February 15, 2026

बिहार में 1960 से 2005 तक एक भी इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं खुला, जो थे लालू-राबड़ी राज में बंद हो गए : JDU

जदयू प्रदेश प्रवक्ता अरविंद निषाद एवं अभिषेक झा ने वर्चुअल माध्यम से रखी पार्टी की बात

पटना। जदयू कार्यालय स्थित कर्पूरी सभागार में मंगलवार को पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अरविंद निषाद एवं अभिषेक झा ने वर्चुअल माध्यम से पार्टी की बात रखी। प्रवक्ताओं ने सबसे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम को पुन: आरंभ करने की सराहना की। कार्यक्रम को लेकर बिहार के लोगों में जबरदस्त उत्साह है।
प्रवक्ताओं ने कहा कि बिहार की 79 प्रतिशत जनता ग्रामीण परिवेश से आती है और आर्थिक चुनौतियों के कारण बिहार के छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते थे। इस परेशानी को दूर करने हेतु मुख्यमंत्री ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना बिहार में चलाकर पूरे देश में एक मिशाल पेश की। आर्थिक दृष्टिकोण से कमजोर विद्यार्थियों को 4 लाख रुपए की धनराशि इंजीनियरिंग, मेडिकल इत्यादि की पढ़ाई करने हेतु इस योजना के माध्यम से दी जाने लगी। 20 अगस्त 2020 तक 86,544 छात्र-छात्राओं ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड का लाभ लिया। इन विद्यार्थियों को 1018 करोड़ 89 लाख 90 हजार 475 रुपए स्वीकृत किया गया। वहीं बिहार से बाहर पढ़ रहे 42,321 विद्यार्थियों को 3755 करोड़ 50 लाख 48 हजार 375 रुपए स्वीकृत किया गया। बिहार में रहने वाले 44,223 विद्यार्थियों के लिए 6433 करोड़ 48 लाख 57 हजार 136 रुपए स्वीकृत किया गया है। इसके अलावा विभिन्न सामाजिक समूह का स्कॉलरशिप भी उनको मिलता रहा और सरकार ने इस दिशा में सार्थक प्रयास किया है।
प्रवक्ता ने कहा कि 1960 से 2005 तक एक भी इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं खुला, निजी क्षेत्र के तीन इंजीनियरिंग कॉलेज भी लालू-राबड़ी राज में बंद हो गए। 2005 से 2020 तक 39 इंजीनियरिंग कॉलेज खुले। 1954 से 2005 तक राज्य में सरकारी क्षेत्र में 3 इंजीनियरिंग कॉलेज थे और उनकी प्रवेश क्षमता 800 थी। आज के दिन में यह प्रवेश क्षमता बढ़कर 9275 हो चुकी है। बिहार के इंजीनियरिंग कॉलेज का फीस 10 रूपये प्रति माह और एनुअल डेवलपमेंट फीस 2500 रुपए प्रति वर्ष है यानी कुल पढ़ाई का खर्च लगभग 14800 रूपये मात्र है। आजादी से 2005 के बीच सिर्फ एक मेडिकल कॉलेज 1971 में भागलपुर में खुला था। 2005 से 2020 के बीच 15 मेडिकल कॉलेज खुले।
राज्य में कुल 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जिनमें 1290 एमबीबीएस की सीट और 441 पीजी की सीट्स है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में वार्षिक फीस 6000 से 6500 रूपये मात्र है।

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