February 12, 2026

प्रदेश में 1 अप्रैल से महंगी होगी बिजली, 35 पैसे प्रति यूनिट बढ़ेंगे दाम, उपभोक्ताओं को झटका

पटना। बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाला वित्तीय वर्ष महंगा साबित हो सकता है। राज्य में 1 अप्रैल 2026 से बिजली दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। बिजली कंपनियों ने नई दरों के लिए जो शुल्क याचिका दाखिल की है, उसमें प्रति यूनिट 35 पैसे तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ेगा।
दर बढ़ोतरी का प्रस्ताव और संभावित असर
बिजली कंपनियों ने अपनी शुल्क याचिका में पुराने बकाए की बड़ी राशि को भी शामिल किया है। बताया जा रहा है कि तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की दावेदारी इस बार दरों में वृद्धि की मुख्य वजह बन सकती है। अगर प्रति यूनिट 35 पैसे की बढ़ोतरी लागू होती है तो मध्यम वर्गीय परिवारों का मासिक बिल सीधे तौर पर बढ़ जाएगा। जिन घरों में 200 से 300 यूनिट तक खपत होती है, उन्हें हर महीने अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ सकती है। हालांकि सरकार पहले 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की योजना के कारण चर्चा में रही है, लेकिन नई दरें लागू होने के बाद मुफ्त सीमा से अधिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है।
विनियामक आयोग के पास अंतिम फैसला
बिजली कंपनियों द्वारा दाखिल याचिका पर जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब मामला बिहार विद्युत विनियामक आयोग के विचाराधीन है। आयोग मार्च के दूसरे सप्ताह में नई दरों की घोषणा कर सकता है। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगी। फिलहाल आयोग कंपनी के दस्तावेजों और दावों का अध्ययन कर रहा है।
पुराने बकाए का विवाद
दर वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण वर्ष 2012 से जुड़ा एक वित्तीय विवाद बताया जा रहा है। उस समय बिजली बोर्ड के पुनर्गठन के बाद कंपनियों का गठन हुआ था। गठन के दौरान परिसंपत्तियों और देनदारियों को लेकर करीब 1100 करोड़ रुपये का मामला सामने आया था। उस समय यह तय हुआ था कि बोर्ड के बकाया दायित्वों का वहन राज्य सरकार करेगी, लेकिन कंपनियों को यह राशि नहीं मिल सकी। इसके बाद वर्ष 2015 में कंपनियों ने शुल्क याचिका के माध्यम से इस बकाए की मांग की थी, जिसे आयोग ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह राशि राज्य सरकार से ली जाए। इस फैसले के खिलाफ कंपनी विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण पहुंची। वहां सुनवाई के बाद न्यायाधिकरण ने कंपनी के पक्ष में निर्णय देते हुए मूल राशि के साथ ब्याज भी देने का आदेश दिया। ब्याज जुड़ने के बाद यह राशि पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गई। कंपनी ने अब फिर से तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की मांग को नई शुल्क याचिका में शामिल किया है। हालांकि आयोग ने जनसुनवाई के दौरान कंपनी से कहा है कि वह राज्य सरकार से भुगतान पाने का प्रयास दोबारा करे।
उपभोक्ताओं की चिंता
दर वृद्धि की संभावना से उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ गई है। पहले से महंगाई की मार झेल रहे लोगों का कहना है कि बिजली बिल में इजाफा उनके घरेलू बजट को और प्रभावित करेगा। छोटे दुकानदारों और मध्यम उद्योगों के लिए भी यह निर्णय चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि उत्पादन लागत बढ़ने का सीधा असर बाजार कीमतों पर पड़ता है।
सरकार और कंपनी का पक्ष
अधिकारियों का कहना है कि बिजली कंपनियां फिलहाल मुनाफे में चल रही हैं, इसलिए संभावित वृद्धि का बोझ सीमित रखा जा सकता है। सरकार भी यह सुनिश्चित करने की कोशिश में है कि गरीब और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार कम पड़े। अब सबकी निगाहें विनियामक आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। यदि प्रस्तावित वृद्धि को मंजूरी मिलती है तो 1 अप्रैल से नई दरें लागू हो जाएंगी। ऐसे में उपभोक्ताओं को अपने मासिक खर्च की नई गणना करनी होगी। बिहार में बिजली दरों को लेकर यह फैसला न सिर्फ आर्थिक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि उपभोक्ताओं की जेब कितनी ढीली होगी और सरकार इस बोझ को संतुलित करने के लिए क्या कदम उठाती है।

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