January 5, 2026

बांका में शादी का झांसा देकर नाबालिक का शोषण, स्टेशन पर छोड़कर फरार, पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज

बांका। जिले के रजौन थाना क्षेत्र में एक 15 वर्षीय किशोरी के साथ शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का मामला शुक्रवार की देर रात सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने गांव के ही पीयूष कुमार नामक युवक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। किशोरी ने अपने आवेदन में बताया कि वह और आरोपी पीयूष कुमार एक ही स्कूल में पढ़ते थे। और लगभग एक वर्ष से उनकी बातचीत प्रेम प्रसंग में बदल गई थी। आरोपी ने किशोरी के सामने शादी का वादा किया और इसी झांसे में उन्होंने कुछ बार शारीरिक संबंध बनाए। किशोरी ने जब विवाह की बात कही, तो 26 दिसंबर की रात उसे अपने घर से भागकर शादी करने के लिए कहा गया। 26 दिसंबर की रात को किशोरी के अनुसार दोनों बेलार रेलवे स्टेशन के हल्ट पर गए और वहीं पूरी रात बिताई। प्रार्थी के अनुसार उसने पीयूष कुमार को काफी देर तक ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिला। अंततः किशोरी अपने घर लौट आई और घटनाक्रम की जानकारी अपने परिवार को दी। परिवार के सदस्यों ने इसके बाद पीयूष के परिवार से शिकायत की। आरोपी के परिवार ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उनका बेटा घर पर ही है और उसने किशोरी को कहीं नहीं ले जाया। इस प्रकार मामले ने पुलिस की निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की दिशा पकड़ी। किशोरी के बयान के आधार पर पीयूष के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह कानून नाबालिगों से होने वाले यौन अपराधों के संरक्षण पर केंद्रित है और किशोर के लिए संरक्षित स्थान, प्रक्रिया और मजिस्ट्रेटिक निगरानी उपलब्ध कराता है। मेडिकल जांच भी कराई गई है, ताकि शरीरिक चोट या अन्य प्रमाणों का सत्यापन हो सके। इस प्रकार के मामलों में जांच के दौरान गवाहों की सुरक्षा, बयान की विश्वसनीयता, और पीड़िता के लिए उपयुक्त सहायता सेवाओं का प्रावधान अहम होता है। घटना से एक नाबालिग के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे मामलों में किशोरी के जीवन पर सामाजिक कलंक, परिवार की भूमिका, और समुदाय से मिलने वाली सहानुभूति-समर्थन का महत्व बढ़ जाता है। आरोपी के परिवार के कथन और पुलिस के माध्यम से की जाने वाली जांच के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है ताकि दोनों पक्षों के अधिकार सुरक्षित रहें। जांच के दौरान समुदाय में यह संदेश भी जाना चाहिए कि बाल सुरक्षा और यौन शोषण के विरुद्ध कठोर कदम उठाए जाते हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। किशोरी के बयान के अलावा चिकित्सा रिपोर्ट, कॉल रिकॉर्ड, संदेश स्पष्टता जैसे साक्ष्य एकत्रित किए जा रहे होंगे। किशोरी की मेडिकल जाँच से यौन शोषण के प्रमाण मिल सकेंगे या नहीं, यह उम्र और स्थिति के अनुसार देखा जाएगा। आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके परिवार के रिकॉर्ड से जुड़े तथ्य भी जाँच में शामिल होंगे। पॉक्सो अधिनियम के तहत मजिस्ट्रेटिक ट्रायल या अन्य निर्धारित प्रक्रियाओं के माध्यम से मामले की सुनवाई हो सकती है। इस प्रकार की घटनाओं में त्वरित और संवेदनशील रिपोर्टिंग चाहिए ताकि पीड़िता सुरक्षित महसूस करे और आरोपी के विरुद्ध ठोस कानूनन कदम उठाए जा सकें।

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