7 फरवरी को होगा बिहार विधानसभा का स्थापना दिवस समारोह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला लेंगे हिस्सा
पटना। बिहार विधानसभा का स्थापना दिवस आगामी 7 फरवरी को पूरे गरिमा और भव्यता के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर विधानसभा परिसर में विशेष समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश और राज्य के कई प्रमुख नेता शामिल होंगे। कार्यक्रम को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं और विधानसभा सचिवालय की ओर से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। स्थापना दिवस समारोह की जानकारी सदन की कार्यवाही के दौरान विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि 7 फरवरी को होने वाले इस विशेष कार्यक्रम में ओम बिरला मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसके साथ ही हरिवंश भी समारोह में शिरकत करेंगे। स्पीकर ने यह भी बताया कि नेभा योजना के उद्घाटन के लिए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का भी आगमन प्रस्तावित है। प्रेम कुमार ने सदन को अवगत कराया कि इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दोनों उपमुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष तथा बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष भी मौजूद रहेंगे। उन्होंने सभी विधायकों से आग्रह किया कि वे इस ऐतिहासिक मौके पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें, ताकि स्थापना दिवस समारोह को सामूहिक सहभागिता के साथ सफल बनाया जा सके। विधानसभा अध्यक्ष के अनुसार यह कार्यक्रम लगभग तीन घंटे का होगा। समारोह की शुरुआत सुबह साढ़े दस बजे की जाएगी और दोपहर करीब डेढ़ बजे तक कार्यक्रम संपन्न हो जाएगा। इस दौरान अतिथियों के संबोधन, विधानसभा के इतिहास पर आधारित प्रस्तुतियां और विशेष सत्र आयोजित किए जाने की संभावना है। स्थापना दिवस को लेकर विधानसभा परिसर को सजाया जा रहा है और सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की जा रही है। बिहार विधानसभा का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। इसकी जड़ें 22 मार्च 1912 से जुड़ी मानी जाती हैं, जब बिहार-उड़ीसा को बंगाल से अलग कर एक स्वतंत्र प्रांत का दर्जा दिया गया था। इसके बाद 7 फरवरी 1921 को सर वाल्टर मोरे की अध्यक्षता में निर्वाचित प्रांतीय परिषद की पहली बैठक आयोजित हुई थी। यही दिन बाद में बिहार विधानसभा के स्थापना दिवस के रूप में मान्यता प्राप्त कर गया। तब से लेकर आज तक विधानसभा ने राज्य के लोकतांत्रिक विकास में अहम भूमिका निभाई है। विधानसभा सचिवालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार स्थापना दिवस समारोह के दौरान बिहार की संसदीय परंपराओं, विधायी उपलब्धियों और लोकतांत्रिक मूल्यों को रेखांकित किया जाएगा। साथ ही आधुनिक तकनीक आधारित नेभा योजना के उद्घाटन से विधायी कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी व डिजिटल बनाने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाया जाएगा। राजनीतिक हलकों में भी इस कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी दलों के विधायक भी इसे लोकतंत्र के उत्सव के रूप में देखने की बात कह रहे हैं। कई वरिष्ठ विधायकों का मानना है कि स्थापना दिवस केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह बिहार की विधायी यात्रा और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों को याद करने का अवसर है। सूत्रों के अनुसार समारोह में बिहार विधानसभा के ऐतिहासिक पड़ावों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जा सकती है, जिसमें पुराने दस्तावेज, तस्वीरें और महत्वपूर्ण विधायी क्षणों को दर्शाया जाएगा। इससे युवा पीढ़ी को राज्य की संसदीय विरासत से परिचित कराने में मदद मिलेगी। 7 फरवरी को होने वाला बिहार विधानसभा स्थापना दिवस समारोह न केवल एक औपचारिक आयोजन होगा, बल्कि यह बिहार के लोकतांत्रिक इतिहास, विधायी परंपराओं और भविष्य की दिशा को रेखांकित करने वाला महत्वपूर्ण अवसर भी बनेगा। देश और राज्य के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी से कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।


