जान चली गई। शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान परीक्षण मांझी और हीरालाल महतो ने भी दम तोड़ दिया।
बीमारों की हालत और इलाज
बीमार लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, कई मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर भी किया गया है। सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अनूप गौतम ने बताया कि अब तक कई मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं, जिनमें से कुछ की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई है। पीड़ितों ने बताया कि शराब पीने के कुछ समय बाद उन्हें धुंधला दिखाई देने लगा। एक मरीज ने कहा कि उसे सब कुछ हरा-हरा नजर आने लगा था। इसके बाद उल्टी, बेचैनी और तेज दर्द की शिकायत शुरू हो गई। कई लोगों को रात भर में ही हालत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाना पड़ा।
आंखों की रोशनी पर असर
इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि करीब छह से सात लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है। डॉक्टरों के मुताबिक, जहरीली शराब में मौजूद खतरनाक रसायन सबसे पहले आंखों और दिमाग पर असर डालते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह नुकसान स्थायी भी हो सकता है।
प्रशासन की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गए। प्रभावित लोगों की पहचान कर उन्हें अस्पताल भेजा गया। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया है, जिसमें पुलिस के साथ तकनीकी और खुफिया इकाइयों के अधिकारी भी शामिल हैं। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी नागा राय को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। इसके अलावा छह अन्य संदिग्ध तस्करों को भी पकड़ा गया है। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि जहरीली शराब कहां से लाई गई और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। वहीं, लापरवाही के आरोप में एक चौकीदार को निलंबित भी कर दिया गया है।
परिजनों का आरोप और मामला दर्ज
मृतक प्रमोद यादव के परिजनों ने इस घटना को हत्या बताते हुए थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। उनका कहना है कि जानबूझकर जहरीली शराब बेची गई, जिससे उनके परिजन की मौत हुई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है।
जहरीली शराब कैसे बनती है
विशेषज्ञों के अनुसार, अवैध शराब बनाने के दौरान उसमें खतरनाक रसायन मिलाए जाते हैं। अक्सर इसमें यूरिया और अन्य रासायनिक तत्व मिलाकर मिथाइल एल्कोहल यानी मेथेनॉल तैयार हो जाता है। यही पदार्थ शराब को जहरीला बना देता है। जब यह जहरीला तत्व शरीर में पहुंचता है, तो वह धीरे-धीरे जहर में बदल जाता है। पहले यह आंखों और मस्तिष्क पर असर डालता है, जिससे व्यक्ति को दिखना बंद हो सकता है। इसके बाद शरीर के अन्य अंग भी काम करना बंद कर देते हैं और अंततः मौत हो जाती है।
बढ़ती चिंता और चुनौती
इस घटना ने एक बार फिर बिहार में शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि अवैध शराब का नेटवर्क अभी भी सक्रिय है और लोगों की जान जोखिम में डाल रहा है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस अवैध कारोबार को पूरी तरह खत्म करने की है। वहीं, डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी ने शराब पी है और तबीयत बिगड़ती है, तो बिना डर के तुरंत अस्पताल पहुंचें, क्योंकि समय पर इलाज ही जान बचा सकता है।


