January 16, 2026

बिहार मई में शुरू होगा जनगणना का प्रथम चरण, गृह मंत्रालय की अधिसूचना जारी, 2027 में दूसरा चरण

पटना। बिहार में लंबे समय से प्रतीक्षित जनगणना की प्रक्रिया को लेकर अब स्थिति साफ होने लगी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिसके बाद राज्य में जनगणना के पहले चरण की तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार बिहार में जनगणना का प्रथम चरण मई महीने से शुरू हो सकता है, जबकि दूसरा और मुख्य चरण वर्ष 2027 में आयोजित किया जाएगा। यह प्रक्रिया न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य की योजनाओं और नीतियों की नींव भी इसी पर टिकी होती है।
पहला चरण: मकानों और संरचनाओं की गिनती
जनगणना के पहले चरण में मकानों, इमारतों और संरचनाओं की गिनती की जाएगी। इस दौरान हर मकान को चिन्हित कर उसकी नंबरिंग की जाएगी और यह दर्ज किया जाएगा कि उसमें लोग रहते हैं या वह बंद है। जिन मकानों में परिवार निवास कर रहे हैं, उनकी बुनियादी जानकारी प्रगणक एकत्र करेंगे। वहीं जो मकान तालेबंद मिलेंगे, उन्हें भी अलग श्रेणी में दर्ज कर पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इस चरण का उद्देश्य राज्य में आवासीय ढांचे और बसावट की एक सटीक तस्वीर तैयार करना है।
मई में संभावित शुरुआत के पीछे की वजह
पहले चरण को मई में शुरू करने पर इसलिए विचार किया जा रहा है क्योंकि बिहार बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा फरवरी की शुरुआत में और मैट्रिक परीक्षा फरवरी के मध्य में होती है। इन परीक्षाओं के मूल्यांकन और परिणाम जारी करने में आमतौर पर अप्रैल तक का समय लग जाता है। चूंकि जनगणना कार्य में बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है, इसलिए परीक्षा और मूल्यांकन कार्य के बाद ही उन्हें इस जिम्मेदारी में लगाया जा सकेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए मई महीने को व्यावहारिक समय माना जा रहा है।
अंतिम निर्णय राज्य समन्वय समिति लेगी
हालांकि मई में शुरुआत को लेकर चर्चा तेज है, लेकिन अंतिम तारीख तय करने का अधिकार राज्य स्तर की समन्वय समिति के पास होगा। बिहार जनगणना कार्य निदेशालय के निदेशक एम. रामचंद्रुडु के अनुसार, पहले चरण की शुरुआत को लेकर राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समन्वय समिति की बैठक होगी। इसी बैठक में यह तय किया जाएगा कि मकान गणना का काम किस तारीख से शुरू किया जाए, ताकि प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों में संतुलन बना रहे।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार जनगणना के पहले चरण का कार्य 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच पूरा किया जाना है। इस अवधि के भीतर राज्यों को मकान और संरचना गणना का काम समाप्त करना होगा। वहीं दूसरा चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ी विस्तृत व्यक्तिगत जानकारी एकत्र की जाएगी। इस चरण में जनसंख्या से जुड़े सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक आंकड़े जुटाए जाएंगे।
गांव आने की जरूरत नहीं, डिजिटल व्यवस्था पर जोर
जनगणना की इस बार की प्रक्रिया में तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है। यदि कोई व्यक्ति अपने गांव या स्थायी निवास स्थान से बाहर है, तो उसके लिए गांव लौटना जरूरी नहीं होगा। वह सेल्फ एन्यूमरेशन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी खुद दर्ज कर सकेगा। पोर्टल पर लॉगिन करने के लिए राज्य, जिला, घर के मुखिया का नाम, मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी दर्ज करनी होगी। इसके बाद ओटीपी के जरिए सत्यापन होगा और लॉगिन के बाद आवश्यक विवरण भरे जा सकेंगे।
गूगल मैप और फोटो अपलोड की व्यवस्था
सेल्फ एन्यूमरेशन की प्रक्रिया में घर की पहचान को सटीक बनाने के लिए गूगल मैप का भी सहारा लिया जाएगा। जानकारी भरने के बाद संबंधित मकान की तस्वीर को गूगल मैप के माध्यम से चयन कर पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इससे मकानों की पहचान और लोकेशन को लेकर किसी भी तरह की त्रुटि की संभावना कम हो जाएगी। यह व्यवस्था खास तौर पर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उपयोगी मानी जा रही है।
ट्रायल पूरा, अब राज्यव्यापी तैयारी
जनगणना के पहले चरण का ट्रायल बिहार के तीन जिलों में पहले ही पूरा किया जा चुका है। सारण जिले के सोनपुर, नवादा जिले के रजौली और सीतामढ़ी जिले के डुमरा में इस प्रणाली का सफल परीक्षण किया गया है। ट्रायल के अनुभवों के आधार पर पोर्टल और प्रक्रिया में जरूरी सुधार किए गए हैं, ताकि राज्यभर में काम सुचारु रूप से हो सके।
शिक्षकों की होगी अहम भूमिका
जनगणना कार्य में प्रगणक के रूप में मुख्य रूप से शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। अनुमान है कि पूरे बिहार में करीब 2.15 लाख शिक्षकों की जरूरत पड़ेगी। एक प्रगणक को औसतन 700 से 800 लोगों या फिर 150 से 180 मकानों की गणना करनी होगी। इस पूरे कार्य की निगरानी के लिए हर छह प्रगणकों पर एक प्रेक्षक नियुक्त किया जाएगा। इस तरह करीब 35 हजार प्रेक्षकों की तैनाती की जाएगी।
मानदेय और जिम्मेदारी
जनगणना कार्य में लगे प्रगणकों को कुल 25 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। इसमें पहले चरण के लिए 9 हजार रुपये और दूसरे चरण के लिए 16 हजार रुपये निर्धारित किए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि यह मानदेय शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। साथ ही डिजिटल व्यवस्था के कारण काम पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और सटीक होने की उम्मीद है। बिहार में जनगणना का यह चरणबद्ध आयोजन न केवल आंकड़ों के संकलन की प्रक्रिया है, बल्कि यह राज्य के विकास की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम भी है। मई में संभावित शुरुआत और 2027 में दूसरे चरण के साथ यह पूरी प्रक्रिया आने वाले वर्षों की नीतियों और योजनाओं का आधार बनेगी। तकनीक, शिक्षकों की भागीदारी और प्रशासनिक समन्वय के जरिए इस बार की जनगणना को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है।

You may have missed