पटना में नकली दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़, मकान में चल रहा था धंधा, आठ लाख की नकली दवाएं बरामद
पटना। राजधानी पटना में नकली दवाओं के अवैध कारोबार का एक बड़ा मामला सामने आया है। रामकृष्णा नगर थाना क्षेत्र में रविवार देर रात औषधि नियंत्रण प्रशासन ने छापेमारी कर एक निजी मकान में चल रही नकली दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई में करीब आठ लाख रुपये मूल्य की नकली दवाएं, दवा के रैपर, नामी कंपनियों के लेबल और दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें बरामद की गई हैं। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है।
मकान में चल रही थी अवैध फैक्ट्री
औषधि नियंत्रण विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि रामकृष्णा नगर इलाके के एक मकान में अवैध रूप से दवाओं का निर्माण किया जा रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद टीम ने रविवार रात छापेमारी की। मौके पर पहुंचने पर पाया गया कि एक सामान्य दिखने वाले मकान के अंदर पूरी तरह से दवा बनाने का सेटअप तैयार किया गया था। मशीनों के जरिए नकली दवाओं की पैकिंग की जा रही थी और नामी कंपनियों के लेबल लगाए जा रहे थे, ताकि इन्हें असली दवाओं के रूप में बाजार में खपाया जा सके।
मुख्य आरोपी की पहचान
अधिकारियों के अनुसार इस रैकेट का मुख्य आरोपी सुनील कुमार झा है, जो इस नकली दवा फैक्ट्री का संचालन कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि यह अवैध फैक्ट्री ‘विभा बायोटेक’ नाम से संचालित हो रही थी। सुनील कुमार झा के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है और फैक्ट्री को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है।
किस तरह की दवाएं बनाई जा रही थीं
ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि इस फैक्ट्री में गैस, कफ, दर्द, बुखार और त्वचा संबंधी बीमारियों की नकली दवाएं बनाई जा रही थीं। बरामद दवाओं में लिव 52 कफ सिरप, इबुजेसिक प्लस सिरप और कॉस्ग्लो न्यू क्रीम जैसी दवाएं शामिल हैं, जो आम तौर पर मरीजों द्वारा बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जाती हैं। इन दवाओं की नकली पैकिंग इतनी पेशेवर तरीके से की गई थी कि आम आदमी के लिए असली और नकली में फर्क कर पाना बेहद मुश्किल था।
ग्रामीण इलाकों में था बड़ा नेटवर्क
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि यह नकली दवा रैकेट मुख्य रूप से बिहार के ग्रामीण इलाकों में सक्रिय था। सुनील कुमार झा ने सैकड़ों लोगों को मार्केटिंग और सप्लाई के काम में लगा रखा था। ये लोग ग्रामीण जिलों में दुकानों और छोटे मेडिकल स्टोरों पर सस्ती दवाओं का लालच देकर नकली दवाएं सप्लाई करते थे। इस नेटवर्क के जरिए पटना के अलावा पूर्णिया, मधेपुरा, दरभंगा, समस्तीपुर, गोपालगंज, सहरसा और सिवान जैसे जिलों में नकली दवाओं की आपूर्ति की जा रही थी।
स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़
प्रशासन का कहना है कि इस तरह की नकली दवाओं से लोगों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा था। ग्रामीण इलाकों में पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है और ऐसे में नकली दवाएं मरीजों की हालत और बिगाड़ सकती हैं। कई मामलों में गलत दवाओं के सेवन से बीमारी बढ़ने या गंभीर दुष्प्रभाव होने का खतरा रहता है। इस रैकेट के जरिए बड़ी संख्या में लोगों की जान जोखिम में डाली जा रही थी।
कई एजेंसियां जांच के दायरे में
ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि इस मामले में लगभग आधा दर्जन दवा एजेंसियां और फार्मा कंपनियां भी जांच के दायरे में हैं। आशंका है कि कुछ एजेंसियों की मिलीभगत से नकली दवाओं की सप्लाई को आसान बनाया जा रहा था। अब इन सभी एजेंसियों की भूमिका की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह नेटवर्क कितनी गहराई तक फैला हुआ है।
लंबे समय से चल रहा था कारोबार
छापेमारी के दौरान सामने आए सबूतों से यह भी संकेत मिलता है कि यह अवैध फैक्ट्री काफी लंबे समय से सक्रिय थी। मशीनें, कच्चा माल और बड़ी मात्रा में तैयार दवाएं इस बात की गवाही दे रही हैं कि यह काम किसी एक-दो दिन का नहीं था। प्रशासन को शक है कि इस कारोबार से जुड़े कई अन्य लोग भी हैं, जो अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
आगे की कार्रवाई
औषधि नियंत्रण प्रशासन ने इस कार्रवाई को बड़ी सफलता बताया है। अधिकारियों ने कहा है कि अब इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश तेज कर दी गई है। संभावित ठिकानों पर छापेमारी की तैयारी की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। प्रशासन ने यह भी भरोसा दिलाया है कि नकली दवाओं के कारोबार पर कड़ी नजर रखी जाएगी और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए हर कानूनी कदम उठाया जाएगा। पटना में नकली दवा फैक्ट्री का यह खुलासा स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि प्रशासन अब इस तरह के अवैध धंधों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के मूड में है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।


